दिवाली आने से पहले ही लोगों को पटाखे और प्रदूषण दोनों की चिंता एक साथ होने लगती है. लोग सोचते हैं कि दिवाली है पटाखे नहीं लाएंगे, तो फीकी से लगेगी. वहीं, अगर जलाएं, वातावरण दूषित हो जाएगा. कई राज्यों में सरकार पटाखे जलाने को लेकर सख्त कदम भी उठाते हैं, ताकि बढ़ते प्रदूष के स्तर को कंट्रोल किया जा सके. इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर 2026 को ग्रीन पटाखे जलाने मंजूरी दी है. इसके लिए सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक का समय तय किया गया है. इस फैसले के बाद एक बार फिर ग्रीन पटाखों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ग्रीन पटाखे क्या होते हैं, क्या इनसे बिल्कुल धुआं नहीं निकलता और क्या ये सचमुच वातावरण के लिए एक अच्छा विकल्प है?
ग्रीन पटाखे क्या हैं?
ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे होते हैं, जिन्हें इस तरह विकसित किया है कि उनसे निकलने वाला धुआं और हानिकारक तत्व सामान्य पटाखों के मुकाबले कम हों. इनमें कई ऐसे केमिकल्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जो वायु प्रदूषण को तेजी से बढ़ाते हैं. इसी वजह से इन्हें पारंपरिक पटाखों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल माना जाता है.
क्या सच में कम फैलाते हैं प्रदूषण?
ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में करीब 30 से 50 प्रतिशत तक कम वायु प्रदूषण पैदा कर सकते हैं. इनके फटने पर हवा में कम मात्रा में प्रदूषक कण और धुआं फैलता है. हालांकि, ये समझना जरूरी है कि ग्रीन पटाखे पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं होते. इनसे भी धुआं निकलता है और वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है, लेकिन अन्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है.
सामान्य पटाखों में बेरियम जैसे कुछ खतरनाक केमिकल्स पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ग्रीन पटाखों में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल नहीं किया जाता या काफी कम मात्रा में किया जाता है. इसके अलावा एल्युमिनियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन जैसे पदार्थों का भी कम मात्रा में इस्तेमाल होता है.
केमिकल्स के अलावा ग्रीन पटाखों की एक और अच्छी बात ये होती है कि इसमें अन्य पटाखों की तुलना में आवाज काफी कम होती है. ऐसे में ये बुजुर्गों, छोटे बच्चों, बीमार लोगों और पालतू जानवरों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है.
कुछ ग्रीन पटाखों में ऐसी टेक्नीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फटते समय जल वाष्प निकलती है. माना जाता है कि इससे आसपास मौजूद धूल के कण नीचे बैठाने में मदद मिलती है और वायु में धूल का स्तर कुछ कम हो सकता है. इससे सांस से जुड़ी दिक्कतें कम हो सकती हैं. वहीं, वायु प्रदूषण को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
कुछ हद तक सुरक्षित है ग्रीन पटाखे, लेकिन नहीं है पूरी तरह सेफ
ग्रीन पटाखों को पर्यावरण के लिए सामान्य पटाखों की तुलना में एक अच्छा विकल्प हो सकता है. लेकिन इसे पूरी तरह से सुरक्षित मान लेना सही नहीं है. क्योंकि इसमें भी कुछ हद तक ऐसे केमिकल्स होते हैं, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
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