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हरियाणा में आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने की चेतावनी, मिला 20 अप्रैल तक का अल्टीमेटम; जानिए वजह?

सितंबर 2025 से अटका 400 करोड़ रुपये का भुगतान और फाइलों की लंबी पूछताछ से तंग आकर डॉक्टरों ने 20 अप्रैल का आखिरी अल्टीमेटम दिया है. अगर समय रहते पैसा नहीं मिला, तो गरीबों का मुफ्त इलाज पूरी तरह ठप हो सकता है.

हरियाणा में आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने की चेतावनी, मिला 20 अप्रैल तक का अल्टीमेटम; जानिए वजह?
हरियाणा में आयुष्मान कार्ड से इलाज पर संकट: अस्पतालों का 400 करोड़ बकाया, 20 अप्रैल के बाद डॉक्टरों ने दी काम बंद करने की चेतावनी

Chandigarh News: हरियाणा में उन लाखों लोगों के लिए एक चिंताजनक खबर है जो आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) के जरिए प्राइवेट अस्पतालों में अपना मुफ्त इलाज करवाते हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हरियाणा ब्रांच (IMA Haryana) ने राज्य सरकार को साफ कह दिया है कि अगर उनका बकाया पैसा नहीं मिला, तो वे इस योजना को आगे नहीं चला पाएंगे.

7 महीने से अटका है पैसा

IMA हरियाणा की अध्यक्ष डॉ. सुनीला सोनी का कहना है कि प्रदेश के लगभग 650 प्राइवेट अस्पतालों का सरकार पर 400 करोड़ रुपये बकाया है. नियम के हिसाब से अस्पताल जब बिल भेजता है, तो उसे 15 दिनों के अंदर पैसा मिल जाना चाहिए. लेकिन हकीकत यह है कि पिछले साल सितंबर 2025 से ही अस्पतालों का पैसा सरकार के पास फंसा हुआ है.

मुख्यमंत्री के आदेश भी ठंडे बस्ते में

अस्पतालों की नाराजगी सिर्फ पैसों को लेकर नहीं, बल्कि सरकारी सुस्ती को लेकर भी है. आयुष्मान भारत स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण, हरियाणा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को लिखे पत्र में याद दिलाया गया है कि जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री ने कुछ नए नियमों को मंजूरी दी थी. इन नियमों के मुताबिक, अस्पतालों की समस्याओं को सुलझाने वाली कमेटियों में IMA हरियाणा के अध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि का होना जरूरी था. लेकिन दुख की बात यह है कि मुख्यमंत्री के उन आदेशों को अब तक जमीन पर लागू नहीं किया गया है.

5 महीने से नहीं हुई कोई मीटिंग

हैरानी की बात यह भी है कि इन कमेटियों की मीटिंग हर महीने होनी चाहिए, लेकिन पिछले 5 महीनों से एक भी बैठक नहीं हुई है. इस वजह से न तो नए अस्पताल इस योजना से जुड़ पा रहे हैं और न ही पुराने अस्पतालों को नई बीमारियों के इलाज की मंजूरी मिल पा रही है.

डॉक्टरों की परेशानी

अस्पतालों का कहना है कि वे भारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं. जब भी वे अपने पैसे मांगते हैं, तो सरकारी विभाग फाइलों में कमियां निकालकर भुगतान रोक देता है. डॉक्टरों का आरोप है कि कमी दूर करने के बाद भी पैसा जारी नहीं किया जा रहा है. इसी के विरोध में 7 अप्रैल को हुई एक मीटिंग में सभी अस्पतालों ने फैसला लिया है कि वे अपना सरेंडर लेटर (योजना छोड़ने का पत्र) संगठन को सौंप देंगे.

पिछले साल भी बंद हो गया था इलाज

अगर सरकार और डॉक्टरों के बीच 20 अप्रैल तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो आयुष्मान कार्ड धारकों को प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलना बंद हो सकता है. पिछले साल भी पैसों की कमी और देरी की वजह से इन अस्पतालों ने कुछ समय के लिए इलाज बंद कर दिया था.

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