विज्ञापन

स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने बनाई यूनिवर्सल नेजल स्प्रे वैक्सीन, हर तरह के वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से करेगी बचाव

Nasal Spray Vaccine: यह स्टडी जर्नल साइंस में प्रकाशित हुई है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एक नाक के जरिए दिया जाने वाला स्प्रे है, जो कई प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया और यहां तक कि एलर्जन से भी सुरक्षा दे सकता है.

स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने बनाई यूनिवर्सल नेजल स्प्रे वैक्सीन, हर तरह के वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से करेगी बचाव
अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा ही एक नया वैक्सीन फॉर्मूला विकसित किया है.

Universal Vaccine For Infection: हर साल सर्दी-जुकाम, फ्लू, बैक्टीरियल निमोनिया और एलर्जी जैसी सांस संबंधी बीमारियां करोड़ों लोगों को परेशान करती हैं. भारत जैसे देश में जहां प्रदूषण, धूल और मौसम में बदलाव आम बात है, वहां यह समस्या और गंभीर हो जाती है. सोचिए अगर एक ही वैक्सीन स्प्रे इन सभी खतरों से एक साथ बचाव दे सके तो कैसा होगा? अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा ही एक नया वैक्सीन फॉर्मूला विकसित किया है. यह स्टडी जर्नल साइंस में प्रकाशित हुई है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एक नाक के जरिए दिया जाने वाला स्प्रे है, जो कई प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया और यहां तक कि एलर्जन से भी सुरक्षा दे सकता है.

इस शोध के वरिष्ठ लेखक प्रो. बाली पुलेंद्रन (PhD), जो माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर हैं, ने बताया कि यह वैक्सीन फ्लू, कोविड, सामान्य सर्दी, बैक्टीरियल संक्रमण और एलर्जी सभी के खिलाफ व्यापक सुरक्षा दे सकती है.

क्या है इस वैक्सीन में खास?

पारंपरिक वैक्सीन किसी एक खास बीमारी के खिलाफ शरीर को प्रशिक्षित करती हैं जैसे खसरा या चिकनपॉक्स. लेकिन, यह नई वैक्सीन अलग सिद्धांत पर काम करती है. यह सीधे इम्यून सिस्टम को ट्रेन नहीं करती, बल्कि फेफड़ों में मौजूद व्हाइट ब्लड सेल्स (White Blood Cells) को एक्टिव कर देती है. इसे वैज्ञानिकों ने एम्बर अलर्ट की स्थिति कहा है, यानी शरीर किसी भी हमले के लिए पहले से तैयार रहता है. यह वैक्सीन नाक के स्प्रे के रूप में दी जाती है, जिससे यह सीधे सेस्पिरेटरी सिस्टम तक पहुंचती है और फेफड़ों की रक्षा प्रणाली को मजबूत करती है.

Latest and Breaking News on NDTV

स्टडी में क्या पाया गया?

जानवरों (चूहों) पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि यह वैक्सीन SARS-CoV-2 और अन्य कोरोनावायरस से सुरक्षा देती है. बैक्टीरिया जैसे स्टाफीलोकोकस ऑरीअस औरएसिनेटोबैक्टर बाउमानी से बचाव करती है. हाउस डस्ट माइट एलर्जी की प्रतिक्रिया को भी कम करती है. यह सुरक्षा लगभग तीन महीने तक प्रभावी रही. यानी संक्रमण फेफड़ों में प्रवेश ही नहीं कर पाया और अगर कुछ वायरस अंदर गए भी, तो शरीर तुरंत उनसे लड़ने को तैयार था. हालांकि अभी यह टेस्ट जानवरों तक सीमित है और इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल बाकी हैं.

चुनौतियां भी हैं:

वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानों में यह प्रभाव कितना समय टिकेगा, यह अभी साफ नहीं है. हो सकता है कि इसे गहराई तक पहुंचाने के लिए नेबुलाइजर की जरूरत पड़े. इसके अलावा, इम्यून सिस्टम को ज्यादा सक्रिय करना कुछ जोखिम भी पैदा कर सकता है, इसलिए इसे मौजूदा वैक्सीन के विकल्प की बजाय पूरक के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है.

भारत के लिए क्या मायने?

भारत में बड़ी संख्या में लोग सांस संबंधी बीमारियों से जूझते हैं. प्रदूषण, धूल और धुआं, मानसून की नमी, सर्दियों का स्मॉग. ये सभी सर्दी, फ्लू, अस्थमा और एलर्जी को बढ़ाते हैं. अगर यह यूनिवर्सल वैक्सीन सफल होती है, तो यह महामारी के शुरुआती दौर में गंभीरता और मृत्यु दर कम कर सकती है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com