Home Remedy for Cavity and Tooth Pain: आज के समय में दांतों की समस्या लगभग हर दूसरे व्यक्ति को परेशान कर रही है. किसी को मसूड़ों से खून आता है, किसी के दांतों में कैविटी बन जाती है, तो कोई मुंह से बदबू या सेंसिटिविटी से जूझ रहा है. ऐसे में ज्यादातर लोग महंगे टूथपेस्ट, माउथवॉश, बार-बार डेंटल क्लीनिंग और ट्रीटमेंट के पीछे भागने लगते हैं. कुछ समय के लिए आराम भी मिल जाता है, लेकिन थोड़े ही दिनों में वही समस्या दोबारा लौट आती है. आखिर ऐसा क्यों होता है? डॉक्टर सलीम जैदी के अनुसार, दांतों की ज्यादातर समस्याओं की जड़ सिर्फ ऊपर से दिखने वाली गंदगी नहीं, बल्कि मुंह के अंदर मौजूद बैक्टीरियल असंतुलन होता है.
ट्रीटमेंट से उस वक्त तो राहत मिल जाती है, लेकिन जैसे ही हम दवाइयां या स्पेशल प्रोडक्ट्स बंद करते हैं और नॉर्मल खानपान शुरू करते हैं, बैक्टीरिया फिर से एक्टिव हो जाते हैं. इसका नतीजा मसूड़ों में सूजन, कैविटी, बदबूदार सांस और ब्लीडिंग गम्स.
मुंह एक बैक्टीरियल कॉलोनी है:
डॉक्टर सलीम जैदी बताते हैं कि हमारा मुंह एक तरह की बैक्टीरियल कॉलोनी है. इसमें अच्छे और बुरे, दोनों तरह के बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं. जब तक इनका संतुलन बना रहता है, तब तक दांत और मसूड़े हेल्दी रहते हैं. लेकिन, जैसे ही यह बैलेंस बिगड़ता है, समस्याएं शुरू हो जाती हैं:
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- दांतों में कीड़ा लगना.
- मसूड़ों से खून आना.
- ठंडा-गरम लगना.
- मुंह से बदबू आना.
यही वजह है कि सिर्फ ऊपर-ऊपर सफाई करने से या महंगे ट्रीटमेंट कराने से समस्या जड़ से खत्म नहीं होती.
कैविटी कैसे बनती है?
दांतों में कैविटी बनने की एक बड़ी वजह स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस नाम का बैक्टीरिया है. जब भी हम मीठा या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाते हैं, ये बैक्टीरिया उसे एसिड में बदल देते हैं. यही एसिड धीरे-धीरे दांतों के इनामेल को तोड़ने लगता है. इसी प्रक्रिया को आम भाषा में दांत में कीड़ा लगना कहा जाता है. अगर समय रहते इस बैक्टीरियल एक्टिविटी को कंट्रोल न किया जाए, तो कैविटी गहरी होती चली जाती है.

त्रिफला माउथ वॉश | Triphala Mouthwash
डॉक्टर सलीम जैदी एक वीडियो में बताते हैं कि इन सभी समस्याओं की जड़ बैक्टीरियल इंबैलेंस, इंफ्लेमेशन और मुंह का बिगड़ा हुआ पीएच लेवल को टारगेट करने के लिए आयुर्वेद में एक बेहद असरदार और सुरक्षित उपाय मौजूद है. यह उपाय है त्रिफला चूर्ण से बना माउथ वॉश.
त्रिफला, आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध औषधि है, जिसमें हरड़, बहेड़ा और आंवला शामिल होते हैं. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और हीलिंग गुण भरपूर मात्रा में होते हैं.
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त्रिफला माउथ वॉश के फायदे | Benefits of Triphala Mouthwash
- मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है.
- मसूड़ों की सूजन और ब्लीडिंग को कम करता है.
- मुंह की एसिडिटी को न्यूट्रल करता है.
- दांतों के इनामेल को मजबूत और सुरक्षित करता है.
- बदबूदार सांस से राहत दिलाता है.
सबसे अच्छी बात यह है कि यह उपाय पूरी तरह नेचुरल और सेफ है. इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते.
कैसे बनाएं त्रिफला माउथ वॉश? | How to Make Triphala Mouthwash?
- आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण लें.
- इसमें 200 एमएल पानी डालें.
- मीडियम आंच पर 2–3 मिनट तक उबालें.
- जब पानी गुनगुना हो जाए, तो इसे छान लें.
- इस पानी से अच्छी तरह माउथ वॉश करें.
आप इसे दिन में दो बार, सुबह और रात को इस्तेमाल कर सकते हैं.
क्यों है यह उपाय लॉन्ग टर्म के लिए बेहतर?
जहां केमिकल माउथ वॉश और ट्रीटमेंट कुछ समय के लिए बैक्टीरिया को दबा देते हैं, वहीं त्रिफला माउथ वॉश धीरे-धीरे मुंह के अंदर का नेचुरल बैलेंस ठीक करता है. यह सिर्फ लक्षणों को नहीं, बल्कि समस्या की जड़ को सुधारने पर काम करता है.
अगर आप बार-बार दांतों की कैविटी, मसूड़ों से खून, बदबू या सेंसिटिविटी से परेशान हैं और महंगे ट्रीटमेंट के बावजूद राहत नहीं मिल रही, तो जरूरी है कि आप बैक्टीरियल बैलेंस पर ध्यान दें. त्रिफला से बना यह आयुर्वेदिक माउथ वॉश एक सरल, सस्ता और असरदार उपाय हो सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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