न्यूयॉर्क:
कई लोगों को सोना बहुत पसंद होता है, तो कई काम में व्यस्त रहने के कारण ढंग से सो नहीं पाते हैं। जो लोग नियमित समय के अनुसार कम सोते हैं और नींद पूरी नहीं कर पाते हैं, उन्हें कई शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। ज़्यादा समय तक काम करने वाले लोगों और नींद को कम समय देने वाले लोगों के लिए यह बात खतरनाक साबित हो सकती है। उनकी यह आदत उनके दिल के स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक है।
एक नए अध्ययन से पता चला है कि “दमकल व आपात चिकित्सा सेवाओं, रेजिडेंट चिकित्सकों तथा अधिक तनाव वाला काम करने वाले अन्य लोगों को 24 घंटे की शिफ्ट में काम करने के लिए कहा जाता है, जिससे उन्हें सोने का कम समय मिलता है”। जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन में अध्ययन के मुख्य लेखक डैनिएल कुएटिंग ने कहा कि “पहली बार, हमने यह खुलासा किया है कि 24 घंटे की शिफ्ट के संदर्भ में कम नींद लेने वाले लोगों के कार्डियक कॉन्ट्रैक्टिलिटी (दिल के सिकुड़ने की स्वाभाविक क्षमता), रक्तचाप तथा हार्ट रेट में अस्वाभाविक बढ़ोतरी होती है”।
अध्ययन में कुएटिंग तथा उनके साथियों ने औसतन 31.6 वर्ष की आयु वर्ग के 20 स्वस्थ रेडियोलॉजिस्ट को शामिल किया, जिनमें 19 पुरुष व एक महिला थी। औसत तीन घंटे की नींद लेने वाले हर प्रतिभागी का 24 घंटे की शिफ्ट से पहले और बाद में कार्डियो वस्कुलर मैग्नेटिक रिजोनांस कराया गया।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के रक्त व मूत्र के नमूने भी इकट्ठा किए और रक्तचाप तथा हार्ट रेट को मापा। अल्पकालिक तौर पर कम नींद लेने वाले प्रतिभागियों का रक्तचाप तथा हार्ट रेट अधिक पाया गया। उन्होंने कहा कि “यह निष्कर्ष, यह समझने में हमारी मदद करेगा कि काम का भार तथा शिफ्ट के घंटे किस प्रकार लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं”।
यह निष्कर्ष शिकागो में रेडियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका (आरएसएनए) की सालाना बैठक में पेश किए गए हैं।
(इनपुट्स आईएएनएस से)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
एक नए अध्ययन से पता चला है कि “दमकल व आपात चिकित्सा सेवाओं, रेजिडेंट चिकित्सकों तथा अधिक तनाव वाला काम करने वाले अन्य लोगों को 24 घंटे की शिफ्ट में काम करने के लिए कहा जाता है, जिससे उन्हें सोने का कम समय मिलता है”। जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन में अध्ययन के मुख्य लेखक डैनिएल कुएटिंग ने कहा कि “पहली बार, हमने यह खुलासा किया है कि 24 घंटे की शिफ्ट के संदर्भ में कम नींद लेने वाले लोगों के कार्डियक कॉन्ट्रैक्टिलिटी (दिल के सिकुड़ने की स्वाभाविक क्षमता), रक्तचाप तथा हार्ट रेट में अस्वाभाविक बढ़ोतरी होती है”।
अध्ययन में कुएटिंग तथा उनके साथियों ने औसतन 31.6 वर्ष की आयु वर्ग के 20 स्वस्थ रेडियोलॉजिस्ट को शामिल किया, जिनमें 19 पुरुष व एक महिला थी। औसत तीन घंटे की नींद लेने वाले हर प्रतिभागी का 24 घंटे की शिफ्ट से पहले और बाद में कार्डियो वस्कुलर मैग्नेटिक रिजोनांस कराया गया।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के रक्त व मूत्र के नमूने भी इकट्ठा किए और रक्तचाप तथा हार्ट रेट को मापा। अल्पकालिक तौर पर कम नींद लेने वाले प्रतिभागियों का रक्तचाप तथा हार्ट रेट अधिक पाया गया। उन्होंने कहा कि “यह निष्कर्ष, यह समझने में हमारी मदद करेगा कि काम का भार तथा शिफ्ट के घंटे किस प्रकार लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं”।
यह निष्कर्ष शिकागो में रेडियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका (आरएसएनए) की सालाना बैठक में पेश किए गए हैं।
(इनपुट्स आईएएनएस से)
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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