फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच अपने चरम पर है. टूर्नामेंट के 97 मैच पूरे हो चुके हैं. क्वार्टर फाइनल राउंड का पहला मुकाबला फ्रांस और मोरक्को के बीच आज (10 जुलाई) जिलेट स्टेडियम में खेला गया. जहां किलियन एम्बाप्पे की अगुवाई वाली फ्रांस की टीम 2-0 से जीत हासिल करने में कामयाब रही. मैच के दौरान एम्बाप्पे का जलवा रहा. उन्होंने 60वें मिनट में शानदार गोल दागा. मौजूदा समय में वह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले संयुक्त रूप से पहले खिलाड़ी हैं.
एम्बाप्पे को क्यों कहा जाता है 'तानाशाह'?
सोशल मीडिया पर अक्सर एम्बाप्पे को 'तानाशाह' के रूप में दिखाया जाता है. उनके कई सारे मीम और वीडियो वायरल होते रहते हैं. बताया जाता है कि वह मैच के दौरान अपनी टीम, कोच और अन्य मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं. मगर ये सच नहीं है. यह धारणा उनके चाहने वालों फैंस की तरफ से बनाया गया है. उनका मानना है कि उन्होंने अपने बेहतरीन खेल से अपने करियर, क्लब और इंटरनेशनल लेवल पर काफी अधिक शक्ति अर्जित कर ली है.
एम्बाप्पे जब पेरिस सेंट-जर्मेन क्लब की तरफ से शिरकत कर रहे थे. उसी दौरान यह मीम फ्रांस में काफी लोकप्रिय हो गया था. उनको नापसंद करने वाले कई आलोचकों का मानना था कि क्लब ने उस दौरान उन्हें काफी अधिक प्रभाव दे दिया था. बाद में जब वह रियल मैड्रिड में गए तो कई वीडियो उनके सामने आए. जहां उन्हें ऐतिहासिक नेताओं और सैन्य कमांडरों के रूप में प्रदर्शित किया गया, जो पूरी दुनिया में काफी तेजी से वायरल हो गया.
कहां से आया 'तानाशाह' उपनाम?
माना जाता है कि यह उपनाम साल 2024 में फ्रांसीसी इन्फ्लुएंसर मोहम्मद हेनी और एम्बाप्पे के बीच हुए विवाद के बाद उत्पन्न हुआ. एम्बाप्पे के नाम पर किए गए मजाक को लेकर कानूनी शिकायतें दर्ज होने के बाद हेनी ने दावा किया था कि वह अपने नाम को तानाशाही बना रहे हैं. जिसके बाद यह शब्द जल्द ही सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो गया और बाद में 'तानाशाह एम्बाप्पे' मीम के रूप में बदल गया.
आपको बता दें कि 'जनरल' मीम असल में 'तानाशाह एम्बाप्पे' वाले मजाक का ही अगला रूप है. उनके चाहने वाले एडिट करके वीडियो बनाते रहते हैं. जिनमें उन्हें एक सैन्य नेता, राष्ट्रपति, सर्वोच्च नेता या तानाशाह के रूप में दिखाया जाता है, जो कथित तौर पर अपने आसपास के लोगों को प्रभावित करता है.
वीडियो में क्लब छोड़ने वाले खिलाड़ियों, बर्खास्त किए गए कोचों या गलती करने वाले साथी खिलाड़ियों को एम्बाप्पे के आदेशों के शिकार के रूप में दिखाया जाता है.
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