मध्य प्रदेश के रतलाम से एक प्रेरणादायक और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां महज 860 ग्राम वजन के साथ जन्मी एक समयपूर्व (प्रीमैच्योर) बच्ची ने जिंदगी की कठिन जंग जीत ली. गर्भावस्था के केवल 25वें सप्ताह में जन्मी इस बच्ची को गंभीर हालत में जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में भर्ती कराया गया था. जन्म के समय उसका वजन सामान्य नवजातों की तुलना में बहुत कम था और उसे सांस लेने में भी गंभीर परेशानी हो रही थी. करीब दो महीने तक चले गहन उपचार, चिकित्सकीय निगरानी और मां की विशेष देखभाल के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होकर 1.4 किलोग्राम वजन के साथ अस्पताल से डिस्चार्ज कर दी गई.
25वें सप्ताह में हुआ था जन्म
रतलाम जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह के अनुसार बच्ची का जन्म 30 मई को घर पर हुआ था. उस समय गर्भावस्था का केवल 25वां सप्ताह चल रहा था. जन्म के लगभग आठ घंटे बाद गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में भर्ती कराया गया. चिकित्सकों के मुताबिक सामान्य रूप से पूर्ण अवधि की गर्भावस्था के बाद जन्म लेने वाले बच्चों का वजन 2.5 से 3.5 किलोग्राम के बीच होता है, जबकि इस बच्ची का वजन मात्र 860 ग्राम था.

Ratlam News: रतलाम की 860 ग्राम की नवजात बच्ची हुई स्वस्थ
फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होने से बढ़ी मुश्किलें
समय से पहले जन्म होने के कारण बच्ची के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे. इससे उसे सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो रही थी. डॉक्टरों ने शुरुआती 15 दिनों तक बच्ची को कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सपोर्ट पर रखा. बाद में उसे ऑक्सीजन थेरेपी भी दी गई. इलाज के शुरुआती दिनों में बच्ची का वजन 860 ग्राम से घटकर 690 ग्राम तक पहुंच गया, जिससे चिकित्सकों की चिंता और बढ़ गई थी. इसी दौरान एनीमिया की समस्या होने पर उसे रक्त चढ़ाने की भी जरूरत पड़ी.
धीरे-धीरे सुधरी हालत
चिकित्सकीय देखरेख और लगातार निगरानी के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार आने लगा. लगभग 15 दिन बाद उसे फीडिंग ट्यूब के जरिए मां का दूध देना शुरू किया गया. डॉक्टरों ने बेहद सावधानी के साथ दूध की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाया. इससे बच्ची की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी होने लगीं और उसका वजन बढ़ना शुरू हुआ.
मां को दी गई विशेष ट्रेनिंग
बच्ची के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उसकी मां को "कंगारू मदर केयर" तकनीक की विशेष ट्रेनिंग भी दी गई. इस पद्धति में मां और बच्चे के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क बनाए रखा जाता है, जिससे समयपूर्व जन्मे बच्चों के शारीरिक विकास और तापमान नियंत्रण में मदद मिलती है. अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने भी लगातार निगरानी और देखभाल करते हुए बच्ची को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
1.4 किलो वजन के साथ मिली छुट्टी
करीब दो महीने तक चले इलाज के बाद बच्ची की सेहत में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया. सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह ने बताया कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद 28 जुलाई को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दी गई. डिस्चार्ज के समय उसका वजन बढ़कर लगभग 1.4 किलोग्राम हो गया था. अस्पताल प्रबंधन ने इसे मेडिकल टीम की मेहनत, आधुनिक नवजात चिकित्सा और मां की समर्पित देखभाल का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है.
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