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Parle-G बिस्किट में 'G' का क्या मतलब है? 99% लोगों को नहीं होगा पता, जानिए यहां जवाब

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो इसे 'जीनियस' समझते हैं, तो शायद आप थोड़ा गलत हैं. चलिए आज इस राज से पर्दा उठाते हैं.

Parle-G बिस्किट में 'G' का क्या मतलब है? 99% लोगों को नहीं होगा पता, जानिए यहां जवाब
आजादी के बाद बाजार में कई और कंपनियों ने 'ग्लुको' नाम से बिस्किट बेचना शुरू कर दिया.

Parle G Meaning : बचपन की यादों की बात हो और Parle-G का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. चाय के प्याले में डुबोकर खाया जाने वाला यह बिस्किट आज भी करोड़ों भारतीयों की पहली पसंद है. लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि पार्ले-जी के पैकेट पर छपे इस 'G' का असली मतलब क्या है? अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो इसे 'जीनियस' समझते हैं, तो शायद आप थोड़ा गलत हैं. जी हां, इसका फुल फॉर्म कुछ और है. ऐसे में आइए आज इस राज से पर्दा उठाते हैं...

Parle G की शुरूआत कब हुई

पार्ले कंपनी की शुरुआत साल 1929 में हुई थी, लेकिन बिस्किट बनाने का काम 1939 में शुरू हुआ. उस वक्त इसका नाम 'पार्ले-जी' नहीं, बल्कि 'पार्ले ग्लुको' (Parle Gluco) था. यह बिस्किट अपनी मिठास और एनर्जी के लिए जाना जाता है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तो भारतीय और ब्रिटिश सैनिकों के बीच इसकी जबरदस्त डिमांड थी.

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क्यों बदलना पड़ा नाम?

आजादी के बाद बाजार में कई और कंपनियों ने 'ग्लुको' नाम से बिस्किट बेचना शुरू कर दिया. लोग कंफ्यूज होने लगे कि असली पार्ले वाला बिस्किट कौन सा है. अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कंपनी ने 1980 के दशक में 'पार्ले ग्लुको' का नाम छोटा करके 'Parle-G' कर दिया.

'G' का असली मतलब क्या है?

कंपनी ने जब यह नाम बदला, तब 'G' का मतलब 'Glucose' (ग्लुकोज) ही था. चूंकि यह बिस्किट शरीर को तुरंत एनर्जी देने वाले ग्लुकोज से भरपूर था, इसलिए इसे यह नाम दिया गया.

हालांकि, साल 2000 के आसपास जब कंपनी ने अपना प्रमोशन और विज्ञापन शुरू किया, तब उन्होंने एक टैगलाइन दी— 'G for Genius'. इसके बाद से ही ज्यादातर लोगों के मन में यह बात बैठ गई कि 'G' का मतलब जीनियस होता है. लेकिन कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, शुरुआत में यह सिर्फ 'ग्लुकोज' के लिए ही रखा गया था.

आज भी क्यों है नंबर-1?

महंगाई के दौर में भी पार्ले-जी ने खुद को आम आदमी की पहुंच में रखा है. आज भी 5 रुपये का पैकेट गांव से लेकर शहर तक हर दुकान पर मिल जाता है. यही वजह है कि इसे भारत का अपना बिस्किट कहा जाता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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