विज्ञापन

राजस्थान में पत्थर बन रहा 9 साल का बच्चा: डॉक्टर बोले-प्रदेश में यह दुर्लभ बीमारी का पहला केस; कोई इलाज नहीं

Fibrodysplasia Ossificans Progressiva First Case In India: जैसलमेर में एक 9 साल के बच्चे में चिकित्सा जगत में बेहद दुर्लभ मानी जाने वाली बीमारी एफओपी (Fibrodysplasia Ossificans Progressiva) का पहला केस सामने आया है. इस बीमारी में मांसपेशियां, टेंडन्स और लिगामेंट्स धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगते हैं, जिससे शरीर की गतिशीलता सीमित हो जाती है.

राजस्थान में पत्थर बन रहा 9 साल का बच्चा: डॉक्टर बोले-प्रदेश में यह दुर्लभ बीमारी का पहला केस; कोई इलाज नहीं
Fibrodysplasia Ossificans Progressiva First Case In India
AI

Fibrodysplasia Ossificans Progressiva First Case In India: जैसलमेर में एक 9 साल के बच्चे में चिकित्सा जगत में बेहद दुर्लभ मानी जाने वाली बीमारी एफओपी (Fibrodysplasia Ossificans Progressiva) का पहला केस सामने आया है. इस बीमारी में मांसपेशियां Muscles), टेंडन्स (Tendons) और लिगामेंट्स (Ligaments) धीरे-धीरे हड्डियों (Bones) में बदलने लगते हैं, जिससे शरीर की गतिशीलता सीमित हो जाती है. एफओपी एक जीन संबंधी विकार है और विश्व स्तर पर इसके मरीजों की संख्या बहुत कम है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है. इसका उपचार केवल लक्षणों को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने पर केंद्रित होता है. आकाश हेल्थकेयर के डॉ. राकेश पंडित बता रहे हैं इस बीमारी से जुड़ी जरूरी बातें.

क्या है एफओपी?  

एफओपी में शरीर की मांसपेशियां और लिगामेंट्स असामान्य रूप से हड्डी में परिवर्तित हो जाती हैं. इसका अर्थ है कि चोट या सूजन वाली जगह पर नई हड्डी बन सकती है. समय के साथ, यह प्रक्रिया शरीर की सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर देती है. मरीजों की हड्डियां कठोर हो जाती हैं और शरीर की गति सीमित हो जाती है.

डॉक्टर राकेश पंडित कहते हैं, “एफओपी बेहद दुर्लभ बीमारी है. इस बीमारी में शरीर के ऊतक धीरे-धीरे हड्डी में बदल जाते हैं. जैसलमेर में यह पहला मामला है. फिलहाल, इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है. हमारा लक्ष्य केवल दर्द और सूजन को नियंत्रित करना और बच्चे की गतिविधियों को सुरक्षित रखना है.”

यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट तनाव का असर, पाकिस्तान में जरूरी दवाओं की कमी का खतरा; सिर्फ 45 दिन का स्टॉक बचा

एफओपी के शुरुआती लक्षण और पहचान

बच्चे में शुरू में सामान्य मांसपेशी दर्द और सूजन देखी गई. माता-पिता ने इसे मामूली चोट या थकान समझा. जैसे-जैसे समय बीता, सूजन हड्डी में बदल गई और बच्चे की गतिशीलता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगी. डॉक्टर राकेश पंडित ने बताया, “एफओपी में चोट लगना या मांसपेशियों पर दबाव पड़ना नई हड्डी के निर्माण को तेज कर सकता है. इसलिए किसी भी तरह की चोट या सर्जरी मरीज के लिए हानिकारक हो सकती है. परिवारों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए.”

बीमारी के कारण और जोखिम

एफओपी जीन में उत्पन्न होने वाली समस्या के कारण होती है. यह सामान्यत: जन्मजात होती है और मरीज के जीवनभर प्रभावित रहती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति हर 2 लाख लोगों में केवल एक पाया जाता है. डॉ. राकेश पंडित कहते हैं, “एफओपी मरीजों की हड्डियां असामान्य रूप से विकसित होती हैं. इससे उनकी चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों की क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है. हालांकि मानसिक विकास सामान्य रहता है, इसलिए उनके सीखने और सामाजिक विकास में कोई बाधा नहीं आती.”

देखभाल और जीवन की गुणवत्ता

चिकित्सक कहते हैं कि एफओपी का इलाज नहीं है, लेकिन दर्द और सूजन को नियंत्रित करना, फिजिकल थेरेपी और सावधानीपूर्वक गतिविधियां मरीज की जीवनशैली को सुरक्षित बनाए रख सकती हैं. डॉ. राकेश पंडित ने बताया, “हमारे प्रयास मरीज और परिवार को जागरूक करना भी है. उन्हें समझाना जरूरी है कि यह बीमारी किसी की गलती या कमजोरी के कारण नहीं होती. सावधानी, समय पर चिकित्सकीय सलाह और चोट से बचाव ही जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है.”

समाज और जागरूकता

जैसलमेर में इस दुर्लभ केस ने चिकित्सा जगत और आम जनता में एफओपी के प्रति जागरूकता बढ़ाई है. विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती पहचान और सतर्कता से बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. डॉ. राकेश पंडित कहते हैं, “समाज को यह समझना होगा कि एफओपी जैसी दुर्लभ बीमारी से प्रभावित लोग भी समान अधिकार और अवसरों के हकदार हैं. परिवार और चिकित्सक मिलकर उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं.” अंततः, एफओपी जैसी दुर्लभ बीमारी में समय पर पहचान, सावधानी और सही देखभाल ही बच्चे के जीवन को सुरक्षित और सक्रिय बनाए रख सकती है. हालांकि स्थायी इलाज नहीं है, जागरूकता और संवेदनशीलता से इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को संभाला जा सकता है.

Watch Video: ये 5 बुरी आदतें बनाती हैं हड्डियों को कमजोर, आज से ही करना छोड़ दें ये काम

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com