Belly Fat: आप में से कितने लोग इस बात से परेशान हैं कि सब कुछ करने के बाद भी पेट कम नहीं हो रहा. सिट अप्स कर लिए, रनिंग भी कर ली, डाइट भी बहुत ज्यादा फॉलो कर ली. पर पेट की चर्बी मानो बॉडी से चिपक ही गई है. आपको बता दें कि बैली फैट दो तरह का होता है. एक होता है सबक्यूटेनियस फैट जो स्किन के नीचे चिपका हुआ होता है और दूसरा होता है विसरल फैट जो पेट के अंदर लीवर, पैनक्रियाज, इंटेस्टाइन और किडनी के आसपास जमा होता है. जहां सबकोटेनियस फैट मोस्टली एक कॉस्मेटिक प्रॉब्लम है. वहीं विसरल फैट बॉडी को अंदर ही अंदर डैमेज करता रहता है. तो चलिए आज हम जानते डॉक्टर सलीम जैदी द्वारा बताई गई कुछ ऐसी टिप्स के बारे में जिसकी मदद से 2 हफ्ते के अंदर ही आपका विसरल फैट पिघलना शुरू हो जाता है. साथ ही हम समझेंगे कि अंदर जमा यह विसरल फैट कैसे हमारी बॉडी को नुकसान पहुंचाता है. क्यों ये फैट सिर्फ रनिंग, जॉगिंग या वॉकिंग से कम नहीं हो सकता है, और आखिर में जानेंगे कुछ ऐसे मिथ्स के बारे में जिनकी वजह से पेट में जमा चर्बी कम होने के बजाय बढ़ती चली जाती है.
विसरल फैट क्या है?
यह फैट एक एक्टिव एंडोक्राइन ऑर्गन की तरह बिहेव करता है. मतलब यह हॉर्मोंस और इनफ्लेमेटरी केमिकल्स को रिलीज करता रहता है. जिससे बॉडी में क्रॉनिक इनफ्लेमेशन बढ़ता है. इंसुलिन मेटाबॉलिज्म डिस्टर्ब होता है. आर्टरीज में प्लैक जमना शुरू हो जाता है. ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है. और इवन ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क भी बढ़ जाता है. और यही वजह है कि विसरल फैट डायरेक्टली हार्ट अटैक, स्ट्रोक, टाइप टू डायबिटीज, फैटी लिवर, किडनी डिजीज और इवन इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी प्रॉब्लम्स से भी डायरेक्टली लिंक्ड होता है. सबसे शॉकिंग बात ये है कि ये फैट सिर्फ मोटे लोगों मे ही नहीं बल्कि पतले लोगों में भी हो सकता है. बहुत से पतले लोगों में भी विसरल फैट बढ़ा हुआ होता है. और इस कंडीशन को कहते हैं टीओएफआई यानी थिन आउटसाइड फैट इनसाइड.
इसके अलावा विसरल फैट सेल्स रेजिस्टेंस नाम का एक हार्मोन रिलीज करती है. और यह रेजिस्टेंट हार्मोन इंसुलिन की बॉडी में जो बोलचाल होती है सेल्स के साथ उसको बिगाड़ देता है. जिससे होता क्या है कि सेल्स इंसुलिन को पहचानना बंद कर देते हैं. ब्लड शुगर बढ़ने लगती है. पैनक्रियाज इस शुगर को कंट्रोल करने के लिए और ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है और हाई इंसुलिन फैट के ब्रेकडाउन को और ज्यादा रोक देती है और इनफ्लेमेशन बॉडी में और ज्यादा बढ़ता चला जाता है. इससे अल्टीमेटली एक कभी ना खत्म होने वाली साइकिल शुरू हो जाती है. यह एक बहुत ही डेंजरस साइकिल है. जहां पेट का फैट इतना ज्यादा स्टर्बन हो जाता है कि सिर्फ एक्सरसाइजज़ उसके ऊपर काम ही नहीं कर पाती और यह बढ़ता चला जाता है.
मिथ
इसके साथ ही एक और बहुत बड़ा मिथ है कि अगर आपका पेट बढ़ा हुआ है, तो आप पेट की एक्सरसाइज करना शुरू कर दीजिए. ये कम हो जाएगा. क्योंकि सच ये है कि विसरल फैट का पेट की मसल से कोई लेना देना ही नहीं होता. आप चाहे जितना मर्जी क्रंचेस कर लें, सिट अप्स कर लें या फिर प्लैंक्स कर लें. आपकी मसल्स तो स्ट्रांग हो जाएंगी. शायद सबकोटीनस फैट भी थोड़ा सा आपका कम होने लगे लेकिन अंदर जमा हुआ जो विसरल फैट है वो बिल्कुल भी नहीं हिलेगा. क्योंकि विसरल फैट मसल मूवमेंट से नहीं बल्कि हार्मोंस से कंट्रोल होता है. जैसे कि इंसुलिन, कॉर्टिसोल और इंफ्लेमेटरी केमिकल्स.
