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60 साल की उम्र में कितना पैदल चलना चाहिए? 

उम्र बढ़ने का ये मतलब बिल्कुल भी नहीं होता है कि फिजिकल एक्टिविटी कम कर ली जाए. यहां जानते हैं 60 की उम्र के बाद कितना पैदल चलना चाहिए?

60 साल की उम्र में कितना पैदल चलना चाहिए? 
International Day of Older Persons: 60 की उम्र में कितना पैदल चलें?

International Day of Older Persons:  उम्र बढ़ने के साथ शरीर की जरूरतें बदलती हैं, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि उम्र के साथ फिजिकल एक्टिविटी भी कम कर देनी चाहिए. 60 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से वॉक करने से हार्ट, मसल्स, मेंटल हेल्थ और हड्डियों के हेल्थ को बेहतर किया जा सकता है. हालांकि, इस उम्र में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कोई व्यक्ति कितने कदम चले, बल्कि ये भी है कि इस उम्र में कितनी गति से पैदल चलना चाहिए, कितनी नियमितता रखना चाहिए और उसकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति क्या है. इस विषय की जानकारी के लिए हमने सीके बिड़ला हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट अंशुल कुमार जैन से बातचीत की है. 

डॉ. अंशुल का कहना है कि 60 वर्ष की उम्र में स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजाना लगभग 30 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि एक अच्छा लक्ष्य हो सकता है. इसे एक बार में करना जरूरी नहीं है. शुरुआत में 10-15 मिनट की दो या तीन छोटी वॉक भी की जा सकती हैं. धीरे-धीरे अवधि और गति बढ़ाई जा सकती है.

60 की उम्र में कितने कदम पर्याप्त हैं?

डॉक्टर कहते हैं कि इन दिनों सोशल मीडिया पर अक्सर लोगों को 10 हजार कदम पैदल करने की सलाह दी जाती है. लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक, हर एक व्यक्ति के लिए ये कदम सही नहीं होते हैं. किसी व्यक्ति की फिटनेस, वजन, घुटनों की स्थिति, हार्ट हेल्थ और पहले से मौजूद बीमारियों के आधार पर उसकी जरूरत अलग हो सकती है.

कई लोगों के लिए रोजाना 6,000-8,000 कदमों तक धीरे-धीरे पहुंचना व्यावहारिक लक्ष्य हो सकता है. वहीं, जो व्यक्ति पहले से एक्टिव है और बिना परेशानी के ज्यादा चल सकते हैं, वे अपने लक्ष्य को बढ़ा सते हैं. साथ ही वे अपनी गति भी बढ़ा सकते हैं. मुख्य उद्देश्य किसी निश्चित संख्या को पूरा करना नहीं, बल्कि लंबे समय तक नियमित रूप से सक्रिय रहना होना चाहिए.

सिर्फ धीरे चलना काफी है या तेज चाल जरूरी है?

डॉक्टर कहते हैं कि वॉकिंग का फायदा उसकी इंटेंसिटी पर भी निर्भर करता है. सामान्य टहलने की तुलना में ब्रिस्क वॉकिंग हार्ट और लंग्स हेल्थ को ज्यादा एक्टिव करती है. 

एक आसान तरीका टॉक टेस्ट है. अगर व्यक्ति चलते समय बातचीत कर सकता है, लेकिन लगातार गाने में सक्षम नहीं है, तो ये अक्सर मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि का संकेत हो सकता है. हालांकि, किसी व्यक्ति को अपनी क्षमता से अधिक तेज चलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. 60 वर्ष की उम्र के बाद अचानक तेज वॉकिंग शुरू करने के बजाय गति धीरे-धीरे बढ़ाना अधिक सुरक्षित तरीका होता है. 

वॉकिंग से हार्ट को क्या फायदा हो सकता है?

नियमित रूप से अगर आक वॉकिंग करते हैं, तो इससे ब्लड प्रेशर, शरीर का वजन, ब्लड शुगर और ऑवरऑल कार्डियो फिटनेस को बेहतर किया जा सकता है. ये लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को भी कम करती है, जो उम्र बढ़ने के साथ महत्वपूर्ण हो जाता है.

कार्डियोलॉजिस्ट का मानना है कि वॉकिंग को किसी इलाज की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. अगक किसी व्यक्ति को हाइपरटेंशव, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या पहले से हार्ट डिजीज है, तो वॉकिंग उसके ऑवरऑल ट्रीटमेंट और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट का हिस्सा हो सकती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह और दवा का विकल्प नहीं हो सकता है. 

60 के बाद वॉकिंग शुरू करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जो व्यक्ति लंबे समय से एक्टिव नहीं रहा है, उसे शुरुआत में बहुत अधिक स्टेप्स के लक्ष्य को रखने के बजाय धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए. आरामदायक जूते पहनना, पर्याप्त पानी पीना और बहुत गर्म या प्रदूषित मौसम में आउटडोर वॉकिंग से बचना भी जरूरी होता है.

अगर चलते समय सीने में दर्द या दबाव, असामान्य सांस फूलना, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना या अचानक अत्यधिक कमजोरी हो, तो एक्सरसाइज को रोककर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. मुख्य रूप से अगर आपको किसी तरह की गंभीर बीमारी या फिर हार्ट डिजीज है, तो इस स्थिति में फौरन डॉक्टर की सलाह लें. 

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