Winter Superfoods: माघ मास को भारतीय परंपरा में खास माना गया है. साल के इस समय ठंड अपने चरम पर होती है. शरीर की पाचन अग्नि कमजोर पड़ने लगती है, जोड़ों में अकड़न, त्वचा का रूखापन, थकान और सर्दी-खांसी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. ऐसे मौसम में हमारे पूर्वजों ने भोजन के जरिए शरीर को संतुलित रखने का जो तरीका बताया, उसका केंद्र है तिल. तिल सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुपरफूड है जो ठंड में शरीर को अंदर से गर्म रखता है.
मकर संक्रांति, तिल द्वादशी, गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों में तिल-गुड़ के लड्डू, तिल की चिक्की या तिल से बने व्यंजन खाने की परंपरा इसी वजह से बनी. धर्म ने इसे पुण्य से जोड़ा, तो आयुर्वेद ने इसे सेहत का आधार बताया दोनों का लक्ष्य एक ही है, शरीर को मौसम के अनुसार सुरक्षित रखना.
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ठंड में क्यों जरूरी है तिल?
आयुर्वेद के अनुसार माघ माह में वात दोष बढ़ जाता है. इसका असर सीधे शरीर के जोड़ों, त्वचा और नर्वस सिस्टम पर पड़ता है. तिल की तासीर गर्म और गुण ऑयली होते हैं, जो बढ़े हुए वात को शांत करते हैं. इसलिए तिल से बना खाना जैसे तिल-गुड़ के लड्डू, तिल की बर्फी या तिल की चटनी सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि मौसमी दवा का काम करता है.
तिल के छह प्रकार के उपयोग का फूड कनेक्शन
धर्म शास्त्रों में माघ माह में तिल को छह तरह से इस्तेमाल करने की बात कही गई है. इनमें से कई सीधे भोजन और पोषण से जुड़े हैं. तिल से बने व्यंजन खाना, तिल मिश्रित जल पीना, तिल का दान (जो सामाजिक पोषण से जुड़ा है.)
इन परंपराओं का मकसद शरीर को एनर्जी देना, पाचन सुधारना और ठंड से होने वाले नुकसान से बचाना है. यही वजह है कि त्योहारों में तिल-गुड़ को मौसमी सुपरफूड माना गया.
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आयुर्वेद में तिल क्यों कहलाता है सर्वदोष हारा?
आयुर्वेद में तिल को ऐसा फूड माना गया है, जो शरीर के कई दोषों को संतुलित करता है. यह खासतौर पर वात और कफ को कंट्रोल करता है. ठंड के मौसम में जब शरीर सुस्त पड़ जाता है, तब तिल एनर्जी देता है और अंदरूनी गर्माहट बनाए रखता है. हालांकि इसकी गर्म तासीर के कारण गर्मियों में इसका सीमित सेवन ही उचित माना गया है.
पोषण का पावरहाउस है तिल
फूड वैल्यू की बात करें तो तिल किसी खजाने से कम नहीं है. इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. नियमित रूप से तिल खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं, दांत और बाल हेल्दी रहते हैं. यह पाचन को बेहतर बनाता है, कब्ज और गैस की समस्या में राहत देता है.
तिल का तेल भी भोजन और बाहरी उपयोग दोनों के लिए फायदेमंद है. इससे बनी सब्जियां स्वाद बढ़ाती हैं, जबकि तेल से मालिश करने पर त्वचा में नमी आती है और ठंड से होने वाला रूखापन दूर होता है.
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धर्म, स्वाद और सेहत तीनों का संगम
माघ माह में तिल का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पूरी तरह फूड साइंस बेस्ड है. हमारे त्योहारों में जो तिल-गुड़ की मिठास है, वह शरीर और मन-दोनों को गर्म रखने का देसी तरीका है. यही कारण है कि माघ में तिल खाना परंपरा भी है और सेहत का स्मार्ट फार्मूला भी.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं