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पितृपक्ष के 16 दिन सात्विक भोजन करने से क्या होगा? जानें क्या खाएं और सेहत को होने वाले फायदे

पितृपक्ष में लगातार 16 दिनों तक सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है. क्या जानते हैं सात्विक भोजन करने से शरीर को क्या फायदे मिलते हैं?

पितृपक्ष के 16 दिन सात्विक भोजन करने से क्या होगा? जानें क्या खाएं और सेहत को होने वाले फायदे
Satvik Food for 16 days : 16 दिनों तक सात्विक फूड खाने से क्या होता है?

पितृपक्ष को आमतौर पर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण के समय के रूप में देखा जाता है. इस दौरान कई परिवार सात्विक और सादा भोजन करने, तामसिक खाद्य पदार्थों से दूरी रखने और खान-पान में संयम बरतने की परंपरा का पालन करते हैं. हालांकि, धार्मिक मान्यताओं से अलग देखें तो सीमित अवधि के लिए हल्का, संतुलित और घर का बना भोजन अपनाना शरीर के लिए भी फायदेमंद हो सकता है.

आकाश हेल्थकेयर सुपरस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल हॉस्पिटल की डायटीशियन गिन्नी कालरा का कहना है कि पितृपक्ष के दौरान भोजन में संयम रखने का फायदा तभी मिलेगा, जब सात्विक भोजन का मतलब सिर्फ कुछ खाद्य पदार्थों को छोड़ना नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक डाइट अपनाना हो. ज्यादा तला-भुना, अत्यधिक मीठा, बहुत अधिक नमक और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कम करने से रोजाना की कैलोरी और अनावश्यक वसा का सेवन घट सकता है.

सात्विक भोजन में क्या शामिल करें?

सात्विक भोजन में आमतौर पर ताजे फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, दूध-दही जैसे खाद्य पदार्थ और सीमित मात्रा में स्वस्थ वसा शामिल की जा सकती है. भोजन को बहुत अधिक मसालेदार या तला हुआ रखने के बजाय कम तेल में पकाना बेहतर विकल्प हो सकता है.

फल और सब्जियों से मिलने वाला फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी है. वहीं दाल, दूध, दही, पनीर और अन्य पौष्टिक स्रोतों से पर्याप्त प्रोटीन लिया जा सकता है. साबुत अनाज लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं, जिससे बार-बार अनावश्यक स्नैकिंग से बचा जा सकता है.

तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करने का फायदा

पितृपक्ष के दौरान यदि व्यक्ति समोसे, पकौड़े, मिठाइयां, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करता है, तो यह कुल कैलोरी, अतिरिक्त चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा के सेवन को कम करने में मदद कर सकता है.

हालांकि, सिर्फ 16 दिन सात्विक भोजन करने से किसी बीमारी का इलाज होने या शरीर के डिटॉक्स होने का दावा वैज्ञानिक रूप से नहीं किया जाना चाहिए. इसका वास्तविक लाभ एक स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित करने से जुड़ा हो सकता है.

क्या कहती हैं डायटीशियन?

डायटीशियन गिन्नी का कहना है कि पितृपक्ष के दौरान सात्विक भोजन को यदि संतुलित डाइट के रूप में अपनाया जाए तो यह शरीर के लिए सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो सकता है. ताजे फल और सब्जियों, साबुत अनाज, दालों और पर्याप्त प्रोटीन को डाइट में शामिल करने के साथ तले-भुने और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करना पाचन और वजन प्रबंधन के लिए मददगार हो सकता है. हालांकि, सात्विक भोजन का मतलब केवल भोजन की कुछ श्रेणियों को छोड़ना नहीं है. शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना भी उतना ही जरूरी है.

सात्विक भोजन करते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

सात्विक भोजन अपनाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि डाइट बहुत अधिक रिस्ट्रिक्ट न हो. लंबे समय तक पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन B12 या अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. उपवास या बहुत कम भोजन करने की स्थिति में कमजोरी, चक्कर या ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव की समस्या भी हो सकती है.

डायबिटीज, किडनी की बीमारी, गर्भावस्था या किसी अन्य मेडिकल स्थिति से जूझ रहे लोगों को अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लेनी चाहिए.

पितृपक्ष की परंपराओं को निभाते हुए यदि इन 16 दिनों को संयमित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित नींद और शारीरिक सक्रियता की आदत बनाने के अवसर के रूप में देखा जाए, तो इसका फायदा केवल इन 16 दिनों तक सीमित न रहकर लंबे समय तक जारी रह सकता है.

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