सितंबर का मौसम न पूरी तरह गर्म होता है और न ही ठंडा. ऐसे में पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. कई लोग इस समय बाजरा, ज्वार या रागी की रोटी खाने की शुरुआत करते हैं, लेकिन क्या यह सही विकल्प है? दिल्ली सरकार के योग विभाग के पूर्व प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. राम अवतार बताते हैं कि सितंबर के मौसम में कौन सा आटा पेट और सेहत के लिए सबसे बेहतर माना जा सकता है.
सितंबर का महीना बड़ा ही अजीब होता है न! दिन में चिलचिलाती धूप और चिपचिपा पसीना, तो वहीं रात और सुबह के वक्त हल्की सी ठंडक महसूस होने लगती है. मौसम के इसी बदलाव को आयुर्वेद में ऋतु संधि काल कहा जाता है. इस दौरान हमारा पेट और पाचन तंत्र सबसे ज्यादा कमजोर पड़ जाता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि मौसम बदल रहा है तो अब मोटे अनाज यानी मिलेट्स की रोटी शुरू कर देनी चाहिए. लेकिन क्या सीधे बाजरा खाना सही है या फिर ज्वार और रागी बेहतर विकल्प हैं?
सितंबर में शरीर का मिजाज और पाचन की स्थिति
डॉ. राम अवतार बताते हैं कि सितंबर में बारिश जा रही होती है और उमस बनी रहती है. ऐसे वक्त में हमारे शरीर की जठराग्नि यानी खाना पचाने की ताकत काफी मंद पड़ जाती है. लोग जरा सा भारी खाना खाते हैं और गैस, एसिडिटी या पेट फूलने जैसी परेशानी होने लगती है.
इस मौसम में शरीर में पित्त दोष अपने उफान पर होता है. इसलिए बहुत ज्यादा गर्म तासीर वाली चीजों से बचना बेहद जरूरी है. अगर बिना सोचे समझे बहुत रूखा या बहुत गर्म अनाज खा लिया, तो त्वचा से जुड़ी बीमारियां, बवासीर या पेट में जलन की शिकायत बढ़ सकती है.
| सितंबर में कौन सा आटा खाना चाहिए? |
|---|
| ज्वार को अपेक्षाकृत संतुलित विकल्प माना जाता है. |
| बाजरा आमतौर पर सर्दियों में ज्यादा खाया जाता है. |
| रागी पोषक तत्वों से भरपूर है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकती. |
| मौसम और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार आटे का चयन करना चाहिए. |
सितंबर में बाजरा खाने की गलती न करें! एक्सपर्ट ने बताया कौन सी रोटी है सबसे फायदेमंद | Bajra Jowar or Ragi: Which Flour Roti is Best in September Expert Advice
हमने सीधी बात की डॉ. राम अवतार जी से. डॉ. राम अवतार दिल्ली सरकार के योग विभाग के रिटायर्ड प्रोजेक्ट ऑफिसर हैं. उनके पास योग, ध्यान, नाड़ी विज्ञान, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद का 38 साल से भी ज्यादा का लंबा अनुभव है. उन्होंने बताया कि इस बदलते मौसम में खानपान की एक छोटी सी गलती भी वात और पित्त को बिगाड़ सकती है. आइए जानते हैं कि सितंबर के महीने में कौन से आटे की रोटी आपके पेट और सेहत के लिए सबसे मुफीद रहेगी.
बाजरा: क्या सितंबर में इसे खाना शुरू कर दें?
गांवा देहात में अक्सर लोग मौसम बदलते ही बाजरे की रोटी याद करने लगते हैं. लेकिन डॉ. राम अवतार इस पर सख्त हिदायत देते हैं. उनका कहना है कि सितंबर में बाजरा बिल्कुल नहीं खाना चाहिए.
बाजरे की तासीर बहुत ज्यादा गर्म और खुश्क (ड्राई) होती है. यह कड़ाके की ठंड यानी नवंबर और दिसंबर के लिए बेहतरीन अनाज है. अगर आप सितंबर की चिपचिपी गर्मी और उमस में बाजरा खाएंगे, तो शरीर में पित्त और गर्मी बहुत तेजी से बढ़ जाएगी. इससे मुंह में छाले, पेशाब में जलन और पेट की खराबी हो सकती है. इसलिए बाजरे को अभी अपनी रसोई से दूर रखें और सही सर्दी आने का इंतजार करें.
आटों की तासीर-
| आटा | तासीर | फाइबर | सितंबर में उपयोग |
|---|---|---|---|
| बाजरा | गर्म | अच्छा | सीमित |
| रागी | ठंडी | अच्छा | सीमित मात्रा |
| ज्वार | संतुलित | अच्छा | अपेक्षाकृत उपयुक्त |
रागी: क्या यह इस मौसम के लिए सही है?
