जब घर में बच्चे की किलकारी गूंजती है, तो परिवार के लिए यह सबसे भावुक पल होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जन्म लेते ही नवजात बच्चा रोता क्यों है. विज्ञान इसे शरीर की सामान्य प्रक्रिया मानता है, वहीं धार्मिक मान्यताओं में इसके पीछे एक अलग आध्यात्मिक कहानी बताई गई है. गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, जन्म के समय आत्मा एक पुराने जीवन को पीछे छोड़कर नए जीवन में प्रवेश करती है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि इसी बदलाव को नवजात की पहली चीख से जोड़कर देखा जाता है.
गर्भ में आत्मा को रहता है सब कुछ याद
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि गरुड़ पुराण की मान्यता में आत्मा गर्भ में रहते हुए अपने पिछले कर्मों और अनुभवों को जाानती है. गर्भ की अवस्था को आत्मचिंतन और अगले जीवन की तैयारी से जोड़कर देखा गया है.
जन्म का पल क्यों माना गया कष्टकारी
धार्मिक व्याख्या के अनुसार, जन्म के समय आत्मा एक सुरक्षित अवस्था से निकलकर नए शरीर और वातावरण में आाती है. यह अचानक हुआ बदलाव उसके लिए पीड़ादायक माना जाता है. नवजात की पहली चीख को इसी आध्यात्मिक बेचैनी से जोड़ा जाता है.
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जन्म लेते ही क्यों भूल जाती है आत्मा पुरानी बातें
मदन मोहन ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि जन्म के बााद माया का प्रभाव आत्मा की पुरानी स्मृतियों पर पर्दा डाल देता है. इससे बच्चा अपने पिछले जीवन की बातें भूलकर नए जीवन और नए कर्मों से जुड़ पाता है.
पहली चीख का क्या है आध्यात्मिक
आचार्य मदन मोहन ने आगे बताया कि आध्यात्मिक नजरिए से बच्चे का पहलाा रोना पुराने अनुभवों के छूटने और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, चिकित्सकीय दृष्टि से नवजात का रोना जन्म के बाद सांस लेने और फेफड़ों के सक्रिय होने की सामान्य प्रक्रिया से जुड़ा है.
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