- गुजरात CID ने असम के बारपेटा से 1090 साइबर अपराधों में शामिल आरोपी को गिरफ्तार किया है.
- आरोपी देशभर के 1,754 बैंक खातों में अवैध पैसे ट्रांसफर कर उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन भेजता था.
- जांच में डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ED धमकी और चिप सेलर ऐप से क्रिप्टो ट्रेडिंग का खुलासा हुआ.
गुजरात सीआईडी ने एक ऐसे साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिस पर 1090 साइबर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं. सीआईडी के अधिकारियों ने आरोपी को असम से गिरफ्तार किया है. उस पर देश भर में 1,071.5 करोड़ रुपये के कुल 1090 साइबर अपराधों में शामिल होने और चीन में मौजूद अपराधियों से जुड़े होने का आरोप है. इन अपराधों में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामले भी शामिल हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने सोमवार को बताया कि जांच से पता चला है कि आरोपी रफीकुल आलम (25) देश भर के 1,758 बैंक खातों में अवैध मनी ट्रांसफर करने और उस पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन भेजने का 'मास्टरमाइंड' था.
इंटरनेशनल गैंग का पर्दाफाश!
सीआईडी के गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCE) ने बताया कि महाराष्ट्र पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी पत्रों के आधार पर एक बुजुर्ग को 'डिजिटल अरेस्ट' किए जाने के एक अलग मामले की जांच के दौरान, काउंसलिंग के जरिए अलग-अलग राज्यों में ऐसे 10 और मामलों को होने से रोका गया. CCE ने बताया कि आरोपी एक इंटरनेशनल गैंग का मास्टरमाइंड भी था.
इसमें कहा गया है, "तकनीकी विश्लेषण और पीड़ितों के बयान के आधार पर, सीसीई की एक टीम ने बारपेटा शहर का दौरा किया और भेष बदलकर मुख्य मनी लॉन्ड्रर के घर की तीन दिन की रेकी की और उसे तकनीकी उपकरणों के साथ गिरफ्तार कर लिया."
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने कहा, "डिजिटल अरेस्ट या साइबर फ्रॉड के जरिए आरोपियों को जो पैसे मिले, उन्हें छोटी-छोटी रकम में बदलकर एक घंटे के अंदर पूरे भारत में 1,754 बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया गया. उनका मकसद था कि फाइनेंशियल सर्विलांस एजेंसियों की नजर से बचा जा सके."
एजेंसी ने बताया कि आरोपी WhatsApp और Telegram के जरिए सीधे चीनी अपराधियों के साथ फाइनेंशियल जानकारी शेयर करते थे. साइबर क्राइम से जांच अधिकारियों को आरोपी के मोबाइल फोन में कुल 23 क्रिप्टो वॉलेट मिले, जिनसे 16 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ था. इससे क्रिप्टोकरेंसी और चीन के एक गैंग के बीच कनेक्शन का पता चला. उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी की गैर-कानूनी ट्रेडिंग का भी पता लगाया, जो 'चिप सेलर' ऐप का इस्तेमाल करके की जा रही थी.
गुजरात पुलिस ने बताया, "आरोपी देश भर में कुल 1,090 साइबर अपराधों में शामिल रहा है, जिनकी कुल रकम 1,071.5 करोड़ रुपये है. उसके मोबाइल फोन पर गेमिंग अकाउंट से जुड़े लेन-देन भी पाए गए."
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फ्लैट बेचकर शख्स ने ठग को दिए पैसे...
CCE के मुताबिक, सूरत के एक और सीनियर सिटिजन को पुलिस बनकर आए लोगों ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की कार्रवाई की धमकी दी और आरोपी ने 60 लाख रुपये की मांग की.
सूरत के रहने वाले उस शख्स ने अपना फ्लैट बेचकर अपराधियों को 40 लाख रुपये देने पर सहमति जताई. हालांकि, जब फ्लैट बेचने का सौदा पूरा नहीं हो पाया, तो उन्होंने स्कैमर्स को पैसे देने के लिए अपनी दुकान 20 लाख रुपये में बेच दी.
जांच अधिकारियों ने बताया कि कुल 10 लोगों को डिजिटल अपराधों का शिकार बनने से बचाया गया. इनमें से पांच गुजरात से, तीन ओडिशा से और एक-एक छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से थे.
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