मानसून आते ही डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, पेट के संक्रमण, खांसी-जुकाम जैसी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इन बीमारियों से बचने के लिए लोग अक्सर तरह-तरह के घरेलू नुस्खे और पुराने उपाय अपनाते हैं. हालांकि, हर घरेलू उपाय फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है. कई बार लोग पुरानी मान्यताओं पर भरोसा करते हुए सही इलाज लेने में देरी कर देते हैं, जिससे बीमारी और गंभीर हो सकती है.
इसी विषय पर बात करते हुए शार्दाकेयर हेल्थसिटी के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉक्टर चिराग टंडन ने मानसून से जुड़े ऐसे 4 आम मिथकों के बारे में बताया, जिन पर लोगों को भरोसा नहीं करना चाहिए.
पहला: बारिश में भीगना सेहत के लिए अच्छा होता है
कई लोगों का मानना है कि बारिश का पानी शरीर को साफ करता है और इससे स्वास्थ्य बेहतर होता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है. हवा में मौजूद धूल, धुआं और प्रदूषण बारिश के पानी में मिल सकते हैं, जिसके कारण ज्यादा देर तक बारिश में भीगने से त्वचा संबंधी समस्याएं, फंगल इंफेक्शन और दूसरी दिक्कतें हो सकती हैं.
दूसरा: हर खांसी-जुकाम में एंटीबायोटिक दवा जरूरी है
बहुत से लोग जरा सा जुकाम या खांसी होने पर तुरंत एंटीबायोटिक दवा लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि यह गलत आदत है. बारिश के मौसम में ज्यादातर लोगों को सर्दी-जुकाम वायरस की वजह से होता है. जिसपर एंटीबायोटिक दवाएं वायरस पर असर नहीं करतीं. बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से आगे चलकर दवाओं का असर कम हो सकता है.
तीसरा: बासी खाना खाने से पेट की परेशानी ठीक होती है
कुछ लोग मानते हैं कि मानसून में बासी खाना खाने से पेट फूलना या पेट की अन्य समस्याएं कम हो जाती हैं, लेकिन डॉक्टर का कहना अलग है बारिश के मौसम में नमी और गर्मी ज्यादा होती है, जिससे बासी खाने में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं. ऐसा खाना खाने से फूड पॉइजनिंग, दस्त, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
चौथा: मच्छर सिर्फ गंदे पानी में पनपते हैं
अक्सर लोग सोचते हैं कि डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छर केवल गंदे और रुके हुए पानी में पैदा होते हैं, लेकिन यह कहना भी पूरी तरह सही नहीं है. डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और रुके हुए पानी में भी आसानी से पनप सकता है, जैसे घर के कूलर, बाल्टी, गमले, पानी की टंकियां और खाली डिब्बों में जमा पानी भी मच्छरों की पैदावार की जगह बन सकता है.
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