Pahadi Phanu Dal Recipe: मैं पहाड़ का रहने वाला हूं, लेकिन आजकल नोएडा में जॉब करता हूं. शहर की तेज रफ्तार जिंदगी में सब कुछ है, बड़ी-बड़ी इमारतें, शानदार रेस्टोरेंट और तरह-तरह का खाना. लेकिन, इन सबके बीच एक चीज हमेशा मिस होती है- घर का स्वाद. खासकर मेरी मां के हाथों से बनी फाणू दाल, जो कुल्थी (गहत) से बनती है. जब भी मैं यहां अरहर दाल बनाता हूं, उसकी एक-एक कौर मुझे अपने गांव की याद दिला देती है. मां की बनाई वो सादी सी दाल, जिसमें न ज्यादा मसाले होते थे और न ही कोई खास तामझाम, फिर भी उसका स्वाद ऐसा कि आज भी किसी 5-स्टार होटल का खाना उसके सामने फीका लगता है.
मां की रसोई और वो खास खुशबू
हमारे पहाड़ में खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा होता है. ठंडी हवाओं के बीच जब मां रसोई में फाणू बनाती थीं, तो उसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती थी. लकड़ी के चूल्हे पर धीरे-धीरे पकती दाल का स्वाद ही कुछ और होता था. आज गैस स्टोव पर वही स्वाद लाना मुश्किल लगता है, लेकिन यादें आज भी वैसी ही ताजा हैं.
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क्या है फाणू दाल?
फाणू उत्तराखंड की एक पारंपरिक डिश है, जो कुल्थी यानी गहत की दाल से बनती है. यह दाल न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती है खासतौर पर सर्दियों में.
मां की स्टाइल में फाणू बनाने की रेसिपी | A Recipe for Making Phanu - Mom's Style
अगर आप भी इस पहाड़ी स्वाद को घर पर ट्राई करना चाहते हैं, तो मैं वही आसान रेसिपी बता रहा हूं जो मेरी मां बनाया करती हैं:
सामग्री:
गहत (कुल्थी) दाल - 1 कप
लहसुन - 4-5 कलियां
अदरक - 1 छोटा टुकड़ा
जीरा - 1 छोटा चम्मच
हल्दी - आधा छोटा चम्मच
नमक - स्वाद अनुसार
सरसों का तेल - 1 बड़ा चम्मच
बनाने का तरीका:
- सबसे पहले दाल को रातभर भिगो दें. फिर इसे कुकर में हल्दी और नमक के साथ अच्छे से पका लें. इसके बाद दाल को हल्का सा मसल लें या पीस लें, जिससे उसका टेक्सचर गाढ़ा हो जाए.
- अब कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करें, उसमें जीरा, लहसुन और अदरक डालकर भूनें. जब खुशबू आने लगे, तो इसमें पकी हुई दाल डाल दें. धीमी आंच पर 5-10 मिनट तक पकने दें, ताकि सारे फ्लेवर अच्छे से मिल जाएं.

सादगी में छुपा असली स्वाद
फाणू की सबसे खास बात यही है कि इसमें ज्यादा मसाले नहीं होते. फिर भी इसका स्वाद इतना गहरा और संतोष देने वाला होता है कि एक बार खाने के बाद आप इसे भूल नहीं पाएंगे.
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आज भी दिल वहीं अटका है
नोएडा में बैठकर जब भी मैं ये दाल बनाता हूं, तो हर कौर के साथ बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. मां की वो सादगी, उनका प्यार और पहाड़ की वो ठंडी हवा सब कुछ जैसे एक प्लेट में वापस आ जाता है.
कुछ स्वाद ऐसे होते हैं, जो सिर्फ जीभ से नहीं बल्कि दिल से जुड़े होते हैं. मेरे लिए फाणू सिर्फ एक दाल नहीं, बल्कि मेरी जड़ों से जुड़ा एक एहसास है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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