Pune Famous Rout Bakery Bread: पुणे और वहां मिलने वाले अच्छे खाने के बारे में तो आपने भी सुना होगा. वहीं की गलियों में कई ऐसी फूड स्टोरी हैं जो बेहतरीन फूड आइटम्स हैं जो आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं. रविवार पेठ और गणेश पेठ की हलचल भरी गलियों में ही एक ऐसी ही ठिकाना छुपा हुआ है रोअट बेकर्स. ये बेकरी करीब 170 साल पुरानी है. इस जगह को और भी खास बनाता है वहां का मेन्यू, जो आज भी वैसा ही है जैसा इस बेकरी को बनाते समय रखा गया था. ना कोई चमक-दमक और ना ही ट्रेंडी एक्सपेरिमेंट. बस वही खाना जो सालों से अपने असली स्वाद के साथ बना आ रहा है.
इस बेकरी की शुरुआत 1857 में हुई थी, और सच कहें तो आज भी यहां बहुत कुछ वैसा ही है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. जहां दुनिया नई-नई फूड ट्रेंड्स के पीछे भाग रही है, वहीं ये बेकरी अपनी पहचान बनाए रखते हुए अपने खास ‘रोअट' बनाने में जुटी है. ये एक मीठी, खुशबूदार रोटी है, जिसे खाने वाले इसकी कसम खाते हैं. एक बाइट लेते ही समझ आ जाता है क्योंकि इसमें वो पुराना, सुकून देने वाला स्वाद है, जैसा दादा-दादी के जमाने के खाने में होता था.

इसमें इस्तेमाल होने वाली चीजें बहुत सिंपल हैं, रवा, चीनी, घी, इलायची, खसखस, काजू-बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स, दूध और खोया. बस इतना ही. लेकिन जब ये सब मिलते हैं, तो जो स्वाद निकलता है वो कमाल का होता है, थोड़ा रिच, हल्का भारी लेकिन दिल खुश कर देने वाला.कीमत भी बहुत ज्यादा नहीं है. एक रोअट करीब ₹60 का मिलता है, लेकिन ज्यादातर लोग एक से संतुष्ट नहीं होते. आमतौर पर लोग एक दर्जन लेते हैं. सिंपल रोअट करीब ₹600 में और स्पेशल वाला लगभग ₹960 में मिल जाता है.
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लेकिन इस जगह को खास बनाता है सिर्फ इसका स्वाद नहीं, बल्कि इसके पीछे का परिवार. ये सिर्फ एक दुकान नहीं, एक विरासत है. आज इसकी पांचवीं और छठी पीढ़ी इसे चला रही है, और परिवार के कई सदस्य आज भी रोजमर्रा के काम में जुड़े हुए हैं. लगभग 20 कर्मचारियों के साथ ये जगह आज भी परंपरा, मेहनत और दिल से चलती है.

Photo Credit: Instagram/ @the.foodie.yatra
एक और दिलचस्प बात, यहां आज भी लोग अपनी सामग्री लेकर आते हैं और उनसे रोअट बनवाते हैं. आज के समय में ये थोड़ा अलग लगता है, लेकिन कई परिवारों के लिए, खासकर त्योहारों और धार्मिक मौकों पर, ये एक पुरानी परंपरा है. कहा जाता है कि मुहर्रम के दौरान रोअट चढ़ाने की परंपरा भी यहीं से शुरू हुई थी. पहले ये बेकरी सिर्फ उस समय कुछ महीनों के लिए खुलती थी, लेकिन 90 के दशक में जैसे-जैसे लोगों का प्यार बढ़ा, ये सालभर चलने लगी. और जब हम कहते हैं कि लोग इसे पसंद करते हैं, तो सच में करते हैं. कुछ लोग तो 50 से 100 किलो तक रोअट एक साथ खरीदकर ले जाते हैं.
समय के साथ इस छोटी सी बेकरी के दीवाने सिर्फ पुणे तक ही सीमित नहीं रहे. महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से लेकर कनाडा, दुबई और ऑस्ट्रेलिया तक, लोग किसी न किसी तरह इन रोअट्स को मंगवा ही लेते हैं. कई बड़ी हस्तियां भी यहां आ चुकी हैं, जैसे इंदिरा गांधी, शरद पवार और दिलीप कुमार. एक ऐसे शहर में जो हमेशा आगे बढ़ रहा है, ये बेकरी एक ठहराव जैसा महसूस होती है. यहां कुछ भी दिखावटी नहीं है, बस सच्चा स्वाद, जो पीढ़ियों से वैसे का वैसा बना हुआ है. और शायद यही वजह है कि लोग बार-बार यहां लौटकर आते हैं.
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