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This Article is From May 02, 2025

AIIMS के डॉक्टर ने बताया बच्चों में जानलेवा भी हो सकती हैं ये हड्डियों की बीमारियां, कैसे बचें

नई दिल्ली के AIIMS में पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजी डिवीजन में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र बागड़ी ने बताया कि ये एक भ्रम है कि रूमेटिक  डिसऑर्डर बच्चों में नहीं हो सकते. सच तो यह है कि जितनी बीमारी रूमेटिक कंडीशन की बड़ों में होती है उतनी ही बच्चों में भी. रूमेटिक अर्थराइटिस को बच्चों में जूविनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस कहते हैं. 

AIIMS के डॉक्टर ने बताया बच्चों में जानलेवा भी हो सकती हैं ये हड्डियों की बीमारियां, कैसे बचें
सिस्टमिक जीआई में जोड़ों में दर्द और बुखार आता है.

क्या आपको भी यही लगता है कि हड्डियों के और जोड़ों के रोग सिर्फ बुजुर्गों को होते हैं. आप उतने भी गलत भी नहीं हैं ज्यादातर मामलों में रूमेटिक रोगों को  बुजुर्गों से जोड़कर ही देखा जाता है. लेकिन आप यह जानकर हैरान हो सकते हैं कि ये बीमारियां बच्चों को भी अपना शिकार बना सकती हैं? दिल्ली के एम्स के डॉक्टर्स (AIIMS Doctor) की मानें तो रूमेटिक रोग बच्चों को भी होते हैं और अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो जान भी जा सकती है. हमारे सहयोगी पल्लव मिश्रा ने दिल्ली एम्स के डॉक्टर नरेंद्र बागड़ी से बात की. डॉक्टर्स ने बताया कि अभी एम्स में हर हफ्ते 40 से 45 मामले इसके सामने आ रहे हैं.

नई दिल्ली के AIIMS में पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजी डिवीजन में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र बागड़ी ने बताया कि ये एक भ्रम है कि रूमेटिक  डिसऑर्डर बच्चों में नहीं हो सकते. सच तो यह है कि जितनी बीमारी रूमेटिक कंडीशन की बड़ों में होती है उतनी ही बच्चों में भी. रूमेटिक अर्थराइटिस को बच्चों में जूविनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस कहते हैं. 

बच्चों में होती हैं कौन सी बीमारियां 

जूविनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस के अलावा ल्यूपस, जूविनाइल डर्माटोमायोसाइटिस, सिस्टमिक स्क्लेरोसिस ये सारी बीमारी बच्चों में भी हो सकती हैं. इसके अलावा कुछ बीमारी जैसे वैसक्युलाइटिस बच्चों में हो सकती है. कुछ वैस्कुलाइटिस बच्चों में ही पाए जाते हैं जैसे कावासाकी डिजीज,आइजीई वैस्कुलाइटिस यह बच्चों में ही पाए जाते हैं.

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क्या है कारण 

बच्चों में होने वाली इन बीमारियों का कारण क्या है. दुख की बात है कि इस बारे में बहुत ज्यादा अध्ययन मौजूद नहीं हैं, लेकिन कुछ कारण है जैसे जेनेटिक कंडीशन, एनवायरमेंटल फैक्टर. एक्सपर्टस के अनुसार ये रोग तब होते हैं जब हमारे शरीर की सुरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम गड़बड़ा जाती है और अपने ही शरीर पर हमला करने लगती है.

क्या हैं लक्षण 

  • कुछ बीमारियों में केवल जोड़ों में दर्द या सूजन आती है. तो कुछ  में मॉर्निंग स्टिफनेस और जेलिंग जैसे लक्षण दिखते हैं. इस तरह के लक्षण जूविनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस के होते हैं.
  • इसके साथ ही अगर नॉन सिस्टमिक जीआई है, तो जोड़ों में दर्द और सूजन के साथ कुछ बच्चों में आंखों पर भी असर पड़ सकता है. 
  • उसके अलावा सिस्टमिक जीआई में जोड़ों में दर्द और बुखार आएगा. 
  • बचपन में जोड़ों का दर्द, सूजन, त्वचापर चकत्ते, मुंह में छाले, मांसपेशियों में दर्द और लंबे समय तक बुखार — ये सभी संकेत पेडियाट्रिक रूमेटिक डिसऑर्डर्स के हो सकते हैं.

गंभीर नुकसान 

अगर समय पर इन बीमारियों की पहचान न हो, तो ये बच्चों के जोड़ों के साथ-साथ आंतरिक अंगों जैसे गुर्दे को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं. यह 8 से 9 साल के बच्चों में हो सकती है और यह फीमेल चाइल्ड में ज्यादा होने की संभावना होती है. हमारे पास इन रोगों के लिए प्रभावी दवाएं मौजूद हैं. अगर  समय पर पहचान हो जाए तो सही इलाज हो सकता है.

किस उम्र के बच्चों को बीमारी ज्यादा होने की संभावना? 

डॉक्टर बागड़ी के अनुसार, कुछ बीमारी 5 साल से नीचे उम्र के बच्चों में ज्यादा कॉमन होती हैं  जैसे कावासाकी डिजीज, ओलिगोआर्टिकुलर जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस, आइजीई वैस्कुलाइटिस.  उन्होंने कहा कि कई बार पार्टिकुलर जीन की वजह से भी बीमारी हो जाती है तो वह जल्दी भी हो सकती हैं. कुछ बीमारी 8-9 साल के ऊपर बच्चों में होती है. लेकिन यह सब बीमारियां सबसे ज्यादा फीमेल चाइल्ड में होती हैं. लेकिन यह बीमारियांमेल चाइल्ड में भी जरूर हो सकती हैं. 

संक्रमित बीमारी नहीं : खास बात यह है कि यह इन्फेक्शस और कम्युनिकेबल डिजीज नहीं हैं मतलब ये एक- दूसरे को संक्रमित नहीं करती है. 

रूमेटिक डिसऑर्डर का इलाज संभव 

हमारे पास आज की तारीख में कई प्रभावशाली दवाइयां हैं जिसके जरिए हम इसका इलाज कर सकते हैं. और एक लंबे समय तक  बीमारी को कंट्रोल करने के बाद हम दवाओं को बंद भी कर सकते हैं. जिसके बाद बच्चे नॉर्मल जीवन जी सकते हैं. हालांकि कई बार दवा बंद करने के बाद ही कुछ बच्चों में ये बीमारी दोबारा आ सकती है लेकिन इसका इफेक्टिव ट्रीटमेंट है. हम बात यह है कि हम दवा डॉक्टर की निगरानी मिली जिससे उसका इन्फ्लेमेशन हम कम से कम कर सकें.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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