Pakistan Faces Medical Crisis: पाकिस्तान में जरूरी दवाओं की कमी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में दवा बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल और कई महत्वपूर्ण दवाओं का स्टॉक (Stock) तेजी से घट रहा है. बताया जा रहा है कि मौजूदा भंडार सिर्फ करीब 45 दिनों तक ही चल सकता है. अगर जल्द ही आयात (Import) की स्थिति ठीक नहीं हुई, तो मरीजों और अस्पतालों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. खासकर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं जो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए रोज दवाइयों पर निर्भर हैं.
मिडिल ईस्ट के तनाव से सप्लाई प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व में चल रहे तनाव का असर पाकिस्तान की दवा सप्लाई पर पड़ रहा है. ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है. इस वजह से दवा बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल और मेडिकल सामान पाकिस्तान तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है. दवा कंपनियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो दवाओं का उत्पादन कम हो सकता है.
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इन मरीजों पर ज्यादा असर पड़ सकता है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दवाइयों की कमी का सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ सकता है जिन्हें लंबे समय तक इलाज की जरूरत होती है. कैंसर, डायबिटीज और दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को नियमित दवाएं लेनी पड़ती हैं. अगर दवाइयों की सप्लाई कम हुई या उनकी कीमत बढ़ी, तो मरीजों को परेशानी हो सकती है. पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लोग सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं, इसलिए वहां दवाओं की कमी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकती है.
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शिशुओं के दूध की सप्लाई पर भी असर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाला बेबी फॉर्मूला भी प्रभावित हो सकता है. पाकिस्तान में इसका बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है. अगर आयात में देरी होती रही, तो बाजार में इसकी कमी देखने को मिल सकती है. इससे छोटे बच्चों के पोषण पर असर पड़ सकता है.
स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से दवाओं के कच्चे माल के लिए विदेशों पर निर्भर है. कोविड-19 के समय भी इस बात पर चिंता जताई गई थी कि देश में दवा बनाने के लिए जरूरी सामग्री का स्थानीय उत्पादन काफी कम है. ऐसे में विशेषज्ञ सरकार से स्थानीय स्तर पर दवा उत्पादन बढ़ाने, उद्योग को प्रोत्साहन देने और जरूरी दवाओं का अतिरिक्त भंडार तैयार करने की मांग कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे भविष्य में ऐसी स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है.
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