Chickenpox Outbreak Pune: पुणे में पिछले एक महीने के दौरान चिकनपॉक्स के मामलों में साफ बढ़ोतरी देखी जा रही है. खास बात यह है कि इस बार संक्रमण सिर्फ छोटे बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े बच्चों, टीनएजर और एडल्ट्स में भी तेजी से फैल रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार मामलों की संख्या ज्यादा है, हालांकि ज्यादातर मरीजों में बीमारी हल्के रूप में ही देखी जा रही है. हालांकि हर कुछ सालों में चिकनपॉक्स के मामलों में उछाल आना एक सामान्य पैटर्न है. जब एक बड़े समूह में संक्रमण फैल जाता है, तो उनमें आजीवन इम्यूनिटी बन जाती है और कुछ समय तक बीमारी का प्रसार कम हो जाता है. लेकिन, समय के साथ नए बच्चे जिनमें इम्यूनिटी नहीं होती, समूह में जुड़ते हैं और फिर संक्रमण दोबारा बढ़ने लगता है. इस साल पुणे में यही स्थिति बनती दिख रही है.
चिकनपॉक्स किसे होता है? | Who Gets Chickenpox?
चिकनपॉक्स आमतौर पर 5 से 10 साल के बच्चों में ज्यादा देखा जाता है, लेकिन जो लोग बचपन में इससे संक्रमित नहीं हुए या जिनका टीकाकरण पूरा नहीं हुआ, उनमें बड़े होने पर भी यह बीमारी हो सकती है. जिन बच्चों या बड़ों को पहले चिकनपॉक्स नहीं हुआ, जिनका टीकाकरण अधूरा है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है. ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है.
चिकनपॉक्स क्यों होता है? | Why does chickenpox occur?
चिकनपॉक्स वैरिसेला जोस्टर वायरस के कारण होता है. यह वायरस हवा, खांसी-छींक या संक्रमित व्यक्ति के फफोलों के संपर्क से फैलता है. स्कूलों, भीड़भाड़ वाली जगहों और परिवारों में इसका फैलाव तेजी से होता है.
एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर किसी को बड़ी उम्र में चिकनपॉक्स होता है, तो कॉम्प्लिकेशन्स का खतरा बढ़ जाता है. इसमें दिमाग से जुड़ी सूजन (एन्सेफलाइटिस), फेफड़ों की समस्या और दूसरे अंगों पर असर पड़ सकता है.

चिकनपॉक्स के लक्षण | Chickenpox symptoms
चिकनपॉक्स के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 10–21 दिन बाद दिखते हैं. इनमें शामिल हैं तेज बुखार, शरीर में कमजोरी और थकान, सिरदर्द, लाल दाने, जो बाद में पानी से भरे फफोलों में बदल जाते हैं, तेज खुजली, कुछ मामलों में उल्टी या दौरे. ज्यादातर मामलों में बीमारी 7-10 दिन में ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ बच्चों और बड़ों में यह गंभीर रूप ले सकती है.
वैक्सीनेशन क्यों है जरूरी?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, चिकनपॉक्स से बचाव के लिए दो डोज का टीका बेहद जरूरी है. टीका 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देता, लेकिन टीकाकरण कराने वाले बच्चों में बीमारी हल्की रहती है और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम पड़ती है.
सतर्कता जरूरी:
चिकनपॉक्स का वायरस बाद में एडल्ट्स में दोबारा सक्रिय हो सकता है, खासकर 50 साल से ज्यादा उम्र या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में. इसलिए समय पर टीकाकरण और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है.
पुणे में बढ़ते चिकनपॉक्स के मामले एक चेतावनी हैं कि इसे हल्के में न लें. सही समय पर पहचान, टीकाकरण और सावधानी से न सिर्फ बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है, बल्कि गंभीर कॉम्प्लीकेशन्स से भी बचा जा सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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