आजकल हमारे आस-पास हर दूसरा इंसान बढ़ते वजन या बाहर निकलती तोंद से परेशान दिखता है. अक्सर लोग इसे सिर्फ पर्सनैलिटी या खूबसूरती से जोड़कर देखते हैं कि कपड़े ठीक से फिट नहीं आ रहे या फोटो अच्छी नहीं आ रही. लेकिन अगर आप भी मोटापे को सिर्फ दिखने की परेशानी मान रहे हैं, तो जरा संभल जाइये. नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुए पहले ओबेसिटी समिट में देश के जाने-माने डॉक्टरों ने एक बहुत बड़ी चेतावनी दी है. डॉक्टरों का साफ कहना है कि मोटापा कोई कॉस्मेटिक दिक्कत नहीं, बल्कि एक जानलेवा बीमारी है जो शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है.
सामान्य वजन वालों को भी बड़ा खतरा
इस समिट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई. एम्स के विशेषज्ञों ने साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति का वजन सामान्य दिखता है और उसका बीएमआई (BMI) भी सही दायरे में है, लेकिन पेट के आसपास चर्बी जमा है, तो वह भी खतरे की जद में है.
पेट के आसपास जमा होने वाली इस चर्बी को मेडिकल भाषा में विसरल फैट कहते हैं. यह चर्बी लिवर, पैंक्रियाज और दिल के आसपास चिपक जाती है. बाहर से देखने पर इंसान भले ही बहुत ज्यादा मोटा न लगे, लेकिन अंदर से उसके अंग खतरे में पड़ जाते हैं. इसलिए अगर वजन कंट्रोल में है फिर भी पेट बाहर निकल रहा है, तो बेपरवाह होने के बजाय सतर्क होना जरूरी है.
मोटापे के साथ घर में घुसती हैं ये गंभीर बीमारियां
जब शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमने लगती है, तो यह हमारे पूरे मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देती है. एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक बढ़ता मोटापा इन बीमारियों को सीधे न्योता देता है:
टाइप-2 डायबिटीज: पेट की चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है, जिससे खून में शुगर का स्तर तेजी से अनकंट्रोल होने लगता है.
हाई ब्लड प्रेशर: नसों पर अतिरिक्त चर्बी और दबाव के कारण दिल को खून पंप करने में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है.
हार्ट अटैक और स्ट्रोक: नसों में ब्लॉकेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे कम उम्र में भी दिल के दौरे आ रहे हैं.
फैटी लिवर: लिवर पर चर्बी चढ़ने से पाचन खराब होता है और आगे चलकर लिवर डैमेज का रिस्क रहता है.
जोड़ों में दर्द और अर्थराइटिस: शरीर का भारी वजन घुटनों पर पड़ता है, जिससे चलने-फिरने में भारी तकलीफ होने लगती है.
क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
समिट का उद्घाटन करते हुए एम्स के डायरेक्टर डॉ. निखिल टंडन और अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी ने हमारे रहन-सहन को पूरी तरह बिगाड़ दिया है.
मोटापे के पीछे की मुख्य वजहें:
- देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद न लेना
- दफ्तर या घर में लगातार 8-9 घंटे कुर्सी पर बैठे रहना
- जंक फूड, डिब्बाबंद खाना और सॉफ्ट ड्रिंक्स का अंधाधुंध इस्तेमाल
- खाने में जरूरत से ज्यादा नमक, चीनी और रिफाइंड तेल की मात्रा
- लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव और चिंता
हर मरीज का इलाज एक जैसा नहीं हो सकता
एम्स नई दिल्ली के मेडिसिन डिपार्टमेंट (यूनिट-II) के हेड प्रो. नवल के. विक्रम ने समिट में एक बहुत जरूरी पहलू पर बात रखी. उन्होंने बताया कि मोटापे का इलाज कोई रेडीमेड फॉर्मूला नहीं है कि जो नुस्खा एक पर चला, वही सब पर चलेगा.
हर व्यक्ति की उम्र, उसकी मेडिकल हिस्ट्री, पारिवारिक बैकग्राउंड और मेटाबॉलिक प्रोफाइल अलग होती है. किसी को सिर्फ डाइट और कसरत से ठीक किया जा सकता है, तो किसी को खास दवाओं या फिर सर्जरी की जरूरत पड़ती है. इसलिए किसी दूसरे का डाइट प्लान देखकर खुद पर आजमाने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है.
डॉक्टरों की खास सलाह: कैसे करें बचाव?
अगर आप खुद को और अपने परिवार को मोटापे और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचाना चाहते हैं, तो इन बातों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में तुरंत शामिल करें:
रोजाना 30 से 45 मिनट जरूर चलें: सुबह या शाम तेज कदमों से टहलना, योग करना या हल्की एक्सरसाइज शरीर के मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखती है.
प्लेट में फाइबर बढ़ाएं: हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी ताजे फल, दालें और साबुत अनाज को खाने का मुख्य हिस्सा बनाएं.
पैकेज्ड और जंक फूड से दूरी बनाएं: पैकेट वाले स्नैक्स, समोसे, पिज्जा, ज्यादा मीठी चीजें और बहुत तला-भुना खाने से पूरी तरह परहेज करें.
7-8 घंटे की गहरी नींद लें: कम सोने से शरीर में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है.
शॉर्टकट और खुद से दवा लेने से बचें: इंटरनेट देखकर या किसी के कहने पर वजन घटाने वाले सप्लीमेंट, पाउडर या दवाइयां बिना डॉक्टर की सलाह के कभी न खाएं. ये किडनी और दिल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.
बच्चों और युवाओं पर खास ध्यान देने की जरूरत
आजकल स्कूल जाने वाले बच्चों और कॉलेज के युवाओं में भी मोटापा और पेट निकलने की दिक्कत बहुत तेजी से बढ़ रही है. बच्चे बाहर खेलने के बजाय मोबाइल और कंप्यूटर में लगे रहते हैं और साथ में पैकेट बंद चिप्स या कोल्ड ड्रिंक पीते हैं.
पैरेंट्स को चाहिये कि वे बच्चों के खाने-पीने और उनकी फिजिकल एक्टिविटी पर बचपन से ही नजर रखें. अगर समय रहते जीवनशैली में सुधार न किया गया, तो जवानी की उम्र में ही डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियां घेर लेंगी.
मोटापा कोई ऐसी चीज नहीं है जो एक दिन में आ जाए या एक दिन में चली जाए. यह हमारी रोज की आदतों का नतीजा होता है. इसलिए बढ़ते वजन को नजरअंदाज करने के बजाय आज ही से अपनी सेहत पर ध्यान दें और सही लाइफस्टाइल अपनाएं.
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