समय के साथ उम्र बढ़ना एक नॉर्मल प्रोसेस है, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं होता है हमारे शरीर में होने वाले बदलाव भी नॉर्मल हों. समय के साथ शरीर में दिखने वाले छोटे-छोटे बदलाव कई तरह की समस्याओं की ओर इशारा करते हैं. अक्सर 60 की उम्र के बाद दिखने वाले लक्षणों को लोग बुढ़ापे का असर समझकर इग्नोर कर देते हैं, लेकिन कभी-कभी ये छोटी-मोटी समस्याएं भी गंभीर हो सकती हैं. इसलिए उम्र के साथ शरीर में दिखने वाले इग्नोर करने की भूल न करें. यहां हम आपको ऐसे संकेतों के बारे में बताएंगे, जिसे बुढ़ापे के लक्षणों को समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए. इसकी जानकारी के लिए हमने सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन डॉ. मनीषा अरोड़ा से बातचीत की है.
डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि उम्र बढ़ने का मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि हर नई समस्या को कॉमन मान लिया जाए. कई बदलाव ऐसे होते हैं, जो किसी छिपी हुई बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं, जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत होती है. यहां जानते हैं उन लक्षणों के बारे में-
भूख कम लगना
डॉक्टर कहते हैं कि अक्सर बुजुर्गों को जब भूख कम लगने लगती है या फिर खाने की इच्छा कम हो जाती है, तो लोग इसे बढ़ती उम्र का असर समझकर इग्नोर कर देते हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. इस तरह के संकेत पाचन में गड़बड़ी, पोषक तत्वों की कमी या फिर कैंसर की ओर इशारा कर सकता है. ऐसी स्थिति में अपने घर के बुजुर्गों को किसी हेल्थ एक्सपर्ट से जरूर दिखाएं.
बार-बार गिरना या बैलेंस बिगड़ना
डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि अगर आपके घर के बुजुर्ग अगर चलते समय लड़खड़ा रहे हो या फिर बार-बार गिर रहे हो तो ऐसे में एक बार जांच जरूर कराएं. इस तरह से बार-बार शरीर का संतुलन बिगड़ना मांसपेशियों की कमजोरी, आंखों की समस्या, न्यूरोलॉजिकल बीमारी या दवाओं के साइड इफेक्ट के हो सकते हैं. ऐसे में जांच जरूरी हो जाता है.
हल्के काम में भी सांस फूलना
60 की उम्र के बाद अगर सीढ़ियां चढ़ने, हल्का-फुल्का चलने या फिर नॉर्मल स्पीड में चलने से भी सांस फूलने लगे, तो इस तरह के लक्षण लंग्स और हार्ट से जुड़े हो सकते हैं. इसे उम्र के कॉमन लक्षण समझकर इग्नोर करने की गलती बिल्कुल भी न करें.
याददाश्त कमजोर होना
कभी-कभी चीजें भूल जाना काफी नॉर्मल है, लेकिन अगर आपके घर के बुजुर्ग बार-बार एक ही सवाल पूछे, हाल की बातचीत भूल जाए या फिर रोजमर्रा के कामों में परेशानी होना डिमेंशिया या अन्य मेंटल हेल्थ से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैँ.
पेशाब या मल में खून आना
डॉक्टर मनीषा अरोड़ा बताती हैं कि पेशाब या मल में लाल रंग का खून दिखना कभी भी नॉर्मल नहीं माना जाना चाहिए. ये कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जिनमें कुछ स्थितियों में इमर्जेंसी ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है.
रात में बार-बार पेशाब आना
अगर रात में दो या तीन बार से अधिक उठकर पेशाब जाना पड़ रहा है, तो यह मूत्र प्रणाली, प्रोस्टेट या डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक समस्याओं का संकेत हो सकता है.
नींद न आना या बार-बार टूटना
लगातार अनिद्रा सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, मेटाबॉलिज्म, याददाश्त और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है. इसलिए लंबे समय तक बनी रहने वाली नींद की समस्या का इलाज जरूरी है.
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