Chronic Pancreatitis in Children: दिल्ली-एनसीआर में 10 साल की एक बच्ची में क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस (CP) का हालिया पता चलने से भारतीय मेडिकल जगत में हड़कंप मच गया है. पहले इस बीमारी को लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी माना जाता था, यह बीमारी आमतौर पर बड़े लोगों में देखी जाती थी, खासकर उन लोगों में जो लंबे समय तक शराब या धूम्रपान करते थे. लेकिन, अब यह बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक है. लेकिन, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट का यह मामला भारत के बदलते बीमारियों के पैटर्न में एक चिंताजनक मोड़ साबित हुआ है. जब डॉ. अमित जावेद की टीम ने इलाज शुरू किया, तब तक नुकसान बहुत ज्यादा हो चुका था.
बच्ची के पैंक्रियाज में ऐसा घाव बन चुका था जिसे ठीक नहीं किया जा सकता था, जिसकी वजह से उसे कम उम्र में ही फ्राइब्रो-कैलकुलस पैंक्रियाटिक डायबिटीज (FCPD) हो गई. इससे भी बुरी बात यह है कि डॉक्टरों का कहना है कि अब यह कोई अकेला मामला नहीं रहा.
चुपचाप बढ़ती है पैंक्रियाटाइटिस की बीमारी
बच्चों में क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के मामलों में अचानक बढ़ोतरी एक बड़े और ज्यादा चिंताजनक ट्रेंड का हिस्सा है. इंडियन पैंक्रियास क्लब के आंकड़ों के मुताबिक, 'ट्रॉपिकल कैल्सिफ़िक पैंक्रियाटाइटिस' के मामले बढ़ रहे हैं, यह इस बीमारी का एक अनोखा रूप है जो ज्यादातर विकासशील देशों में पाया जाता है. बड़ों में होने वाले क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस के उलट, भारत में बच्चों में होने वाला पैंक्रियाटाइटिस अक्सर ज्यादा गंभीर होता है और यह चुपचाप बढ़ता रहता है, जब तक कि अंग के एंडोक्राइन और एक्सोक्राइन काम पूरी तरह से ठप नहीं हो जाते.

बच्चों में पैंक्रियाटाइटिस का बढ़ता खतरा
यह मेडिकल इमरजेंसी बीमारी का जल्दी पता लगाने में हुई एक बड़ी नाकामी को उजागर करती है, जब कोई बच्चा पेट दर्द की शिकायत करता है, तो आम तौर पर यह मान लिया जाता है कि उसे पेट में कीड़े हैं, बदहजमी है, या फिर स्कूल से जुड़ा तनाव है. जब तक बीमारी की असली वजह यानी पैंक्रियास का पता चलता है, तब तक अक्सर बिना सर्जरी के इलाज का मौका हाथ से निकल चुका होता है और मरीज को पूरी जिंदगी इंसुलिन पर निर्भर रहना पड़ता है और पाचन एंजाइमों की कमी पूरी करने के लिए दवाएं लेनी पड़ती हैं.
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फ्राइब्रो-कैलकुलस पैंक्रियाटिक डायबिटीज क्या है?
फ्राइब्रो-कैलकुलस पैंक्रियाटिक डायबिटीज (FCPD) एक दुर्लभ प्रकार का पैंक्रियाटिक डायबिटीज है. इसमें पैंक्रियास में कैल्शियम के जमाव और फाइब्रोसिस होता है, जिससे पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने की क्षमता प्रभावित होती है और डायबिटीज हो जाता है.
इसके लक्षण क्या हैं?
- बहुत ज्यादा प्यास और मूत्र का बढ़ना
- वजन कम होना
- थकान और कमजोरी
- पेट में दर्द और पाचन समस्याएं
- मल में वसा की उपस्थिति (स्टेओटोरिया)
- डायबिटीज के लक्षण जैसे कि हाई ब्लड शुगर
किस वजह से होती है ये बीमारी?
- पैंक्रियास में कैल्शियम के जमाव
- फाइब्रोसिस और पैंक्रियास की सूजन
- आनुवंशिक कारक
- खानपान
क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
1. जेनेटिक कारण
भारत में कई बच्चों में SPINK1 और PRSS1 जैसे जीन में बदलाव पाए जाते हैं. ये जीन पाचन एंजाइम को कंट्रोल करते हैं. खराब होने पर एंजाइम पैंक्रियाज को ही नुकसान पहुंचाने लगते हैं. इससे सूजन, पथरी और स्थायी क्षति होती है. इसे जेनेटिक टाइम बम कहा जा सकता है.
2. गट और पैंक्रियाज का संबंध
खराब पानी, गलत खानपान और एंटीबायोटिक का ज्यादा इस्तेमाल आंत के बैलेंस को बिगाड़ देता है. इससे हानिकारक बैक्टीरिया पैंक्रियाज तक पहुंच सकते हैं. सूजन बढ़ती है और बीमारी जल्दी गंभीर हो जाती है.

बच्चों को कैसे सुरक्षित रखें? | How to Keep Children Safe?
स्टेप 1: जेनेटिक टेस्टिंग को अपनाएं
जिन परिवारों में डायबिटीज या पेट की समस्या का इतिहास है, वे जांच कराएं. बच्चे को बार-बार पैंक्रियाटाइटिस हो तो टेस्ट जरूरी है. जल्दी पता चलने पर सही डाइट और इलाज से बीमारी को रोका जा सकता है.
स्टेप 2: लक्षणों को नजरअंदाज न करें
बार-बार पेट दर्द: इस लक्षण को बिल्कुल नजरअंदाज न करें. खासकर ऑयली खाना खाने के बाद या दर्द का पीठ तक जाना.
वजन न बढ़ना: अगर बच्चा खा रहा है लेकिन शरीर नहीं बन रहा, तो ये भी एक चेतावनी संकेत है कि शरीर में कुछ तो गड़बड़ है.
ऑयली और बदबूदार मल: यह पाचन की समस्या का संकेत है. अगर आपको हर बार ऐसा महसूस होता है तो अलर्ट हो जाएं.
डायबिटीज के शुरुआती संकेत:
- ज्यादा प्यास लगना
- बार-बार पेशाब आना
इलाज से ज्यादा जरूरी है समय पर पहचान:
दिल्ली की बच्ची का ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन यह उस स्थिति को दिखाता है जहां बीमारी बहुत आगे बढ़ चुकी थी. अब जरूरत है कि हम पहले से सावधान रहें.
क्या करना जरूरी है?
- बच्चों के लिए अलग मेडिकल गाइडलाइन बनें
- जंक और प्रोसेस्ड फूड कम करें
- डॉक्टरों को जल्दी रेफर करने की आदत विकसित करें
- पेट दर्द को हल्के में न लें
बच्चों का सामान्य दिखने वाला पेट दर्द भी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. भारत में जेनेटिक और पर्यावरणीय कारण मिलकर इस खतरे को बढ़ा रहे हैं. सही समय पर जांच, जागरूकता और बैलेंस खानपान से हम अपने बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचा सकते हैं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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