रागी को पोषण का खजाना माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और फाइबर होता है. वजन घटाने वाले और शुगर के मरीज अक्सर इसे चाव से खाते हैं.
डॉ. साहब के मुताबिक, रागी की तासीर ठंडी मानी जाती है. इसलिए तेज गर्मी में तो यह बहुत अच्छी रहती है. लेकिन सितंबर के बदलते मौसम में, जब सुबह शाम ठंडक शुरू हो जाती है, जरूरत से ज्यादा रागी खाने से कुछ लोगों में वात बढ़ सकता है या बदन दर्द और जोड़ों में जकड़न की दिक्कत आ सकती है. अगर आपको रागी पसंद है, तो इसे बिल्कुल अकेले न खाएं. इसे कभी कभार ही लें या फिर गेहूं के आटे में थोड़ा सा मिलाकर खाएं.
ज्वार: सितंबर के लिए सबसे असरदार और मुफीद अनाज
जब हमने डॉ. राम अवतार से पूछा कि फिर सितंबर में सबसे बढ़िया अनाज कौन सा रहेगा, तो उन्होंने ज्वार का नाम लिया. उनके मुताबिक, इस मौसम में ज्वार की रोटी शरीर के लिए सबसे शांत और संतुलित खुराक है.
ज्वार की तासीर न तो बहुत ज्यादा गर्म होती है और न ही बहुत ज्यादा ठंडी. यह एकदम मतलब न बहुत गर्म और न बहुत ठंडी प्रकृति वाला अनाज है. यह पचने में बहुत हल्का होता है. जब सितंबर में आपकी पाचन क्रिया धीमी होती है, तब ज्वार पेट पर बिल्कुल भी भारी नहीं पड़ता. ज्वार शरीर से एक्स्ट्रा गर्मी और पित्त को शांत करता है. यह एसिडिटी, खट्टी डकार और गैस की समस्या से तुरंत राहत दिलाता है. जो लोग वजन कंट्रोल करना चाहते हैं या जिनका शुगर लेवल ऊपर नीचे रहता है, उनके लिए ज्वार में मौजूद फाइबर रामबाण का काम करता है.
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खास सुझाव
रोटी बनाने और खाने के कुछ जरूरी नियम जिनका पालन हर किसी को करना चाहिए:
सीधा मोटा आटा न गूंथें: अगर आप पहली बार ज्वार शुरू कर रहे हैं, तो सीधे सौ फीसदी ज्वार की रोटी पचाने में समय लग सकता है. बेहतर होगा कि आप 70 प्रतिशत गेहूं के आटे में 30 प्रतिशत ज्वार का आटा मिलाकर रोटी बनाएं. फिर धीरे धीरे ज्वार की मात्रा बढ़ाएं.
घी का इस्तेमाल जरूर करें: मिलेट्स सूखे होते हैं. इसलिए जब भी ज्वार की रोटी बनाएं, उस पर थोड़ा सा शुद्ध देशी घी जरूर लगाएं. घी लगाने से अनाज का रूखापन खत्म होता है और आंतों में खुश्की नहीं आती.
पानी सही मात्रा में पिएं: मोटे अनाज का पूरा फायदा तभी मिलता है जब आप दिनभर में घूंट घूंट करके पर्याप्त पानी पीते रहें. इससे फाइबर आसानी से पच जाता है और कब्ज की शिकायत नहीं होती.
अगर आप सितंबर के इस बदलते मौसम में मौसमी बीमारियों, गैस और भारीपन से बचना चाहते हैं, तो बाजरे को अभी अलविदा कहें और अपनी थाली में ज्वार की रोटी को खुशी खुशी शामिल करें.
FAQ
सितंबर में कौन सा आटा खाना चाहिए?
मौसम, पाचन क्षमता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के आधार पर आटे का चयन करना चाहिए.
क्या सितंबर में बाजरा खाना सही है?
कुछ विशेषज्ञ बाजरे को ठंड के मौसम में अधिक उपयुक्त मानते हैं.
ज्वार की रोटी के क्या फायदे हैं?
ज्वार में फाइबर होता है और इसे पचने में अपेक्षाकृत हल्का माना जाता है.
रागी कब खानी चाहिए?
रागी एक पौष्टिक अनाज है, लेकिन इसकी उपयुक्तता व्यक्ति की जरूरतों और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है.
क्या डायबिटीज वाले लोग ज्वार की रोटी खा सकते हैं?
व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है.
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