- सुप्रीम कोर्ट से पेलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई
- याचिकाकर्ता बोले कि भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल गलत
- कनॉट प्लेस के घायलों को मुआवजा देने और सुरक्षित उपायों पर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर देशभर में भीड़ नियंत्रण के लिए मेटैलिक पेलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है.ये याचिका पूर्व आईबी विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई, जिसमें दावा किया गया है कि हाल ही में दिल्ली के ‘संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने पैलेट दागे, जिससे 19 साल के एक प्रदर्शनकारी की एक आंख की रोशनी चली गई.
याचिकाकर्ताओं ने इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने,घटना की स्वतंत्र जांच कराने और भीड़ नियंत्रण के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित उपायों पर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की.साथ ही पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश देने की भी मांग की गई है.
हमारे पास पैलेट गन है ही नहीं- दिल्ली पुलिस
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पैलेन गन के इस्तेमाल वाले आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसके पास पैलेट गन है ही नहीं. संसद मार्च के दौरान इनके इस्तेमाल के दावे भ्रामक और गलत हैं. मामले में वास्तविक तथ्यों की जांच और अदालत की सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद और पैलेट गन से घायल दो पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस तरह के हथियार का प्रयोग न सिर्फ असंगत, बल्कि संविधान के मूल अधिकारों के भी विपरीत है.

पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग
याचिका में अदालत से अपील की गई है कि पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल को खत्म करने के निर्देश दिए जाएं. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पैलेट गन से गंभीर और स्थायी शारीरिक नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे भीड़ नियंत्रण के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.
याचिका में 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र है. इसमें कहा गया है कि उस दिन हुई कार्रवाई में कई लोग पैलेट लगने से घायल हुए थे. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सभी घायल पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए और उनके इलाज की पूरी व्यवस्था सरकार की ओर से कराई जाए.
कम नुकसान पहुंचाने वाले उपाय मौजूद
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि भीड़ नियंत्रण के लिए ऐसे वैकल्पिक और कम नुकसान पहुंचाने वाले उपाय मौजूद हैं, जिनका उपयोग किया जा सकता है. उनका कहना है कि पैलेट गन के इस्तेमाल से लोगों को स्थायी चोटें, विशेषकर आंखों को गंभीर नुकसान होने का खतरा रहता है.
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