फ्रांस के मिडफील्डर एड्रियन रैबियोट ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी टीम सिर्फ़ स्पेन के लामिन यमाल के लिए कोई खास प्लान नहीं बना रही है, बल्कि उनका ध्यान 'ला रोजा' (स्पेन की टीम) पर पूरे अटैक करने पर होगा. जिसमें बॉल पोजेशन, मूवमेंट, क्रिएटिविटी और खाली जगह ढूंढने की काबिलियत भी शामिल है. फ्रांस का मुक़ाबला ज़बरदस्त फ़ॉर्म में चल रही स्पेन की टीम से होगा, जिसने क्वार्टर फ़ाइनल में बेल्जियम को 2-1 से हराकर सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई थी. स्पेन लगातार 36 मैचों से अजेय है और उसका लक्ष्य FIFA वर्ल्ड कप 2026 के फ़ाइनल में जगह बनाना होगा.
गोल डॉट कॉम के अनुसार, एड्रियन रैबियोट ने कहा,"लामिन यमाल के खिलाफ कोई खास प्लान नहीं है. हम पूरी स्पेनिश नेशनल टीम पर ध्यान दे रहे हैं, न कि सिर्फ़ एक खिलाड़ी पर. हमें पता है कि वे हर तरह से खतरनाक हैं. चाहे वह यमाल हो, उनके अटैकिंग खिलाड़ी हों, बॉल पर उनका कब्ज़ा हो, बॉक्स के पास जगह बनाने की उनकी काबिलियत हो या उनका कॉम्बिनेशन प्ले. हमें इन सभी बातों पर ध्यान देना होगा. मुझे नहीं लगता कि हमें सिर्फ़ एक खिलाड़ी पर फोकस करना चाहिए."
लगातार तीसरे विश्व कप के फाइनल में जगह बनाने की कवायद में लगे फ्रांस की आक्रामक रणनीति और अपने दूसरे खिताब को लक्ष्य बनाकर चल रहे स्पेन की 'टिकी टाका' शैली के बीच मंगलवार को होने वाले विश्व कप फुटबॉल के पहले सेमीफाइनल में रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा.
किलियन एम्बाप्पे की अगुवाई वाली फ्रांस की टीम की अग्रिम पंक्ति में कई अच्छे खिलाड़ी हैं और उन्होंने अभी तक मौजूदा टूर्नामेंट में आक्रामक होकर खेलने को तवज्जो दी है.
दूसरी तरफ स्पेन गेंद पर नियंत्रण बनाए रखकर छोटे लेकिन तेज पास देने के लिए मशहूर है जिसे स्पेनिश में 'टिकी टाका' कहा जाता है. अपनी इस रणनीति के तहत स्पेन विरोधी टीम के खिलाड़ियों को मौका नहीं देने और बेहतर तालमेल बनाए रखने की कोशिश करता है. ऐसे में एम्बाप्पे और उनके साथियों के लिए चुनौती आसान नहीं होगी.
फ्रांस ने अभी तक अपने सभी मैच जीते हैं लेकिन अब उसका सामना उस स्पेन से है जिसने उसे विभिन्न प्रतियोगिताओं में पिछले दो मैच में हराया था. यही वजह है कि स्पेन के युवा स्ट्राइकर लामिन यमाल ने कहा कि फ्रांस की टीम को उनकी टीम से डरना चाहिए. लेकिन एम्बाप्पे का मानना है कि उनकी टीम स्पेन से भिड़ने के लिए तैयार है.
उन्होंने क्वार्टर फाइनल के मैच के बाद कहा था,"आराम करने का सिर्फ एक ही तरीका है और वह है जीतना. जब तक हम जीत नहीं जाते, हम चैन से नहीं बैठेंगे. हम जानते हैं कि आगे आने वाली चुनौतियां पहले से भी कहीं ज्यादा कठिन होंगी, लेकिन हम हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं."
फ्रांस ने ग्रुप चरण में सेनेगल, इराक और नॉर्वे के खिलाफ आसान जीत दर्ज की. उसने राउंड ऑफ 32 में स्वीडन को भी उतनी ही आसानी से हराया. इसके बाद उसने राउंड ऑफ 16 में पराग्वे को हराकर अपने खेल का एक अलग ही रूप दिखाया. उसने क्वार्टर फाइनल में मोरक्को पर जीत हासिल करने के लिए प्रभावशाली प्रदर्शन किया.
जहां तक स्पेन की बात है तो उसे पहले मैच में ही कैप वर्दे के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलना पड़ा था. इसके बाद उसने हालांकि लय हासिल की तथा सऊदी अरब और उरुग्वे को हराकर अपने ग्रुप में पहला स्थान हासिल किया.
स्पेन ने राउंड ऑफ 32 में ऑस्ट्रिया को आसानी से हरा दिया. हालांकि राउंड ऑफ 16 और क्वार्टर फाइनल में वह स्थानापन्न खिलाड़ी मिकेल मेरिनो के आखिरी क्षणों में किए गए गोल की मदद से ही क्रमशः पुर्तगाल और बेल्जियम को हरा पाया था. आठवीं बार सेमीफाइनल में पहुंचकर दो बार के विश्व चैंपियन फ्रांस के पास पश्चिम जर्मनी (1982, 1986, 1990) के बाद लगातार तीन विश्व कप फाइनल खेलने वाला दूसरा यूरोपीय देश बनने का मौका है.
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