विसरल फैट कैसे कम कर सकते हैं
सबसे पहला स्टेप है डाइट चेंज
विसरल फैट का रिलेशन कैलोरीज से कम और इंसुलिन स्पाइक्स से ज्यादा होता है. हमारी इंडियन डाइट इंसुलिन को सबसे ज्यादा डिस्टर्ब करती है. क्योंकि हमारी डाइट्स मेनली कार्बोहाइड्रेट सेंट्रिक होती हैं. सोचिए हम रोजाना क्या खाते हैं? सुबह में चाय पी ली. साथ में बिस्किट्स या रस खा लिए. दोपहर में तीन-चार चपाती या फिर परांठा खा लिया. शाम की चाय के साथ हमने कोई नमकीन खा ली या कोई बेकरी आइटम खा लिया और रात को राइस या फिर परांठा या रोटी खा ली. इमेजिन कीजिए इस तरह की चीजें खाने से दिन में हमारे शरीर को कम से कम पांच बार इंसुलिन स्पाइक्स देखना पड़ता है. अब इंसुलिन जितना ज्यादा स्पाइक होगा आप उतना ही ज्यादा फैट को स्टोर करेंगे. स्पेशली विसरल फैट को. तो सबसे पहली चीज जो आपको फॉलो करनी है वो है हाई कार्ब्स, हाई ग्लाइसेमिक फूड्स को दो हफ्ते के लिए बिल्कुल कम कर देना है. इसके साथ ही वाइट राइस, मैदा, ब्रेड, गेहूं के आटे की रोटी, मीठी चाय, बिस्किट्स, रस्क, नमकीन, आलू भुजिया, बेकरी आइटम्स, मीठा दही या फ्लेवर्ड दही या फ्लेवर्ड मिल्क, केला, आम और अंगूर जैसी चीजों का सेवन करने से परहेज करना चाहिए.
इन सभी चीजों के अंदर कार्बोहाइड्रेट्स बहुत ज्यादा पाए जाते हैं और इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी हाई होता है. वैसे ये कंप्लीट लिस्ट नहीं है. सिर्फ एक इंडिकेटिव लिस्ट है ताकि आपको एक मोटा-मोटा आईडिया लग जाए कि आपको ऐसी चीजें नहीं खानी है जिनमें कार्बोहाइड्रेट्स ज्यादा होते हैं. जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई होता है और अगर आपने ऐसा कर लिया तो आप देखेंगे कि सिर्फ 5 से 7 दिनों में ही पेट का फूलना और टाइट महसूस होना आपको कम हो जाएगा.
क्या खाएं
अब ऐसे में सवाल उठता है कि फिर हम क्या खाएं? आप मूंग की दाल खाइए, मसूर की दाल , चने, हरी सब्जियां, लौकी, तोरी, बींस, गोभी, पनीर, अंडा, फिश, लीन मीट थोड़ी क्वांटिटी में देसी घी, बादाम और अखरोट जैसी आप चीजें खाना शुरू कर दीजिए. तीन चपाती की जगह आप एक से दो चपाती लीजिए और इसकी जगह एक रोटी की जगह आप थोड़ी सब्जी एक्स्ट्रा ले लीजिए. व्हाइट राइस की जगह आप मिलेट्स या फिर ब्राउन राइस को लीजिए. चाय फीकी पीजिए और मीठा बिल्कुल छोड़ दीजिए.
इंटरमिटेंट फास्टिंग
दूसरा जरूरी स्टेप है फास्टिंग. शुरुआत में सिर्फ आप अपने ब्रेकफास्ट का टाइम थोड़ा सा लेट कर दीजिए. आपको बस इस हैबिट को थोड़ा सा स्ट्रक्चरर्ड बनाना है. यानी आपको 16/8 से फास्टिंग शुरू करनी है. वो भी सिर्फ 14 दिन के लिए. इसका मतलब यह हुआ कि आपको 24 घंटे में से 16 घंटे कुछ नहीं खाना पीना है और सिर्फ आपको 8 घंटे अपनी जो ईटिंग विंडो है उसको ओपन रखना है. फास्टिंग के दौरान आप सिर्फ पानी, ब्लैक कॉफी या फिर फीकी चाय पी सकते हैं और कुछ नहीं. इस तरह से इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से आपका इंसुलिन लो होता है. बॉडी फैट बर्निंग मोड में शिफ्ट हो जाती है. इनफ्लेमेशन बॉडी में कम होने लगता है और डाइजेशन भी इंप्रूव होता है. फास्टिंग के दौरान चीनी वाली चाय बिल्कुल भी नहीं पीनी है.

