नई दिल्ली, 17 अगस्त: स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विशेषज्ञों ने कहा है कि AI को डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि उनकी मदद करने वाले एक उपकरण के रूप मे देखा जाना चाहिए. नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय चिकित्सा AI मिशन (NMAIM) की राष्ट्रीय परामर्श बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों, मेडिकल शिक्षकों और नीति निर्माताओं ने AI के जिम्मेदार, नैतिक और साक्ष्य-आधारित इस्तेमाल पर जोर दिया.
कार्यक्रम में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेठ ने कहा कि AI डॉक्टरों की क्लीनिकल क्षमताओं को मजबूत कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय और उसकी जिम्मेदारी डॉक्टर की ही होनी चाहिए.

AI डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, मरीज रहेगा केंद्र में: डॉ. अभिजात शेठ
उन्होंने कहा,
डॉ. अभिजात शेठ
मेडिकल शिक्षा में AI को शामिल करने पर जोर
डॉ. शेठ ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में मेडिकल शिक्षा में AI की समझ को शामिल करना जरूरी है. उनके अनुसार, मेडिकल छात्रों को AI आधारित क्लीनिकल रीजनिंग, मेडिकल इमेजिंग, रीसर्च मेथडोलॉजी, पब्लिक हेल्थ एनालिटिक्स और क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट जैसी तकनीकों से परिचित कराया जा सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल फैकल्टी की ट्रेनिंग उतनी ही महत्वपुर्ण है, क्योंकि शिक्षकों को AI के जिम्मेदार उपयोग का उदाहरण पेश करने में सक्षम होना चाहिए.
AI के साथ नैतिकता और सुरक्षा भी जरूरी
डॉ. शेठ ने चेतावनी दी कि AI के इस्तेमाल के साथ उसकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि एल्गोरिदम में पक्षपात (Bias), त्रुटियां और तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा.
उन्होंने भारतीय आबादी की विविध स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय डेटा, भारतीय वैलिडेशन और भारतीय साक्ष्यों पर आधारित AI मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई.
"AI डॉक्टरों को रिप्लेस नहीं करेगी"
इस कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने कहा कि AI को डॉक्टरों का प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी माना जाना चाहिए.
उन्होंने कहा,
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वास्थ्य सेवा में मानवीय संवेदनाएं हमेशा सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी.
"हर डेटा सेट के पीछे एक इंसान है, हर बीमारी के पीछे एक परिवार है और हर इलाज के फैसले के पीछे भरोसा जुड़ा होता है," उन्होंने कहा.

AI से कैसे बदल सकती है हेल्थकेयर?
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संगमित्रा पाटी ने कहा कि AI स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उन्होंने बताया कि यह तकनीक बड़ी मात्रा में स्वास्थ्य डेटा के विश्लेषण, जीनोमिक रिसर्च, दवा खोज (Drug Discovery) और व्यक्तिगत उपचार (Personalised Medicine) जैसे क्षेत्रों में मददगार साबित हो सकती है.
उनके अनुसार, AI का अंतिम लक्ष्य दो चीजें होना चाहिए, बेहतर डॉक्टर तैयार करना और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना.
दिल्ली घोषणा पत्र जारी
बैठक के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की तैयारी, डिजिटल क्षमता, संस्थागत ढांचे, नैतिक मानकों और जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा की गई. कार्यक्रम का समापन "दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन AI रेडीनेस इन हेल्थकेयर, मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च" के साथ हुआ.
विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि भारत में AI का भविष्य तभी सफल होगा जब तकनीकी नवाचार को क्लीनिकल अनुभव, वैज्ञानिक साक्ष्य, नैतिक सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता के साथ जोड़ा जाए, ताकि इसका वास्तविक लाभ मरीजों तक पहूंच सके.
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