पीएम मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम के 132वें एपिसोड में हरियाणा के यमुनानगर निवासी एक छात्र का जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि हरियाणा के यमुनानगर से प्रथम बरार ने लिखा है कि ग्रीन और क्लीन भारत ही समृद्ध भारत का मार्ग है. इधर जैसे पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम में प्रथम बरार का नाम लेने की खबर पता चली तो उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ लग गई. इस खास मौके पर प्रथम बरार ने खुशी जताते हुए कहा कि वह इस बात से बेहद हैरान और खुश हैं कि प्रधानमंत्री ने उनके विचारों को इतनी बड़ी पहचान दी.
बहुत सरप्राइज हूं- प्रथम
प्रथम ने बताया कि उन्होंने पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर अपने विचार प्रधानमंत्री को लिखे थे. उनका मकसद था कि लोग समझें कि हम अपने पर्यावरण को कैसे बेहतर बना सकते हैं और उसे सुरक्षित रख सकते हैं, ताकि वर्तमान और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें. यमुनापार निवासी प्रथम ने आगे कहा कि मैं बहुत सरप्राइज हूं कि मेरे द्वारा लिखी गई बातों को प्रधानमंत्री ने सुना और मेरा नाम लिया. यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है.
उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में खुद 'मन की बात' सुनकर नहीं, बल्कि उनके शिक्षक शशि सर से पता चला कि उनका जिक्र किया गया है. प्रथम की जिंदगी आसान नहीं रही है. कुछ समय पहले उनके पिता का निधन हो गया था. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई और समाज के लिए काम जारी रखा. अभी वह बीकॉम फाइनल ईयर के छात्र हैं. पर्यावरण के प्रति जागरूकता की प्रेरणा उन्हें अपने स्कूल के दिनों से ही मिलने लगी थी. 10वीं तक होली हार्ट स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें इस दिशा में सोचने की प्रेरणा मिली.
#MannKiBaat | हरियाणा के यमुनानगर से प्रथम बरार ने लिखा है कि Green और Clean Bharat ही समृद्ध भारत का मार्ग है । इससे उनकी गहरी सोच का पता चलता है । दिल्ली के शंख गुप्ता का सुझाव है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए और अधिक प्रयास होने चाहिए: प्रधानमंत्री… pic.twitter.com/f1rqQz0PLN
— SansadTV (@sansad_tv) March 29, 2026
कॉलेज में जॉइन किया एनएसएस
बाद में 11वीं-12वीं के दौरान एमएलएन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते समय उन्हें शशि सर का मार्गदर्शन मिला. प्रथम बरार ने बताया कि उन्होंने शशि सर के साथ मिलकर भगत सिंह पार्क में एक समर कैंप लगाया, जहां स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई लेक्चर आयोजित किए गए. इसके साथ ही उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए रैलियां भी निकालीं.
कॉलेज में आने के बाद उन्होंने एनएसएस जॉइन किया. उन्होंने कहा कि एनएसएस का मूल मंत्र "मैं नहीं, तुम" उन्हें बहुत प्रभावित करता है. इसी सोच के साथ उन्होंने पेड़ लगाने, इको-फ्रेंडली जीवनशैली अपनाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का काम जारी रखा. प्रथम बरार ने युवाओं के लिए खास संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को आगे आकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना चाहिए. इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना चाहिए और ऐसे तरीकों को अपनाना चाहिए जो प्रकृति के लिए सुरक्षित हों.
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