एक्सरसाइज
तीसरा स्टेप है कुछ खास एक्सरसाइजेस करना जिसे मेटाबॉलिक ट्रेनिंग भी कहा जाता है. इसमें सबसे अच्छी बात यह होती है कि आपको जिम जाने की कोई जरूरत नहीं है. विरल फैट मेल्ट होता है मेटाबॉलिक ट्रेनिंग से जिसमें शॉर्ट बस्ट ऑफ एक्टिविटी के साथ स्मॉल ब्रेक्स ऑफ रेस्ट होते हैं. इस प्रोसेस को टेक्निकली एचआईआईटी कहते हैं. यानी हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग.
अगर आप एकदम बिगिनर हैं, पहली बार ही सब शुरू कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहले वार्म अप करना है और 30 सेकंड तक स्पीड से जॉगिंग या रनिंग करनी है.
उसके बाद 30 सेकंड के लिए आपको अपनी स्पीड स्लो करके फिर रनिंग को या जॉगिंग को कंटिन्यू करना है.
इसके बाद तुरंत आपको 20 फास्ट-फास्ट स्क्वाड्स करने हैं. यानी जल्दी-जल्दी स्क्वाड्स करने हैं 20 बार और फिर 20 सेकंड आपको रेस्ट लेना है. रेस्ट लेने के बाद 15 सेकंड तेजी से आपको स्टेयर्स के ऊपर उतरना चढ़ना है और इस तरह से आपकी एक साइकिल कंप्लीट हो जाएगी. आपको ये साइकिल पूरे चार बार रिपीट करनी है.
ब्रिस्क वॉक
आपको 1 मिनट ब्रिस्क वॉक करनी है. उसके बाद आपको तुरंत स्लो वॉक करनी है. फिर 2 मिनट आपको लेट कर स्टेशनरी साइकिलिंग करनी है और फिर 1 मिनट ब्रिस्क वॉकिंग करनी है. इस तरह से यह साइकिल आपको पांच से छह बार रिपीट करना होगा.
सूर्य नमस्कार
इसके अलावा सूर्य नमस्कार, कपालभाति, नौकासन और भुजंगासन. यह कुछ ऐसे योगा पोज़ हैं जिन्हें कि आप अगर करेंगे तो आपको काफी फायदा मिल सकता है.
इन बातों का भी रखें ध्यान
अगर आपको पेट में गैस, ब्लोटिंग या एसिडिटी रहती है, उनमें बेली फैट भी काफी ज्यादा होता है. पेट फूला-फूला रहता है. और यह कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि यह गट इमंबैलेंस का डायरेक्ट साइन होता है. इस इमंबैलेंस को ठीक करने के लिए आप घर का बना हुआ, घर का जमाया हुआ दही खाना शुरू कर दीजिए. नमकीन छाछ पीजिए. गाजर या चुकंदर से बनी हुई कांजी लीजिए. फर्मेंटेड बैटर से बना हुआ डोसा या फिर इडली खाइए. क्योंकि यह जो फूड्स हैं, ये आपके पेट के अंदर जाकर आपके गुड बैक्टीरिया को इंप्रूव करते हैं. और जब आपके पेट में गुड बैक्टीरिया इंप्रूव होते हैं, तो उससे आपकी हैवीनेस, ब्लोटिंग और डाइजेशन वगैरह सब पर एक पॉजिटिव इफेक्ट मिलता है देखने को.
स्ट्रेस मैनेजमेंटविसरल फैट का सबसे बड़ा छुपा हुआ कारण स्ट्रेस होता है. घर की जिम्मेदारियां, ऑफिस का वर्क लोड, पैसों की चिंता, बच्चों की परवरिश की चिंता, रात तक मोबाइल को स्क्रॉल करते रहना और सही नींद का ना मिल पाना. ये सब चीजें मिलकर हमारे कॉर्टिसोल को बढ़ा देती हैं. आप जितना ज्यादा स्ट्रेस्ड होंगे, पेट का फैट उतना ही ज्यादा चिपकता चला जाएगा, बढ़ता चला जाएगा. इसलिए आपको अपने रूटीन में कुछ छोटी-छोटी स्ट्रेस कंट्रोल हैबिट्स शामिल करनी होंगी. जैसे हर रोज 10 से 15 मिनट अनुलोम-विलोम कीजिए. इवनिंग वॉक कीजिए. सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन से आप दूर रहिए और रात को डिवोशनल रीडिंग या सॉफ्ट म्यूजिक को सुनिए.
अगर आप 14 दिन तक इस प्रोग्राम को सिंसियरली फॉलो करेंगे, तो विसरल फैट का मेल्ट डाउन पक्का शुरू हो जाएगा. आप अपने चेंजेस को नोट कीजिए और हमें कमेंट में बताइए कि आपको सबसे पहले क्या इंप्रूवमेंट फील हुआ.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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