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35 की उम्र के बाद शरीर में क्यों आने लगता है बदलाव? हेल्थ कोच ने बताया इसका असली कारण

35 की उम्र के बाद महिलाओं में थकान, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स और बाल झड़ना आम है. हेल्थ कोच बताते हैं ये बदलाव अक्सर हार्मोनल इम्बैलेंस से जुड़े हैं. महिलाएं खुद को फिट और सेहतमंद रखने के लिए इन 6 बातों का रखें ध्यान.

35 की उम्र के बाद शरीर में क्यों आने लगता है बदलाव? हेल्थ कोच ने बताया इसका असली कारण
35 की उम्र के बाद महिलाएं खुद को कैसे संभालें?
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क्या आप भी 35 की उम्र पार कर चुकी है और अचानक आपको बहुत ज्यादा थकान, चिड़चिड़ापन या घबराहट (Anxiety) महसूस होने लगी है, तो आप अकेली नहीं हैं. हमारे आस-पास ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो अपने शरीर और मूड में आ रहे इन छोटे-छोटे बदलावों को नोटिस तो करती हैं, लेकिन काम के प्रेशर या भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल का नाम देकर नजरअंदाज कर देती हैं.

हेल्थ कोच ल्यूक कौटिन्हो का कहना है कि यह सिर्फ नॉर्मल स्ट्रेस नहीं है. दरअसल, 35 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर के अंदर एक बहुत बड़ा बदलाव शुरू होता है, जो सीधे आपके हार्मोन से जुड़ा है. ​ल्युक कौटिन्हो ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर एक बेहद जरूरी जानकारी शेयर की है. उन्होंने बताया है कि 35 साल के बाद महिलाओं के शरीर के अंदर आखिर क्या होता है.

​35 के बाद शरीर के अंदर क्या होता है बदलाव?

​ल्यूक कौटिन्हो के मुताबिक, इस उम्र में एस्ट्रोजन हार्मोन ऊपर-नीचे होने लगता है, प्रोजेस्टेरोन घटने लगता है और स्ट्रेस बढ़ाने वाला हार्मोन यानी कोर्टिसोल का लेवल बढ़ने लगता है. इसके साथ ही बॉडी की इंसुलिन सेंसिटिविटी भी कम हो जाती है और मसल्स धीरे-धीरे घटने लगती हैं. ​जब ये सारी चीजें एक साथ होती हैं, तो शरीर पर इसका सीधा असर दिखने लगता है. 

कौन से लक्षण आते हैं नजर-

  • बालों का सफेद होना
  • ​पेट के आस-पास चर्बी का बढ़ना
  • ​रात को ठीक से नींद न आना
  • ​अचानक मूड का बदल जाना 
  • ​दिमाग में धुंधलापन रहना 
  • ​मीठा खाने की तेज इच्छा होना
  • ​दिनभर एनर्जी की कमी महसूस होना

​ल्यूक आगे समझाते हैं कि जब हम बहुत ज्यादा और लंबे समय तक तनाव (Chronic Stress) में रहते हैं, तो यह तनाव हमारे शरीर से प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को 'चुरा' लेता है. नतीजा यह होता है कि घबराहट बढ़ने लगती है, नींद गायब हो जाती है और पीरियड्स का साइकिल भी बिगड़ने लगता है.

​इन 6 आसान तरीकों से खुद को रखें फिट-

​ल्युक कौटिन्हो ने इन समस्याओं से निपटने के लिए कुछ बहुत ही आसान और काम के टिप्स दिए हैं, जिन्हें कोई भी महिला अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर सकती है-

​1. ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें-

ल्यूक की सबसे पहली सलाह है कि कभी भी सिर्फ कार्बोहाइड्रेट (जैसे सिर्फ चावल या रोटी) अकेले न खाएं. अपने खाने की थाली में कार्ब्स, प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स को सही तरीके से शामिल करें. खाना खाते समय सबसे पहले सब्जियां और प्रोटीन खाएं, उसके बाद ही कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों पर हाथ लगाएं.

​2. खाने के बाद थोड़ी वॉक जरूर करें-

हेल्थ कोच का कहना है कि हर बार खाना खाने के बाद कम से कम 10 मिनट के लिए हल्की वॉक जरूर करें. जब आपका ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है, तो आपके हार्मोन भी शांत और संतुलित रहते हैं.

​3. नींद से कोई समझौता नहीं-

ल्यूक कहते हैं, अपनी नींद को एक दवा की तरह समझें और इसकी हिफाजत करें. सोते समय ही हमारे शरीर के हार्मोन रीसेट होते हैं. अगर नींद खराब होगी, तो कोर्टिसोल बढ़ेगा, जिससे हार्मोन का बैलेंस और बिगड़ेगा. अच्छी नींद के लिए रात को जल्दी डिनर करें, कमरे में हल्की या डिम लाइट रखें और सोने से पहले फोन को खुद से दूर रख दें. परफेक्ट नींद के चक्कर में न पड़ें, बल्कि रोजाना एक तय समय पर सोने की आदत डालें.

​4. मसल्स बनाना है जरूरी-

मसल्स यानी मांसपेशियां हमारे शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारती हैं. यह एस्ट्रोजन हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करती हैं और आपकी हड्डियों को मजबूत रखती हैं. इसके लिए हफ्ते में कम से कम 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज या वजन उठाने वाली एक्सरसाइज जरूर करें.

​5. क्रोनिक स्ट्रेस- 

ल्यूक का मानना है कि लाइफ में तनाव को पूरी तरह जीरो करना मुमकिन नहीं है, लेकिन शरीर को उससे उबरने (Recovery) का मौका देना जरूरी है. इसके लिए धीमी सांस लेने की प्रैक्टिस करें, प्राणायाम करें, सुबह की धूप लें, खुद के लिए थोड़ा शांत वक्त निकालें और सबसे जरूरी बात अपनी सीमाएं तय करें और जहां जरूरत हो, वहां 'ना' कहना सीखें. शांत शरीर ज्यादा तेजी से ठीक होता है.

​6. हार्मोन को सपोर्ट करने वाला खाना खाएं-

अपने खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, फूलगोभी-पत्तागोभी जैसी क्रूसिफेरस सब्जियां, बीज, नट्स, अच्छे फैट्स और सही मात्रा में प्रोटीन जरूर लें. खाने में मौजूद फाइबर शरीर से एक्स्ट्रा एस्ट्रोजन को बाहर निकालने में मदद करता है. इसलिए हमेशा पैकेट बंद चीजों की जगह साबुत और घर का बना खानाही चुनें.

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