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RO का पानी पीना फायदेमंद है या नुकसानदायक? WHO रिसर्च, सही TDS और सेहत पर असर जानिए

क्या आपके घर में भी RO का पानी पीया जाता है? जानिए RO Water के फायदे और नुकसान, WHO की रिपोर्ट डिमिनरलाइज्ड पानी के बारे में क्या कहती है, पीने के पानी का सही TDS कितना होना चाहिए और कब RO आपकी सेहत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक साबित हो सकता है.

RO का पानी पीना फायदेमंद है या नुकसानदायक? WHO रिसर्च, सही TDS और सेहत पर असर जानिए
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आज के समय में RO वाटर प्यूरीफायर लगभग हर दूसरे घर में दिखाई देता है. साफ और सुरक्षित पानी के लिए लोग इसे सबसे भरोसेमंद विकल्प मानते हैं. लेकिन क्या RO का पानी हमेशा सेहत के लिए फायदेमंद होता है? या फिर कुछ मामलों में यह पानी जरूरी मिनरल्स की कमी का कारण भी बन सकता है? आइए समझते हैं RO पानी की पूरी सच्चाई, इसके फायदे, संभावित नुकसान और पीने के पानी का सही TDS कितना होना चाहिए.

आरओ काम कैसे करता है?

आरओ का पूरा नाम है 'रिवर्स ऑस्मोसिस' (Reverse Osmosis). इसे बहुत भारी-भरकम साइंस समझने की जरूरत नहीं है, बस ऐसे समझिए कि इसमें एक बहुत बारीक जाली यानी झिल्ली (Membrane) लगी होती है. जब पानी इस झिल्ली से बहुत तेज दबाव के साथ गुजरता है, तो पानी में घुली हुई गंदगी, मिट्टी, जंग और भारी धातुएं उस तरफ छूट जाती हैं और बिल्कुल साफ पानी दूसरी तरफ निकल आता है.

यह मशीन इतनी बारीक होती है कि पानी में घुले लेड, आर्सेनिक, पारा, फ्लोराइड और खतरनाक बैक्टीरिया को भी बाहर निकाल फेंकती है. यह इसका सबसे बड़ा काम है.

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आरओ पानी पीने के असली फायदे क्या हैं?

अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां जमीन का पानी बहुत खराब है या फैक्ट्रियों का कचरा पानी में मिलता है, तो आरओ बहुत काम का है. यहां जानें उसके बड़े फायदे- 

भारी धातुओं से बचाव: जमीन के पानी में अक्सर सीसा (Lead), आर्सेनिक और क्लोरीन जैसे खतरनाक तत्व घुले होते हैं. ये तत्व लंबे समय में कैंसर या किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं. आरओ इन जहरीली धातुओं को लगभग 95 से 99 फीसद तक छानकर बाहर कर देता है.
पेट की बीमारियों से छुट्टी: टाइफाइड, पीलिया (हेपेटाइटिस), कालरा और पेचिश जैसी बीमारियां गंदे पानी के बैक्टीरिया और वायरस से ही फैलती हैं. आरओ इन्हें रोककर आपको पेट के गंभीर संक्रमण से बचाता है.
पानी का स्वाद और गंध सुधारना: कई जगह बोरवेल का पानी इतना खारा या बदबूदार होता है कि पिया ही नहीं जाता. आरओ पानी के भारीपन और बदबू को खत्म करके उसे मीठा और पीने लायक बना देता है.
पथरी की समस्या में राहत: बहुत ज्यादा खारा पानी पीने से कई लोगों के शरीर में कैल्शियम ऑक्सालेट की पथरी (Kidney Stone) बनने लगती है. आरओ इस खतरे को काफी हद तक कम करता है.

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आरओ के संभाव‍ित नुकसान क्या हैं?

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि RO सिस्टम पानी के साथ कुछ जरूरी मिनरल्स की मात्रा भी कम कर सकता है. इसी विषय पर WHO ने भी डिमिनरलाइज्ड पानी को लेकर अध्ययन प्रकाशित किया है. आरओ की मशीन इतनी समझदार नहीं होती कि वो ये फर्क कर सके कि पानी में क्या बुरा है और क्या अच्छा. गंदगी को साफ करते-करते वो पानी में मौजूद जरूरी कुदरती मिनरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और सोडियम को भी पूरी तरह से बाहर बहा देती है.

यानी मशीन से जो पानी निकलता है, वो साफ तो होता है, लेकिन पोषक तत्वों के मामले में पूरी तरह खाली या 'बहुत कम मिनरल वाला या डिमिनरलाइज्ड पानी बन सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिसर्च क्या कहती है?

यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मिनरल्स रहित यानी डिमिनरलाइज्ड पानी पर एक बहुत विस्तार से रिसर्च पेपर छापा था. इस रिपोर्ट का नाम था 'हेल्थ रिस्क फ्रॉम ड्रिंकिंग डिमिनरलाइज्ड वाटर' (Health Risks from Drinking Demineralised Water).

