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क्यों माना जाता है चिरायता को बीमारियों का काल, यहां जानें

Chirata Benefits In Hindi: भारत को जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का खजाना कहा जाता है और ऐसे ही एक पौधे का नाम है चिरायता. चिरायता एक बारहमासी औषधीय पौधा है, जो मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों और ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में उगता है.

क्यों माना जाता है चिरायता को बीमारियों का काल, यहां जानें
चिरायता पीने का तरीका और फायदे

Chirata Benefits In Hindi: भारत को जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का खजाना कहा जाता है और ऐसे ही एक पौधे का नाम है चिरायता. चिरायता एक बारहमासी औषधीय पौधा है, जो मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों और ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में उगता है.

चिरायता की खासियत क्या है?

चिरायता बहुत कड़वी होती है, लेकिन इसकी कड़वाहट ही इसकी ताकत है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को बढ़ाती है.

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चिरायता कौन-कौन सी बीमारी में काम आता है?

  • चिरायता का इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से किया जाता रहा है. बुखार, खांसी और जुकाम जैसी छोटी-छोटी बीमारियों में यह काफी लाभकारी मानी जाती है. 
  • इसकी जड़ और पत्तियों में एंटी-वायरल गुण पाए जाते हैं, जो वायरल संक्रमण से होने वाले लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं. 
  • इसके अलावा, यह एनीमिया में भी सहायक है क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन और खनिज तत्व खून बनाने में मदद करते हैं. लिवर के लिए भी चिरायता बेहद फायदेमंद है. 
  • इसमें पाया जाने वाला यौगिक 'स्वेरचिरिन' लिवर को नुकसान से बचाता है और हेपेटाइटिस जैसी लिवर संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी है.
  • पाचन तंत्र के लिए यह औषधि वरदान के समान है, इसकी कड़वाहट पाचन रसों को सक्रिय करती है और अपच, गैस या कब्ज जैसी दिक्कतों में राहत देती है.
  • आयुर्वेद में इसे खून साफ करने वाली औषधियों में भी शामिल किया गया है. यह भूख बढ़ाने, पेट के कीड़ों को नष्ट करने और जोड़ों के दर्द को कम करने में भी मदद करता है. 
  • त्वचा के लिए भी यह बहुत उपयोगी है, क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं और त्वचा रोगों में फायदा पहुंचाते हैं.

चिरायता कब और कैसे पीना चाहिए?

चिरायता को इस्तेमाल करने के कई तरीके हैं. इसका काढ़ा, पाउडर और चिरायता पानी सभी अलग-अलग समस्याओं में काम आते हैं. काढ़ा बुखार, इम्यूनिटी और लिवर के लिए अच्छा है, पाउडर पाचन और खून साफ करने में सहायक है और चिरायता का पानी हल्के बुखार और डिटॉक्स के लिए उपयोग किया जाता है.

चिरायता का सेवन करते समय सावधानी क्यों बरतनी चाहिए?

हालांकि चिरायता बहुत कड़वी और शक्तिशाली है, इसलिए इसे अधिक मात्रा में इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है. लंबे समय तक नियमित इस्तेमाल से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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