लियोनेल मेस्सी के लिए फीफा वर्ल्ड कप आंसुओं के साथ खत्म हुआ. जून में 39 साल के हुए मेस्सी, अगले वर्ल्ड कप में खेलेंगे? इसको लेकर दिग्गजों की राय बटी हुई है क्योंकि तब उनकी उम्र 43 साल होगी. एक आउटफील्ड खिलाड़ी के लिए इतनी बड़ी स्टेज पर उस उम्र में खेलना बहुत मुश्किल काम लगता है, भले ही खिलाड़ी का नाम मेस्सी ही क्यों न हो. रविवार से पहले ऐसा लग रहा था कि कतर में अपना पहला खिताब जीतने के चार साल बाद, मेस्सी के लिए अपने दूसरा फीफा वर्ल्ड कप जीतने का मंच तैयार है. लेकिन ऐसा नहीं हो सका.
रविवार से पहले, मेस्सी शानदार फ़ॉर्म में थे. उन्होंने अपने वर्ल्ड कप करियर में कुल 21 गोल किए थे. यह एक रिकॉर्ड था, लेकिन शनिवार को तीसरे स्थान के मैच में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने दो गोल करके उन्हें पीछे छोड़ दिया और कुल 22 गोल का आंकड़ा छू लिया.
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में, मेस्सी ने आठ गोल और चार असिस्ट के साथ अर्जेंटीना को फ़ाइनल तक पहुंचाया. सिर्फ़ एम्बाप्पे उनसे बेहतर थे (10 गोल, चार असिस्ट). मेस्सी दो और गोल और एक असिस्ट करके गोल्डन बूट की दौड़ में उनसे आगे निकल सकते थे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. फ़ाइनल में, मेस्सी ने पहले हाफ़ में सिर्फ़ 15 बार और पूरे मैच के दौरान 54 बार गेंद को छुआ.
गोल्डन बॉल के दावेदार मेसी
फिर भी, अगर कोई यह सोचता कि मेस्सी ही गोल्डन बॉल जीतने के असली हकदार थे, तो यह गलत नहीं होता. उनके फैंस उम्मीद कर रहे थे कि वह अपना तीसरा गोल्डन बॉल जीतकर रिकॉर्ड बनाएंगे.
पूरे टूर्नामेंट में जब भी अर्जेंटीना मुश्किल में फंसी, मेस्सी टीम के लिए मसीहा बनकर उभरे. मुश्किल समय में, जैसे कि राउंड ऑफ़ 16 में जब अर्जेंटीना मिस्र से 2-0 से पीछे थी, उन्होंने न केवल गोल किए, बल्कि राइट फ्लैंक पर उनकी मौजूदगी का मतलब था कि गोल कभी भी हो सकता है.
इंग्लैंड के खिलाफ़ सेमीफाइनल में भी ऐसा ही हुआ. अर्जेंटीना 84वें मिनट तक 1-0 से पीछे थी. फिर मेस्सी ने दो असिस्ट किए, जिससे सात मिनट के भीतर एंज़ो फर्नांडीज और लॉटारो मार्टिनेज ने गोल किए.
इसके बावजूद, स्पेन के कप्तान रोड्री ने टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के तौर पर गोल्डन बॉल जीती. मैनचेस्टर सिटी के इस मिडफील्डर ने स्पेन को उसके दूसरे वर्ल्ड कप खिताब तक पहुंचाया, जबकि घुटने की सर्जरी के कारण आठ महीने तक बाहर रहने के बाद मई 2025 में वापसी के शुरुआती दौर में उन्हें संघर्ष करना पड़ा था.
गोल्डन बॉल जीतने के बाद रोड्री ने कहा,"मेरे लिए यह बहुत मुश्किल समय रहा है. मैं बस चाहता हूं कि नई पीढ़ी मेरे उदाहरण को इस बात के सबूत के तौर पर देखे कि अगर आप गिरते हैं, तो फिर से उठ सकते हैं." "पूरी ज़िंदगी मेरी यही सोच रही है. बेशक, कभी चीजें अच्छी होती हैं, तो कभी बुरी. लेकिन हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए."
कैसे बाजी मार ले गए रोड्री
टूर्नामेंट में रोड्री ने कोई गोल नहीं किया और न ही कोई असिस्ट दिया, लेकिन स्पेन के ज़्यादा समय तक बॉल अपने पास रखने वाले (पज़ेशन-बेस्ड) खेल में उनकी भूमिका बहुत अहम थी. उन्होंने 94% एक्यूरेसी के साथ सबसे ज़्यादा पास (753) पूरे किए. फीफा के आंकड़ों के मुताबिक, वे 1,803 प्ले में शामिल थे, जो इस वर्ल्ड कप में किसी भी अन्य खिलाड़ी से लगभग 200 ज़्यादा है.
फीफा ने एक रिपोर्ट में लिखा,"यह मिडफील्डर 'ला रोजा' (स्पेन की टीम) के लिए मैदान के बीच में लगातार अच्छा खेलता रहा और टीम को अपना दूसरा ग्लोबल खिताब जिताने में मदद की."
"डिफेंस और अटैक के बीच तालमेल बिठाने, सही समय पर दखल देने और सटीक पासिंग ने स्पेन की जीत में बड़ी भूमिका निभाई, खासकर न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में फाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ एक्स्ट्रा टाइम में मिली 1-0 की जीत में."
"फाइनल मैच में, 30 वर्षीय खिलाड़ी ने 105 में से 101 पास पूरे किए, 80 प्रतिशत ड्यूल्स जीते और दो मौके बनाए. वहीं, पूरे टूर्नामेंट के दौरान, डिफेंडर्स की मदद करने में उनके समझदारी भरे खेल की वजह से ही स्पेन अपने आठ मैचों में सिर्फ़ एक गोल खा पाया."
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