डब्ल्यूएचओ की इस रिसर्च में साफ चेतावनी दी गई थी कि लगातार ऐसा पानी पीने से जिसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम न हों, शरीर पर बेहद बुरा असर पड़ता है:

शरीर को जरूरी खनिज न मिलना: हम जो पानी पीते हैं, उससे शरीर की रोजमर्रा की कैल्शियम और मैग्नीशियम की जरूरत का 15 से 20 फीसद हिस्सा पूरा होता है. जब पानी में ये तत्व नहीं होते, तो शरीर में इनकी कमी होने लगती है.
हड्डियों और जोड़ों का दर्द: जब पानी से कैल्शियम नहीं मिलता, तो शरीर अपना काम चलाने के लिए हमारी हड्डियों से कैल्शियम खींचना शुरु कर देता है. नतीजा यह होता है कि कम उम्र में ही घुटनों में दर्द, कमर दर्द और आस्टियोपोरोसिस (हड्डियां कमजोर होना) जैसी समस्याएं घेर लेती हैं.
दिल की सेहत पर खतरा: मैग्नीशियम हमारे दिल की धड़कन को सामान्य रखने के लिए बहुत जरूरी है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मैग्नीशियम की कमी से दिल की बीमारियों और अचानक दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
प्यास न बुझना और ज्यादा पेशाब आना: मिनरल रहित पानी पीने से शरीर की प्यास पूरी तरह नहीं बुझती और यह शरीर के इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बिगाड़ देता है.

पानी का टीडीएस (TDS) कितना होना चाहिए?

टीडीएस का मतलब होता है 'टोटल डिसाल्व्ड सॉलिड्स' (Total Dissolved Solids). आसान भाषा में कहें तो पानी में घुले हुए कुल ठोस कण.

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार:

  • 50 से कम TDS: यह पानी शरीर के लिए बहुत खराब है, इसे एसिडिक पानी माना जाता है.
  • 100 से 300 TDS: यह पीने के लिए सबसे बढ़िया और सेहतमंद पानी है. इसमें पर्याप्त मिनरल्स होते हैं.
  • 300 से 500 TDS: यह पानी भी पीने के लिए ठीक-ठाक माना जाता है.
  • 500 से ज्यादा TDS: ऐसा पानी बहुत खारा होता है और इसे फिल्टर करने के लिए ही आरओ की जरूरत होती है.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी अपनी एक रिपोर्ट में भारत सरकार को निर्देश दिया था कि जिन इलाकों में पानी का टीडीएस 500 mg/l से कम है, वहां आरओ के इस्तमाल पर रोक लगनी चाहिए क्योंकि इससे न सिर्फ पानी की भारी बर्बादी होती है बल्कि लोगों की सेहत भी खराब हो रही है.

आरओ के पानी से होने वाले नुकसान से कैसे बचें?

अगर आपके इलाके में पानी बहुत ज्यादा खारा है और आरओ लगवाना मजबूरी है, तो इन बातों पर ध्यान देकर आप अपनी सेहत बचा सकते हैं:

टीडीएस कंट्रोलर सही सेट करवाएं: अपने आरओ मैकेनिक से कहें कि टीडीएस को कभी भी 50-60 पर सेट न करे. इसे कम से कम 150 से 250 के बीच रखें.
मिनरल कार्ट्रिज या एल्कलाइन फिल्टर लगाएं: आजकल आरओ में अलग से 'मिनरलाइज्ड' या 'एल्कलाइन' फिल्टर लगते हैं, जो पानी छनने के बाद उसमें दोबारा जरूरी कैल्शियम और मैग्नीशियम मिला देते हैं.
मटके का इस्तमाल करें: आरओ से निकले पानी को मिट्टी के घड़े यानी मटके में भरकर रखें. मिट्टी पानी के एसिडिक नेचर को खत्म करके उसमें कुदरती ठंडक और मिनरल्स जोड़ देती है.
खाने में मिनरल्स बढ़ाएं: अगर मजबूरी में कम टीडीएस का पानी पी रहे हैं, तो अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दही, पनीर, तिल, बादाम और केला जैसी चीजें शामिल करें ताकि शरीर में कैल्शियम-मैग्नीशियम की कमी न हो.

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सीधा निचोड़: 

RO कोई बुरी तकनीक नहीं है. इसका उद्देश्य दूषित और अधिक TDS वाले पानी को सुरक्षित बनाना है. हालांकि जिन इलाकों में पानी की गुणवत्ता पहले से अच्छी है और TDS सामान्य सीमा में है, वहां RO की जरूरत हर बार नहीं होती. पानी की जांच के आधार पर सही फिल्ट्रेशन तकनीक चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है.

FAQs-

RO का पानी कितना TDS होना चाहिए?
विशेषज्ञ आमतौर पर 100-300 TDS के बीच पानी को पीने के लिए उपयुक्त मानते हैं.

क्या RO पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम कम हो जाते हैं?
RO प्रक्रिया घुले हुए कई खनिजों को कम कर सकती है, इसलिए कुछ सिस्टम में मिनरल कार्ट्रिज का उपयोग किया जाता है.

क्या हर घर में RO लगवाना जरूरी है?
नहीं, यह पानी के स्रोत और TDS स्तर पर निर्भर करता है.

क्या कम TDS वाला पानी नुकसान पहुंचा सकता है?
बहुत कम TDS वाले पानी को लेकर विभिन्न अध्ययनों में चिंताएं जताई गई हैं, इसलिए संतुलित स्तर बनाए रखना बेहतर माना जाता है.

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