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क्या डॉक्टर की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही है? फ्लोरिडा की इस महिला की कहानी से लें सीख

क्या डॉक्टर की हर रिपोर्ट 100% सही होती है? फ्लोरिडा की महिला के साथ हुई गलती ने हम सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है.

क्या डॉक्टर की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही है? फ्लोरिडा की इस महिला की कहानी से लें सीख
गांठ को मामूली समझने की गलती न करें.
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आज के समय में हर कोई खुद को फिट और हेल्दी रखना चाहता है और इसीलिए समय-समय में लोग अपना चेकअप कराने डॉक्टर के पास जाते हैं. लेकिन सोचिए, आप अपने शरीर में कोई बदलाव देखते हैं, डरकर डॉक्टर के पास जाते हैं, टेस्ट करवाते हैं और डॉक्टर मुस्कुराकर कहता है- चिंता मत कीजिए, सब बिल्कुल नॉर्मल है. आप चैन की सांस लेते हैं. लेकिन कुछ महीने बाद पता चले कि वह बीमारी शरीर में तेजी से फैल चुकी थी और डॉक्टर से बहुत बड़ी गलती हो गई.

​ऐसा ही कुछ हुआ अमेरिका के फ्लोरिडा की रहने वाली डेबोरा हिग्स (Deborah Higgs) के साथ. एक डॉक्टर की गलत रिपोर्ट (मिसडायग्नोसिस) की वजह से आज वह कैंसर की आखिरी स्टेज (Stage 4 breast cancer) से जूझ रही हैं. इस लापरवाही के खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और अब उन्हें मुआवजे के तौर पर करीब 58 करोड़ रुपये ($7 Million) मिलने का फैसला हुआ है. आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और इससे हर महिला को क्या सीख लेनी चाहिए.

​क्या है पूरा मामला?

​फरवरी 2022 की बात है. डेबोरा हिग्स को अपने ब्रेस्ट में एक गांठ (lump) महसूस हुई. उन्होंने बिना देरी किए पेन्साकोला के 'बैप्टिस्ट मेडिकल पार्क' में अपना डायग्नोस्टिक मैमोग्राम और अल्ट्रासाउंड कराया. वहां के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हेनरी लुसाने ने उनकी रिपोर्ट देखी और कहा कि सब ठीक है, कोई बीमारी नहीं है.

​अक्टूबर आते-आते वह गांठ न सिर्फ बड़ी हो गई, बल्कि उसमें तेज दर्द भी होने लगा. डेबोरा दोबारा उसी डॉक्टर के पास गईं. इस बार जब डॉक्टर ने इमेजिंग डेटा देखा, तो उनके होश उड़ गए. साफ दिख रहा था कि वहां कैंसर है. डेबोरा के वकील जोनाथन फ्रेडिन के मुताबिक, इस पूरी लापरवाही के कारण डेबोरा के इलाज में 8 महीने की देरी हो गई. जब तक कैंसर का पता चला, वह शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल चुका था और डॉक्टरों ने इसे 'टर्मिनल स्टेज 4' घोषित कर दिया, यानी ऐसा कैंसर जिसे अब पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता. डेबोरा ने कहा मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था. मैं अपनी सेहत को लेकर हमेशा बहुत अलर्ट रहती थी. मुझे बहुत गुस्सा आया और लगा कि यह मेरे साथ बहुत गलत हुआ है. अस्पतालों पर हम भरोसा करते हैं कि वे हमारी जान बचाएंगे, लेकिन यहां सब उल्टा हो गया

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ब्रेस्ट में किसी भी तरह की गांठ को हल्के में न लें. (Image NDTV) 

​कैंसर रिसर्च से जुड़ी जरूरी बातें- 

​कैंसर रिसर्च यूके (Cancer Research UK) के अनुसार, यदि ब्रेस्ट कैंसर का पता पहली स्टेज (Stage 1) में चल जाए, तो 98% से ज्यादा महिलाएं कम से कम 5 साल या उससे ज्यादा समय तक जीवित रहती हैं. लेकिन अगर यही पता चौथी स्टेज (Stage 4) में चले, तो यह दर घटकर सिर्फ 25% रह जाती है.

​जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (Journal of Clinical Oncology) की इस स्टडी में बताया गया है कि कैंसर के इलाज में 3 से 6 महीने की देरी भी मरीज के बचने की संभावना को काफी हद तक कम कर देती है और ट्यूमर को शरीर में फैलने का मौका देती है.

ब्रेस्ट कैंसर क्या है? (What is Breast Cancer)

ब्रेस्ट कैंसर तब होता है जब ब्रेस्ट यानी स्तन के टिश्यू में मौजूद कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ या ट्यूमर बना देती हैं.

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर- (Symptoms of Breast Cancer)

  1. ​गांठ या सूजन- छाती या बगल (Armpit) में किसी तरह की गांठ या भारीपन महसूस होना. भले ही इसमें दर्द न हो, फिर भी इसे चेक कराएं.
  2. ​टिश्यू का मोटा होना- ब्रेस्ट के किसी हिस्से की स्किन का अचानक कड़ा या मोटा हो जाना.
  3. ​स्किन में बदलाव- ब्रेस्ट की स्किन का लाल होना या उसमें डिंपल जैसा पड़ना.
  4. ​निप्पल में दर्द- निप्पल एरिया में लगातार दर्द या संवेदनशीलता महसूस होना.
  5. ​निप्पल का अंदर मुड़ना- अगर निप्पल बाहर की तरफ रहने के बजाय अंदर की ओर धंसने लगे.
  6. ​निप्पल से डिस्चार्ज- निप्पल से किसी तरह का लिक्विड या खून का आना.
  7. ​बगल में सूजन- हाथ के नीचे (Underarm) के लिम्फ नोड्स में सूजन आ जाना.
  8. ​घाव होना- निप्पल के आस-पास की स्किन पर कोई ऐसा घाव या छाला होना जो ठीक न हो रहा हो.

बचाव के लिए अपनाएं ये आसान तरीके-

  • वजन को कंट्रोल- मोटापा कई बीमारियों की जड़ है. सही डाइट और एक्सरसाइज से अपना वजन नॉर्मल रखें.
  • ​शराब से दूरी- ज्यादा अल्कोहल पीने से ब्रेस्ट कैंसर समेत कई तरह के कैंसर का रिस्क बढ़ता है.
  • ​रोजाना एक्सरसाइज- फिजिकल एक्टिविटी शरीर के हार्मोन्स को बैलेंस रखने में मदद करती है.
  • ​फैमिली हिस्ट्री- अगर आपके परिवार में किसी को कैंसर रहा है, तो डॉक्टर से बात करके अपनी जेनेटिक काउंसिलिंग कराने पर विचार करें.
  • ​रेगुलर हेल्थ चेकअप- साल में कम से कम एक बार अपना फुल बॉडी चेकअप जरूर कराएं ताकि कोई भी बीमारी शुरुआती स्टेज में ही पकड़ में आ जाए.

​महिलाएं खुद रखें अपना ख्याल- 

  1. अगर आपको अपने शरीर में कोई भी बदलाव या गांठ दिखे, और डॉक्टर कहे कि सब नॉर्मल है, लेकिन आपको फिर भी दर्द या असहजता महसूस हो, तो
  2. ​तुरंत किसी दूसरे डॉक्टर से सेकंड ओपिनियन (Second Opinion) लें.
  3. ​सिर्फ मशीनी रिपोर्ट पर भरोसा न करें, अपने शरीर के संकेतों को समझें.
  4. ​हर महीने खुद से ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन (Self Examination) जरूर करें.

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