“मुझे और मां को बच्चा चाहिए था, मगर ट्वीशा शर्मा कंसीव करने के बाद से ही परेशान रहने लगी थी…”- यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की हकीकत है जो मां बनने के फैसले के बाद सामाजिक अपेक्षाओं, मानसिक दबाव और करियर असुरक्षा के बीच खुद को घिरा हुआ पाती हैं. भारत में मातृत्व को अक्सर खुशी और पूर्णता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि गर्भधारण और मदरहुड का अनुभव हर महिला के लिए एक जैसा नहीं होता. कई महिलाएं इस दौरान मानसिक तनाव, पहचान के संकट और नौकरी या आर्थिक भविष्य को लेकर चिंता महसूस करती हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक, “On my body, my decision” केवल एक स्लोगन नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रजनन अधिकार और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है. समाज और परिवार की उम्मीदें कई बार महिलाओं पर ऐसा दबाव बना देती हैं कि वे अपनी भावनाओं और जरूरतों को पीछे छोड़ देती हैं.
डॉ. दीपिका शर्मा कहती हैं-

Dr. Deepika Sharma
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेगनेसी और पोस्टपार्टम फेज में तनाव का खतरा कम नहीं होता. नौकरी, आर्थिक जिम्मेदारियां और वर्कप्लेस सपोर्ट की कमी इस दबाव को और बढ़ा सकती है. कई महिलाएं यह चिंता भी करती हैं कि मटैरनिटी ब्रेक उनके करियर ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है.
डॉ. दीपिका बताती हैं-

Dr. Deepika Sharma
भारत में मातृत्व और रोजगार को लेकर चुनौतियां भी चर्चा में रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मटैरनिटी बेनेफिट्स और सपोर्टिव वर्कप्लेस पॉलिसीज होने के बावजूद कई महिलाओं को करियर इंट्रप्शन या जॉब इन्सेक्योरिटी की चिंता बनी रहती है. यही कारण है कि प्रेगनेंसी केवल मेडिकल नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक मुद्दा भी बन जाती है.
सामाजिक विशेषज्ञ मानते हैं कि परिवारों में अक्सर बच्चा पैदा करने का निर्णय सामूहिक इच्छा के रूप में सामने आता है, लेकिन महिला की मानसिक तैयारी और पसंद पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती. “कब बच्चा होना चाहिए” और “क्या महिला तैयार है”- ये सवाल उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना प्रेगनेंसी का मेडिकल पहलू.
डॉ. कहती हैं,

Dr. Deepika Sharma
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्तत्व को लेकर बातचीत में केवल खुशी की तस्वीर दिखाने के बजाय मानसिक स्वास्थ्य, नौकरी और महिला की ऑटोनॉमी पर भी खुलकर चर्चा जरूरी है. क्योंकि आखिरकार, मां बनने का सफर तभी सकारात्मक हो सकता है जब उसमें महिला की इच्छा, सम्मान और मानसिक सुरक्षा शामिल हो.
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