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बीकानेरी भुजिया से केर-सांगरी तक, राजस्थान के ये 2 स्वाद GI टैग के साथ बन चुके हैं खास पहचान

GI-Tagged Foods Of Rajasthan: राजस्थान के खानपान की पहचान सिर्फ दाल-बाटी तक सीमित नहीं है. राज्य के दो ऐसे स्वाद भी हैं, जिन्हें GI टैग मिल चुका है. इनमें एक है दुनिया भर में मशहूर बीकानेरी भुजिया और दूसरा है हाल ही में GI टैग पाने वाला केर-सांगरी.

बीकानेरी भुजिया से केर-सांगरी तक, राजस्थान के ये 2 स्वाद GI टैग के साथ बन चुके हैं खास पहचान
राजस्थान के ये 2 मशहूर फूड, जिन्‍हें मिला है GI टैग.
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राजस्थान का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में दाल-बाटी, चूरमा और शाही ठाठ-बाट की तस्वीर उभरती है. लेकिन इस राज्य के कुछ ऐसे स्वाद भी हैं, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. यही वजह है कि राजस्थान के दो खास फूड प्रोडक्ट्स को GI टैग मिल चुका है. इनमें एक है बीकानेरी भुजिया, जिसका स्वाद देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया तक पहुंच चुका है.

दूसरा है केर-सांगरी, जो सदियों से राजस्थान की रसोई का हिस्सा रहा है. GI टैग मिलने के बाद इसकी पहचान को और मजबूती मिली है. दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों स्वादों की कहानी राजस्थान की मिट्टी, मौसम और यहां के खानपान से गहराई से जुड़ी हुई है.

आखिर क्या होता है GI टैग? (What Is A GI Tag?)

GI यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग किसी ऐसी चीज को दिया जाता है, जिसकी खास पहचान उसके इलाके से जुड़ी होती है. आसान भाषा में कहें तो अगर किसी प्रोडक्ट का स्वाद, गुणवत्ता, बनाने का तरीका या उसकी पहचान किसी खास जगह की वजह से मशहूर है, तो उसे GI टैग दिया जा सकता है.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि उस नाम का इस्तेमाल कोई भी कहीं भी बैठकर नहीं कर सकता. उदाहरण के लिए, हर भुजिया को "बीकानेरी भुजिया" नहीं कहा जा सकता और हर चाय "दार्जिलिंग चाय" नहीं बन सकती. GI टैग उस प्रोडक्ट की पहचान को कानूनी सुरक्षा देता है और यह भी बताता है कि उसकी खासियत उसके मूल इलाके से जुड़ी हुई है.

बीकानेरी भुजिया: दुनिया तक पहुंचा राजस्थान का स्वाद (Bikaneri Bhujia: Rajasthan's Signature Snack)

बीकानेरी भुजिया शायद राजस्थान का सबसे मशहूर स्नैक है. बेसन और खास मसालों से बनने वाली यह भुजिया आज देश के लगभग हर शहर में बिकती है. विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी इसकी काफी मांग है. लेकिन हर भुजिया को बीकानेरी भुजिया नहीं कहा जा सकता. इसका स्वाद, बनाने का तरीका और बीकानेर से जुड़ी पहचान ही इसे खास बनाती है. यही वजह है कि इसे GI टैग दिया गया था और यह राजस्थान के सबसे चर्चित GI टैग फूड्स में गिनी जाती है.

क्या है केर-सांगरी? (What Is Ker Sangri?)

अगर आपने कभी पारंपरिक राजस्थानी थाली खाई है, तो शायद केर-सांगरी का नाम जरूर सुना होगा. यह राजस्थान के शुष्क इलाकों में मिलने वाले दो खास पौधों केर और सांगरी से तैयार की जाने वाली डिश है. कम पानी वाले रेगिस्तानी इलाकों में भी यह आसानी से उपलब्ध होती है, इसलिए सदियों से स्थानीय खानपान का हिस्सा रही है.

दिलचस्प बात यह है कि जिस डिश को राजस्थान के लोग वर्षों से अपने खाने में शामिल करते आ रहे थे, उसे 2025 में GI टैग मिला. इसके बाद केर-सांगरी की पहचान सिर्फ एक पारंपरिक सब्जी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह राजस्थान की फूड विरासत का आधिकारिक हिस्सा बन गई.

बीकानेरी भुजिया और केर-सांगरी की कहानी सिर्फ स्वाद की नहीं, बल्कि पहचान की भी है. GI टैग यह इंश्योर करता है कि किसी इलाके की खास चीज उसी जगह के नाम से जानी जाए और उसकी साख बनी रहे. बीकानेरी भुजिया को मिले GI टैग ने उसे एक अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में काफी मदद की है. उम्मीद है कि केर-सांगरी को GI टैग मिलने से इसे भी काफी फायदा होगा, क्योंकि ये टैग सिर्फ एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि स्थानीय स्वादों को दुनिया तक पहुंचाने का एक मजबूत जरिया भी है.

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