MP News: मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से एक बड़े अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत के निर्देशन और मऊगंज पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी की सक्रिय रणनीति से पुलिस उस मास्टरमाइंड तक पहुंचने में सफल हुई, जिसने ड्रग लाइसेंस की आड़ में देश के कई राज्यों में नशीली कफ सिरप की अवैध सप्लाई का जाल फैला रखा था.
फिल्मी अंदाज में पकड़ी गई पहली खेप
दरअसल मऊगंज में नशीली कफ सिरप की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने निगरानी तेज कर दी थी. 28 मार्च 2025 को मुखबिर की सूचना पर तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गाड़ा मोड़ के पास घेराबंदी की. इस दौरान बिना नंबर की सफेद कार को रोककर तलाशी ली गई तो उसमें से 2160 शीशी ऑनरेक्स कफ सिरप बरामद हुई. इसकी कीमत करीब 4.21 लाख रुपये आंकी गई. मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें अमित सिंह, अमोल तिवारी और आशीष पटेल शामिल हैं. इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.
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जांच में खुलती गई नेटवर्क की परतें
पूछताछ के दौरान वाहन मालिक अनिरुद्ध सिंह और सिंगरौली निवासी राहुल द्विवेदी का नाम सामने आया. जांच में पता चला कि राहुल द्विवेदी इस नेटवर्क की अहम कड़ी था और उसके तार मऊगंज, रीवा, सीधी, सिंगरौली से लेकर वाराणसी तक जुड़े हुए थे. आगे की जांच में सुमित केसरी नाम का डीलर सामने आया, जो फर्जी फर्मों के नाम पर बिलिंग कर नशीली कफ सिरप की सप्लाई करवाता था.
50 सदस्यीय SIT बनी, कई राज्यों में छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश पुलिस की संयुक्त 50 सदस्यीय एसआईटी बनाई गई. टीम ने वाराणसी, कानपुर, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कई जगह छापेमारी की. जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क ड्रग लाइसेंस का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर नशीली कफ सिरप की सप्लाई कर रहा था.

मास्टरमाइंड विनोद अग्रवाल तक ऐसे पहुंची पुलिस
पूछताछ में इस नेटवर्क का असली सरगना कानपुर निवासी विनोद अग्रवाल सामने आया. पुलिस के मुताबिक वही इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सप्लायर था. उसके खिलाफ कई थानों में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं. मऊगंज पुलिस ने उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था. उत्तरप्रदेश पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम रखा था. काफी समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार यूपी पुलिस ने उसे हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया.
350 फर्जी फर्म और 20 लाख बोतलों की सप्लाई
पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए है. पुलिस जांच के अनुसार 350 से ज्यादा फर्जी फर्म बनाई गईं. करीब 20 लाख बोतल कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई की गई. 47 फर्मों में दवाओं की सप्लाई का रिकॉर्ड मिला. कई फर्में सिर्फ कागजों पर ही मौजूद थीं. यह पूरा नेटवर्क करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी विनोद अग्रवाल की करीब 9.5 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी है. इससे पहले वाराणसी कमिश्नरेट की सारनाथ पुलिस भी उसकी संपत्ति जब्त कर चुकी है. मऊगंज पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों की पहचान की जा रही है. जांच आगे बढ़ने पर इस गिरोह से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं.
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