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This Article is From Jan 01, 2026

कई लोगों के लिए संजीवनी से कम नहीं है यह पौधा, जानें इसके औषधीय गुण

Dronpushpi Plant Uses: द्रोणपुष्पी आपके घर की छत या बगीचे में उगने वाला एक छोटा-सा पौधा है जो दिखने में भले ही आम लगे, लेकिन इसमें सेहत का खजाना छिपा हुआ है.

कई लोगों के लिए संजीवनी से कम नहीं है यह पौधा, जानें इसके औषधीय गुण
द्रोणपुष्पी के पौधे का क्या उपयोग है?

Dronpushpi Plant Uses: द्रोणपुष्पी आपके घर की छत या बगीचे में उगने वाला एक छोटा-सा पौधा है जो दिखने में भले ही आम लगे, लेकिन इसमें सेहत का खजाना छिपा हुआ है. इसे कई जगहों पर दुद्धी, गोफन, दूरवा, शिवसहस्त्रपुष्पी या सफेद फूल वाली नेटलवीड भी कहा जाता है.

द्रोणपुष्पी की पहचान कैसे करें?

इसकी पहचान भी बहुत आसान है. इसकी पत्तियां लंबी और हल्की दांतेदार, तना पतला लेकिन मजबूत और सफेद छोटे-छोटे गुच्छों में फूल होते हैं. जब आप पत्तों को मसलेंगे तो हल्की औषधीय खुशबू महसूस होगी.

द्रोणपुष्पी के फायदे

इस पौधे का आयुर्वेद में बड़ा महत्व है. द्रोणपुष्पी को वात-कफ में लाभकारी माना गया है. यह हमारे पाचन, श्वसन और प्रतिरोधक क्षमता के लिए बहुत फायदेमंद है. सबसे पहले तो सर्दी-जुकाम और खांसी में यह सुपरहिट है. आप इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं या पत्तों और फूल का रस निकालकर शहद के साथ ले सकते हैं. वायरल बुखार, खासकर मच्छरजनित बुखार में भी गर्म पानी के साथ इसका सेवन राहत देता है.

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द्रोणपुष्पी का इस्तेमाल कैसे करें?

द्रोणपुष्पी सिर्फ अंदर से फायदा नहीं करती, बल्कि बाहरी चोट या त्वचा की समस्या में भी कमाल दिखाती है. घाव, फोड़े-फुंसी पर पत्तों का लेप लगाने से सूजन कम होती है और घाव जल्दी ठीक होता है. मच्छर या कीड़े के काटने पर मसलकर सीधे लगाने से जलन और खुजली में राहत मिलती है. पेट की गैस या हल्की अपच में सूखी पत्तियों का पाउडर काम आता है. यहां तक कि कान दर्द में हल्की गर्म पत्ती का रस 1–2 बूंद डालना पारंपरिक घरेलू तरीका माना जाता है.

द्रोणपुष्पी को घर में कैसे उगाएं?

इसे घर में उगाना भी बेहद आसान है हल्की मिट्टी और थोड़ी धूप में यह जल्दी बढ़ता है. बीज अपने आप गिरकर पौधे उगाते हैं. पानी की जरूरत भी ज्यादा नहीं होती. सप्ताह में 2-3 बार पर्याप्त है. इसका रोजमर्रा में उपयोग सुरक्षित है, लेकिन गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं इसे बिना वैद्य की सलाह के न लें.

वैज्ञानिक रूप से भी यह पौधा प्रभावशाली है. इसमें एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और दर्द निवारक गुण पाए गए हैं. यह एलर्जी और सूजन में यह राहत देता है और प्राकृतिक रूप से मच्छरों को दूर रखता है. इसलिए इसे आयुर्वेद में सुपर हर्ब कहा गया है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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