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Pre-Workout Powder और Steroids से अचानक मौत का खतरा, एक्सपर्ट की चेतावनी

 कार्डियोवैस्कुलर और थोरैसिक सर्जन और इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग डिजीज के चेयरमैन डॉ. राहुल चंदोला ने कहा कि, सोशल मीडिया पर फिटनेस कल्चर और ऑनलाइन सप्लीमेंट मार्केटिंग इस ट्रेंड को और बढ़ा रहे हैं. इसकी वजह से कई लोग ऐसे प्रोडक्ट्स और एक्सरसाइज रूटीन अपना रहे हैं जो दिल पर गंभीर दबाव डाल सकते हैं.

Pre-Workout Powder और Steroids से अचानक मौत का खतरा, एक्सपर्ट की चेतावनी
सोशल मीडिया फिटनेस ट्रेंड बना हार्ट के लिए खतरा.

भारत में युवाओं के बीच मस्कुलर बॉडी और तेजी से बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन का बढ़ता क्रेज खतरनाक लेवल पर स्टेरॉयड, ज्यादा स्टिमुलेंट वाले प्री-वर्कआउट पाउडर और बिना रेगुलेशन वाले जिम सप्लीमेंट्स के गलत इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है. कार्डियोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इससे दिल की धड़कन बिगड़ना, हार्ट फेल होना और अचानक हार्ट से जुड़ी गंभीर घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है, यहां तक कि देखने में पूरी तरह स्वस्थ युवा पुरुषों में भी.

 कार्डियोवैस्कुलर और थोरैसिक सर्जन और इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग डिजीज के चेयरमैन डॉ. राहुल चंदोला ने कहा कि, सोशल मीडिया पर फिटनेस कल्चर और ऑनलाइन सप्लीमेंट मार्केटिंग इस ट्रेंड को और बढ़ा रहे हैं. इसकी वजह से कई लोग ऐसे प्रोडक्ट्स और एक्सरसाइज रूटीन अपना रहे हैं जो दिल पर गंभीर दबाव डाल सकते हैं.

चंदोला ने पीटीआई से कहा, “हम लगातार ऐसे युवाओं को देख रहे हैं जिन्हें बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट या स्टेरॉयड लेने की वजह से दिल की धड़कन तेज होना, हार्ट रिद्म बिगड़ना, ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ना और यहां तक कि दिल की बनावट में शुरुआती बदलाव जैसी समस्याएं हो रही हैं. उन्होंने कहा, “समस्या एक्सरसाइज नहीं है. नियमित व्यायाम दिल को सुरक्षित रखता है. खतरा तब होता है जब लोग बहुत ज्यादा वर्कआउट के साथ स्टिमुलेंट्स, एनाबॉलिक स्टेरॉयड, डिहाइड्रेशन और अवास्तविक बॉडी इमेज की चाह को जोड़ देते हैं.”

फिटनेस के शौकीनों और शौकिया बॉडीबिल्डर्स में अचानक गिरने और हार्ट से मौत के मामले सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में चिंता का विषय बन रहे हैं. एम्स के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जन डॉ. मयंक यादव ने कहा कि कई युवा यह गलत मान लेते हैं कि ऑनलाइन बिकने वाले या फिटनेस इंफ्लुएंसर्स द्वारा प्रमोट किए जाने वाले सप्लीमेंट्स पूरी तरह सुरक्षित होते हैं.

लोग सोचते हैं कि अगर कोई प्रोडक्ट ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक रहा है या फिटनेस इंफ्लुएंसर्स इस्तेमाल कर रहे हैं, तो वह नुकसान नहीं करेगा. लेकिन यह सोच खतरनाक है क्योंकि कई प्रोडक्ट्स पर सही तरीके से निगरानी नहीं होती या उन्हें गलत मात्रा में लिया जाता है. उन्होंने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती फिटनेस इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर चल रहा “एस्थेटिक फिटनेस” कल्चर इस ट्रेंड को काफी बढ़ा रहा है.

डॉक्टर ने कहा कि इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ट्रांसफॉर्मेशन वीडियो, सप्लीमेंट प्रमोशन और बेहद कठिन फिटनेस चैलेंजेस की भरमार है, जो युवाओं को टारगेट करते हैं. हाल की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक रिपोर्ट्स में पाया गया है कि एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल से दिल की पंपिंग क्षमता कम हो सकती है, दिल की दीवारें मोटी हो सकती हैं और दिल की संरचना में नुकसान पहुंचाने वाले बदलाव हो सकते हैं.

