फीफा वर्ल्ड कप में अर्जेन्टीना ने इंग्लैंड को 2-1 हरा तो दिया. लेकिन मैच के बाद दोनों देशों के बीच 44 साल पहले हुए युद्ध की कड़वाहट भी सामने आ गई. इसे फ़ीफ़ा के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब अर्जेन्टीनी फ़ुटबॉल संघ और अर्जेन्टीना के फ़ैन्स के ख़िलाफ़ फ़ीफ़ा कार्रवाई कर सकता है. दोनों देशों के बीच 1982 में हुए 74 दिनों के युद्ध में 650 से ज़्यादा अर्जेंटीनी और 250 से ज़्यादा ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे.
मैच के बाद फुल ड्रामा!
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मैच फ़ाइनल सीटी के बाद भी ख़त्म नहीं हुआ... इंग्लैंड के जूड बेलिंघम ने अर्जेन्टीना के बार्को को चपत लगा दी. अर्जेन्टीनी खिलाड़ियों ने इंग्लैंड के गोलकीपर पिकफ़ोर्ड की बॉटल पर पेनल्टी की तैयारी के लिए सीक्रेट चिट पकड़ ली.
फॉकलैंड युद्ध के पोस्टर लहराये
बात हद से आगे तब निकल गई जब अर्जेन्टीनी फ़ैन्स ने 1982 में दोनों देशों के बीच हुए 74 दिनों के फॉकलैंड आइलैंड-युद्ध से जुड़े पोस्टर लहराने शुरू कर दिए.
यही नहीं इसमें अर्जेन्टीनी खिलाड़ी भी शामिल हो गए. उन्होंने फ़ैन्स से लेकर इन पोस्टर्स के साथ पिच पर जश्न मनाया. फ़ाइनल व्हीसल बजने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने "Las Malvinas son Argentinas" लिखा बैनर पकड़कर जश्न मनाया, जिसका मतलब है "फॉकलैंड्स आइलैंड अर्जेंटीना के हैं".
यू.के. के बिज़नेस सेक्रेटरी पीटर काइल ने कहा कि खिलाड़ियों का व्यवहार "पूरी तरह से गलत" था. काइल ने BBC से कहा, "फ़ुटबॉल को राजनीति से अलग रखना चाहिए. असल में, वर्ल्ड कप के मुख्य सिद्धांतों में से एक यह है कि फ़ुटबॉल और राजनीति अलग-अलग हैं. अब यह मामला FIFA का है. मुझे उम्मीद है कि FIFA इसकी अच्छी तरह से जांच करेगा."
फ़ीफ़ा लेगा एक्शन?
फ़ीफ़ा को फ़ैन्स और खिलाड़ियों की ये हरकतें नागवार गुज़री हैं. फ़ीफ़ा फ़ैन्स के साथ अर्जेन्टीना फ़ुटबॉल संघ पर भी एक्शन ले सकता है. मुमकिन है कि फ़ीफा ऐसे पोस्टर लानेवाले फैन्स के अगले मैच में स्टेडियम में एंट्री पर रोक लगा दे. माना जा रहा है कि इन्हें फीफा की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
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