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This Article is From Mar 17, 2018

प्लास्टिक की बॉटल में पानी पीते हैं तो सावधान, ये है बीमारी को बुलावा

हर दिन एक लीटर बोतल बंद पानी पीने वाले व्यक्ति हर साल प्लास्टिक के दस हजार तक सूक्ष्म कण ग्रहण करता है...जानें और क्या है रिपोर्ट में...

प्लास्टिक की बॉटल में पानी पीते हैं तो सावधान, ये है बीमारी को बुलावा
बोतल बंद पानी की 90 फीसदी बोतलें दूषित
  • बोतलों में मिल रहा पानी दूषित
  • भारत समेत अमेरिका में भी पानी खराब
  • एक बोतल में 10 हजार तक सूक्ष्म कण
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नई दिल्ली: दुनिया भर में लोग प्लास्टिक बॉटल्स में पानी पीने के चलन को जमकर फॉलो करते हैं. समय की कमी और सुविधाओं के चलते साथ में पानी को बोतल रखने का भार कोई नहीं उठाता. लेकिन यह आदत हमारी सेहत पर भारी पड़ रही है. बोतल बंद पानी में प्लास्टिक के अदृश्य कणों को देखने के लिए शोध दल ने विशेष डाई और नीली रोशनी का उपयोग किया. शोध में 100 माइक्रोंस और 6.5 माइक्रोंस के आकार के दूषित कणों की पहचान हुई.

भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों में बोतल बंद पेयजल बनाने वाली कंपनियों के लगभग 150 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार के बावजूद इनमें प्लास्टिक के सूक्ष्म कण और मनुष्य के लिए अन्य हानिकारण तत्व मौजूद रहते हैं. अमेरिका की एक गैर लाभकारी संस्था ओर्ब मीडिया की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इसमें पॉलीप्रोपिलीन, नायलॉन और पॉलीथिलीन टेरेफ्थेलेट जैसे तत्व मौजूद रहते हैं.

शोध में बताया गया कि जो व्यक्ति एक दिन में एक लीटर बोतल बंद पानी पीता है वह प्रतिवर्ष प्लास्टिक के दस हजार तक सूक्ष्म कण ग्रहण करता है. शोध के दौरान 93 फीसदी नमूनों में प्लास्टिक पाई गई. 

बाजार में 147 अरब डॉलर प्रति वर्ष के व्यापार के साथ यह दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला पेय उत्पाद उद्योग है.

शोधकर्ता अभी तक हालांकि मानव शरीर पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों के बारे में सुनिश्चित नहीं हैं.

पांच महाद्वीपों में भारत, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, केन्या, लेबनान, मेक्सिको, थाईलैंड और अमेरिका से 19 स्थानों से नमूने एकत्र किए गए.

(इनपुट - आईएएनएस)

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