मुंबई में आयोजित NDTV YUVA 2026 के मंच पर मशहूर हेल्थ इंफ्लुएंसर और Food Pharmer के नाम से पहचान रखने वाले रेवंत हिमातसिंका ने युवाओं से संवाद किया. उन्होंने मंच पर फूड लेबल्स, छिपी हुई चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को लेकर युवाओं से बातचीत की. रेवंत ने बताया कि आज के दौर में सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि खाने की गुणवत्ता और उसमें मौजूद सामग्री को समझना भी बहुत ही जरूरी है. उन्होंने कहा पैकेज्ड फूड खरीदने से पहले उसके इंग्रीडिएंट्स को पढ़ने की आदत डालें और अपनी हेल्थ को जरूर प्राथमिकता दें. यहां जानते हैं मंच पर फूड प्रोडक्ट्स को लेकर उनकी ओर से शेयर की गई जरूरी जानकारी-
देश में है हेल्थ एजुकेटेड की जरूरत
मंच पर Food Pharmer रेवंत ने कहा कि हमारे देश में लोग पढ़े-लिखे तो हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग हेल्थ एजुकेटेड नहीं हैं. यही वजह है कि वे पैकेट के सामने लिखे दावों पर भरोसा कर लेते हैं, जबकि असल जानकारी पीछे दिए गए इंग्रीडिएंट्स में छिपी होती है.
कभी भी 'हाई प्रोटीन' लेवल देखकर न खरीदें प्रोडक्ट
रेवंत ने कहा कि अमेरिका में हमारे देश की तुलना में ज्यादा पैकेज्ड फूड खाया जाता है, वहां लोग हाई प्रोटीन देखकर चीजें खरीदकर खाते हैं, लेकिन जब इंग्रीडिएंट चेक करेंगे, तो असल में उनमें सिर्फ 2-3 ग्राम प्रोटीन ही मौजूद होता है. ऐसे में लोगों को लगता है कि वे हेल्दी खाना खा रहे हैं, जबकि हकीकत कुछ और होती है.
सिर्फ MRP देखना नहीं है सही
रेवंत ने कहा कि फूड पैकेट के फ्रंट पैक पर क्या लिखा है, सिर्फ उसे देखकर फैसला मत कीजिए. लोग अक्सर सिर्फ MRP, वेज या नॉनवेज का निशान देखते हैं, लेकिन सबसे जरूरी है इंग्रीडिएंट्स और न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना जरूरी होता है. इसी के आधार पर प्रोडक्ट्स खरीदें.
सबसे खतरनाक फूड क्या होता है?
इस सवाल का जवाब देते हुए फूड फार्मर ने कहा कि अगर किसी प्रोडक्ट में शुगर की मात्रा ज्यादा है, तो उसे नियमित रूप से खाने से बचना चाहिए. उनका कहना था कि लोगों को ये समझने की जरूरत है कि पैकेजिंग और मार्केटिंग हमेशा हेल्थ का सही पैमाना नहीं होती.
उन्होंने कहा कि उनकी मुहिम का मकसद लोगों को सिर्फ हेल्दी खाना खाने के लिए कहना नहीं है, बल्कि ये सुनिश्चित करना है कि जो भी खाएं, वह सुरक्षित हो. उन्होंने कहा, 'हम यह नहीं कहते कि हर समय सिर्फ हेल्दी चीजें ही खाइए, लेकिन जो भी खाएं, वह सेफ होना चाहिए.'
3 गुना ज्यादा होता है हमारे देश के ड्रिंक में चीनी
रेवंत ने दावा किया कि हमारे देश में बिकने वाले कुछ मशहूर और ब्रांडेड सॉफ्ट ड्रिंक्स में यूरोप की तुलना में काफी ज्यादा चीनी होती है. मंच पर उन्होंने कहा कि भारत में मिलने वाले कोल्ड-ड्रिंक्स में यूरोप की तुलना में 3 गुना ज्यादा चीनी होती है. इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं, कमजोर नियम, कीमत को लेकर सेंसिटिविटी और लोगों में जागरुकता की कमी है.
उनके मुताबिक, जब तक कंज्यूमर लेबल पढ़ना और सवाल पूछना नहीं सीखेंगे, तब तक कंपनियों पर बेहतर उत्पाद देने का दबाव नहीं बनेगा.
फिर लोगों को क्या खाना चाहिए?
इस सवाल का जवाब देते हुए रेवंत हिमातसिंका ने कहा, लोगों को ज्यादा से ज्यादा नैचुरल और कम प्रोसेस्ड डाइट लेनी चाहिए. प्रोटीन के लिए टोफू, पनीर और घर का बना पारंपरिक ऑप्शन बेहतर होता है. उनका मानना है कि मल्टीग्रेन या फिर हाई-फाइबर का दावा करने वाले ब्रेड्स की तुलना में घर की बनी रोटी ज्यादा हेल्दी ऑप्शन होता है.
पेरेंट्स के लिए भी शेयर किया मैसेज
NDTV YUVA के मंच से उन्होंने पेरेंट्स के लिए भी खास मैसेज दिया. उन्होंने कहा कि कभी भी अपने बच्चों के टिफिन में नूड्स, ब्रेड जैसी पैकेज फूड्स न दें. उन्हें घर का बना खाना दें. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को इंस्टेंट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से जितना हो सके दूर रखना चाहिए.
चीनी जहर है या नहीं?
रेवंत इस सवाल पर कहा कि चीनी को पूरी तरह जहर कहना सही नहीं होगा. उन्होंने कहा कि सीमित मात्रा में चीनी का सेवन किया जा सकता है और वह खुद भी चीनी लेते हैं. समस्या तब पैदा होती है जब लोग बिना जाने हर दिन बड़ी मात्रा में छिपी हुई चीनी का सेवन करने लगते हैं.
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