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डॉक्टर से मिलने के बाद 80% मरीज गूगल पर खोज रहे हैं बीमारी की जानकारी, स्टडी में सामने आई वजह

दिल्ली-एनसीआर में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 80 प्रतिशत मरीज डॉक्टर से मिलने के बाद अपनी बीमारी और इलाज से जुड़ी जानकारी गूगल पर खोजते हैं.

डॉक्टर से मिलने के बाद 80% मरीज गूगल पर खोज रहे हैं बीमारी की जानकारी, स्टडी में सामने आई वजह
Doctor ke bad kyu kholte hain google
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सिर दर्द हो, पेट में परेशानी हो या फिर किसी टेस्ट की रिपोर्ट हाथ में आई हो, आजकल ज्यादातर लोग डॉक्टर के क्लिनिक से निकलते ही मोबाइल उठा लेते हैं और अपनी समस्या के बारे में इंटरनेट पर पढ़ना शुरू कर देते हैं. डिजिटल दौर में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पाना पहले से कहीं आसान हो गया है. हालांकि यह आदत कई बार लोगों को जागरूक बनाने के बजाय उलझन में भी डाल सकती है. हाल ही में दिल्ली-एनसीआर में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि बड़ी संख्या में मरीज डॉक्टर से मिलने के बाद भी अपने लक्षणों और बीमारी के बारे में गूगल पर जानकारी खोजते हैं. यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे लेकर चिंता भी जता रहे हैं.

IPNCI 2026 स्टडी में दिल्ली-एनसीआर के 1,000 लोगों से बात की गई. इस सर्वे में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद के मरीज शामिल थे. स्टडी में पता चला कि मरीजों को इलाज की प्रक्रिया समझने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 73.8% मरीजों को लगा कि डॉक्टर से मिलने के दौरान उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिला और बातचीत बहुत जल्दी खत्म हो गई. वहीं 78.5% मरीज डॉक्टर के पास से लौटने के बाद अपनी बीमारी, इलाज या आगे क्या करना है, यह समझने के लिए गूगल या सोशल मीडिया पर जानकारी खोजने लगे.

क्या कहती है स्टडी?

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के करीब 80 प्रतिशत मरीज डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद भी इंटरनेट पर अपनी बीमारी, लक्षणों और इलाज से जुड़ी जानकारी सर्च करते हैं. कई लोग डॉक्टर द्वारा बताई गई बातों को समझने या दोबारा जांचने के लिए ऐसा करते हैं, जबकि कुछ लोग दूसरी राय पाने की कोशिश में ऑनलाइन जानकारी तलाशते हैं.

क्यों बढ़ रही है यह आदत?

विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर स्वास्थ्य संबंधी कंटेंट की आसान उपलब्धता इसकी सबसे बड़ी वजह है. लोग कुछ ही सेकंड में हजारों लेख, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट तक पहुंच जाते हैं. कई मरीज अपनी बीमारी को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं, इसलिए वे एक्स्ट्रा जानकारी खोजते हैं. इसके अलावा, कई बार मेडिकल शब्दावली जटिल होने के कारण मरीज डॉक्टर की बात पूरी तरह नहीं समझ पाते. ऐसे में वे घर पहुंचकर इंटरनेट का सहारा लेते हैं.

इसके क्या नुकसान हो सकते हैं?

ऑनलाइन जानकारी हमेशा सही या भरोसेमंद नहीं होती. कई वेबसाइट और सोशल मीडिया पोस्ट अधूरी या गलत जानकारी दे सकती हैं. इससे मरीजों में अनावश्यक डर पैदा हो सकता है. मामूली लक्षणों को लोग गंभीर बीमारी से जोड़ लेते हैं, जिसे विशेषज्ञ "साइबरकॉन्ड्रिया" कहते हैं.
कुछ मामलों में लोग इंटरनेट पर पढ़ी बातों के आधार पर खुद ही दवा लेना शुरू कर देते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट को केवल जानकारी के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए, इलाज के विकल्प के रूप में नहीं. यदि किसी बीमारी, रिपोर्ट या दवा को लेकर कोई सवाल हो तो डॉक्टर से दोबारा सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है.

ऑनलाइन जानकारी आपकी समझ बढ़ा सकती है, लेकिन सही निदान और उपचार के लिए विशेषज्ञ की सलाह ही सबसे ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती है.

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