अब तक जिस कफ सिरप को आप डॉक्टर की पर्ची के बगैर ही सीधे केमिस्ट की दुकान से खरीद लेते थे, अब वह नहीं मिलेगी. अब कफ सिरप खरीदने के लिए भी डॉक्टर की पर्ची जरूरी होगी. सरकार ने इसके लिए नियम बदल दिए हैं, ताकि पूरे देश में डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप की बिक्री पर रोक लगाई जा सके.
सरकार ने यह फैसला तब लिया है, जब हालिया सालों में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में मिलावटी कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं.
अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का मकसद खांसी के सिरप समेत सिरप-बेस्ड दवाओं को ज्यादा सख्त रेगुलेटरी निगरानी में लाना है.
क्या है सरकार का फैसला? समझिए
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन किया है. इन नियमों के शेड्यूल K के सीरियल नंबर 13 के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप की बिक्री के लिए कुछ रिटेल बिक्री नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं थी.
इस एंट्री से अब 'सिरप' शब्द को हटा दिया गया है. इसका मतलब हुआ कि अब कफ सिरप और सिरप बेस्ड दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्टी के बगैर नहीं बेचा जा सकेगा.
Union Ministry of Health and Family Welfare issues notification which brings into effect that all 'Syrups', including cough syrups will no longer be available over the counter. A prescription by a doctor will be required for the purchase of 'Syrups'. pic.twitter.com/k0jsP25EqJ
— ANI (@ANI) June 16, 2026
तो अब कैसे मिलेगी कफ सिरप?
ऐसा नहीं है कि कफ सिरप की बिक्री पर रोक लगी है. सिर्फ डॉक्टर की पर्ची के बगैर इसे नहीं खरीदा जा सकेगा. फार्मेसी की दुकानों से कफ सिरप अब भी खरीदी जा सकती है. बस फर्क इतना आएगा कि डॉक्टर का पर्चा जरूरी होगा.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कफ सिरप का कारोबार करने वाले मैनुफैक्चरर्स, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल दुकानदारों को सलाह दी है कि वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और ड्रग्स रूल्स 1945 के तहत लागू लाइसेंसिंग और रेगुलेटरी नियमों का सख्ती से पालन करें.
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इसका असर क्या होगा?
इसका सबसे बड़ा असर तो यही हुआ कि अब बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप नहीं बेची जाएगी. इसका असर कफ सिरप के बाजार पर भी पड़ेगा.
भारत में कफ सिरप का बाजार बहुत बड़ा है. भारत में कफ सिरप का बाजार 2024 तक 21,800 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.
हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स कफ सिरप के मार्केट को कम बताती हैं. मार्केट रिसर्च फ्यूचर की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 तक भारत का कफ सिरप का बाजार 32.8 करोड़ डॉलर का था. 2035 तक यह बढ़कर 65 करोड़ डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है. हर साल भारत का कफ सिरप का मार्केट 6.5 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है.
ये फैसला क्यों जरूरी था?
कफ सिरप कई तरह के आते हैं और डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन नहीं होने के कारण केमिस्ट वाले अपने मुनाफे के हिसाब से कोई भी कफ सिरप दे सकते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. बिना पर्ची के कफ सिरप की बिक्री पर रोक लगाना इसलिए जरूरी था, क्योंकि हालिया सालों में कफ सिरप से भारत में बच्चों की मौत के कई मामले सामने आए हैं. पिछले साल मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीली कफ सिरप से लगभग 25 बच्चों की मौत हो गई थी.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष डॉ. अनिल नायक ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा कि यह एक अच्छा फैसला है, क्योंकि ज्यादातर सिरप में थोड़ी मात्रा में कैफीन होता है, इसलिए लोग नशे के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं.
#WATCH | Delhi: On govt's decision to ban the over-the-counter sale of all 'Syrups', including cough syrups, Indian Medical Association (IMA) President Dr Anil Nayak says, "...We welcome our government's decision. Its a good decision, because most syrups contain a little… pic.twitter.com/rkFjCr8P5v
— ANI (@ANI) June 16, 2026
कोकून हॉस्पिटल के सीनियर पीडियाट्रिक कंसल्टेंट डॉ. जितेंद्र जैन ने ANI से कहा कि बच्चों की सुरक्षा के नजरिए से कफ सिरफ को मिली छूट खत्म करना अच्छा कदम है.
उन्होंने कहा कि अक्सर कफ सिरप को अक्सर आम दवा माना जाता है लेकिन छोटे बच्चों में बिना सही डॉक्टरी सलाह के इस्तेमाल से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि खांसी कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह वायरल, एलर्जी, अस्थमा, निमोनिया या किसी अंदरूनी बीमारी का लक्षण हो सकती है, जिसके लिए क्लीनिकल जांच की जरूरत होती है. डॉक्टर की सलाह लेने से मदद मिल सकती है कि बच्चों को सही डायग्नोसिस, सही दवा और उनके लक्षणों के आधार पर सही डोज मिले.
#WATCH | Delhi: On govt's decision to ban the over-the-counter sale of all 'Syrups', including cough syrups, Senior Paediatric Specialist Dr Dhiren Gupta says, "I think this decision should have been made many years ago. If we examine the details of the decision, it applies to… pic.twitter.com/iMBcHG9na4
— ANI (@ANI) June 16, 2026
वहीं, सीनियर पीडियाट्रिक स्पेशलिस्ट डॉ. धीरेन गुप्ता ने कहा कि यह फैसला कई साल पहले ही ले लिया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि यह फैसला सभी सिरप पर लागू होता है, न कि सिर्फ खांसी-जुकाम के सिरप पर. उन्होंने यह भी कहा कि कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के लिए भी होता था. उन्होंने सवाल उठाया कि समस्या यह है कि इन नियमों को लागू कौन करेगा? समस्या अभी भी वही है. सबसे मुश्किल बात यह है कि आप इसे ग्रामीण इलाकों में कैसे लागू करेंगे? आज भी, इसे जमीनी स्तर पर लागू करना एक मुश्किल काम होगा.
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