इसी तरह कई आधुनिक प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स में बहुत ज्यादा कैफीन, स्टिमुलेंट्स और परफॉर्मेंस बढ़ाने वाले तत्व होते हैं, जो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ाकर कुछ लोगों में गंभीर दिल संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.

चंदोला ने कहा कि एक और गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है — किसी भी कठिन एक्सरसाइज प्रोग्राम या बेहद भारी फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले सही हार्ट चेकअप का न होना. उन्होंने कहा, “कई युवाओं में पहले से ही दिल की कुछ छिपी हुई समस्याएं हो सकती हैं, जिनका पता नहीं चलता और भारी एक्सरसाइज के दौरान अचानक गंभीर घटना हो सकती है.” उन्होंने बताया कि आमतौर पर होने वाले सालाना हेल्थ चेकअप भी छिपी हुई दिल की बीमारियों को पहचानने के लिए काफी नहीं होते.

उन्होंने कहा, “जिन मरीजों को बाद में हार्ट अटैक आता है, उनमें से कई बताते हैं कि उन्होंने हाल ही में ‘नॉर्मल हेल्थ चेकअप' कराया था. लेकिन ज्यादातर सामान्य हेल्थ पैकेज सिर्फ ब्लड टेस्ट और रेस्टिंग ईसीजी तक सीमित होते हैं. ईसीजी दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी की सिर्फ थोड़ी देर की जानकारी देता है और इससे अंदरूनी ब्लॉकेज या दिल की गहरी संरचनात्मक समस्याओं का पता लगाना मुश्किल होता है.”

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चंदोला के मुताबिक इससे लोगों को झूठा भरोसा मिल जाता है और कई हाई-रिस्क लोग नियमित चेकअप कराने के बावजूद भी पहचान में नहीं आते. उन्होंने कहा कि जो लोग हाई-इंटेंसिटी फिटनेस प्रोग्राम, जिम ट्रेनिंग या एंड्योरेंस एक्सरसाइज करते हैं, उन्हें ज्यादा बेहतर कार्डियोवैस्कुलर स्क्रीनिंग करानी चाहिए. खासकर 40 साल से ऊपर के लोगों या डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, धूम्रपान या परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रखने वालों को.

चंदोला ने कहा, “प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी को सिर्फ ब्लड रिपोर्ट्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए. बायोसेंसर टेक्नोलॉजी और एआई आधारित कार्डियोवैस्कुलर स्क्रीनिंग से अब दिल की सेहत का जल्दी और ज्यादा सही आकलन संभव हो रहा है.” उन्होंने कहा कि iLiveConnect जैसे एआई आधारित वेलनेस हेल्थकेयर मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म्स हेल्थकेयर को पहले से ज्यादा प्रिवेंटिव और प्रोएक्टिव बनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे छिपे हुए हार्ट रिस्क की पहचान ज्यादा सटीक तरीके से हो सकती है.

उन्होंने कहा, “दिल की देखभाल का भविष्य शुरुआती पहचान में है. अगर हम लक्षण आने से पहले जोखिम वाले लोगों को पहचान लें, तो कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है.” डॉक्टर्स ने जिम से पहले लिए जाने वाले ज्यादा स्टिमुलेंट वाले प्री-वर्कआउट पाउडर्स के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी है.

चंदोला ने कहा, “इन प्रोडक्ट्स में बहुत ज्यादा कैफीन और कई तरह के स्टिमुलेंट्स हो सकते हैं. कुछ लोग डबल स्कूप लेते हैं या इन्हें एनर्जी ड्रिंक के साथ मिलाकर पीते हैं, जिससे दिल पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है.” उन्होंने युवाओं को तेजी से मसल्स बनाने के शॉर्टकट्स से बचने और किसी भी परफॉर्मेंस बढ़ाने वाले पदार्थ का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने की सलाह दी.

उन्होंने कहा, “एक्सरसाइज और फिटनेस रूटीन का मकसद अच्छी सेहत और लंबी उम्र होना चाहिए, न कि सिर्फ दिखावे या सोशल मीडिया पर लोगों की तारीफ पाने के लिए दिल को खतरे में डालना.”

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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