- हरियाणा की अल-फलह यूनिवर्सिटी पर छात्रों को UGС मान्यता का झूठा दावा कर भारी फीस वसूलने का आरोप है
- मेडिकल कॉलेज में फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति और निरीक्षण के समय अस्पताल को सजाकर भ्रम फैलाने का खुलासा हुआ है
- ED ने यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में जेल में रखा है
शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में घिरी हरियाणा की अल-फलह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा साकेत कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट की एक्सक्लूसिव जानकारी NDTV के हाथ लगी है. इस चार्जशीट में यूनिवर्सिटी और अल-फलह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किए गए एक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है. ED ने इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी और यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी को बताया है, जो फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है.

मान्यता के नाम पर छात्रों से छलावा
ED की चार्जशीट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। जांच एजेंसी का दावा है कि यूनिवर्सिटी ने खुद को UGC की धारा 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त बताया, जबकि हकीकत में यूनिवर्सिटी न तो इस लिस्ट में थी और न ही इसके लिए कभी आवेदन किया गया था. NAAC ग्रेड और UGC की मंजूरी के दावे सिर्फ फाइलों और वेबसाइट तक ही सीमित थे. इन झूठे दावों के दम पर हजारों छात्रों से करोड़ों रुपये की फीस वसूली गई.
मेडिकल कॉलेज में 'घोस्ट' फैकल्टी और फर्जी मरीज
मेडिकल कॉलेज की मान्यता बचाए रखने के लिए अपनाए गए हथकंडे और भी चौंकाने वाले हैं. चार्जशीट के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों को पूरा दिखाने के लिए डॉक्टरों की भर्ती सिर्फ कागजों पर की गई. कई डॉक्टर सिर्फ निरीक्षण (Inspection) से ठीक पहले रिकॉर्ड में शामिल किए गए, जो कभी पढ़ाने नहीं आए.

अस्पताल में OPD और बेड ऑक्यूपेंसी ज्यादा दिखाने के लिए बिचौलियों के जरिए लोगों को मरीज बनाकर लाया जाता था. रेगुलेटरी बॉडी के निरीक्षण के समय अस्पताल और कॉलेज को रातों-रात सजाया जाता था ताकि सब कुछ सही होने का भ्रम पैदा किया जा सके.
493 करोड़ की अवैध कमाई और पारिवारिक नियंत्रण
ED की जांच में सामने आया कि अल-फलह चैरिटेबल ट्रस्ट पर पूरी तरह से जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके परिवार का कब्जा था. गलत जानकारी और फर्जीवाड़े के जरिए ग्रुप ने करीब 493 करोड़ रुपये कमाए. यूनिवर्सिटी का पैसा जवाद की पारिवारिक कंपनियों जैसे आमला एंटरप्राइजेज, कारकुन कंस्ट्रक्शन और दियाला कंस्ट्रक्शन में भेजा गया. इन फर्मों में 110 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर की गई.
जवाद ने अपनी पत्नी को 3 करोड़ और बेटे को 1 करोड़ रुपये विदेश भेजे. दुबई में उसकी पत्नी का 'जासमा ज्वेलर्स' नाम से शोरूम है और UAE के कई प्रोजेक्ट्स में भी निवेश के लिंक मिले हैं.
ED की बड़ी कार्रवाई
मनी लॉन्ड्रिंग की इस जांच के दौरान ED ने अब तक कड़ी कार्रवाई की है. दिल्ली और हरियाणा में छापेमारी के दौरान 48.65 लाख रुपये नकद और डिजिटल दस्तावेज जब्त किए गए. करीब 140 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति (लगभग 54 एकड़ जमीन और इमारतें) अटैच की गई है.
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