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बारिश में दिल्लीवाले सबसे पहले क्या खाते हैं? जवाब आपको भी हैरान नहीं करेगा

Best Delhi Monsoon Food: चांदनी चौक की कचौड़ी, करोल बाग के पकौड़े, लाजपत नगर के राम लड्डू और मजनू का टीला के मोमोज़- जानिए दिल्ली के सबसे लोकप्रिय मानसूनी स्ट्रीट फूड.

बारिश में दिल्लीवाले सबसे पहले क्या खाते हैं? जवाब आपको भी हैरान नहीं करेगा
दिल्ली की बारिश, पकौड़े और चाय... बस यही प्यार है!
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दिल्ली में मानसून की पहली बारिश सिर्फ़ तपती गर्मी से राहत नहीं देती, बल्कि अपने साथ ढेरों यादें, पुरानी आदतें और बरसों से चले आ रहे स्वाद भी लेकर आती है. जैसे ही आसमान में काले बादल छाते हैं और भीगी मिट्टी की खुशबू हवा में घुलती है, दिल्लीवासी घरों से बाहर निकल पड़ते हैं. लेकिन उनका मक़सद सिर्फ़ बारिश का आनंद लेना नहीं होता, बल्कि उन स्वादों तक लौटना भी होता है जो हर बरसात के साथ उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाते हैं.

यह जानने के लिए कि दिल्ली में बारिश का असली स्वाद क्या है, NDTV ने राजधानी की गलियों का रुख किया. यह सफर केवल मशहूर खाने पीने की दुकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन लोगों की यादों और कहानियों तक भी पहुंचा, जो हर मानसून में बरसों पुराने स्वादों और अपनी पसंदीदा जगहों की ओर लौट आते हैं.

दिल्ली में मानसून के दौरान सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड

  • कचौड़ी
  • पकौड़े
  • भुट्टा
  • राम लड्डू
  • छोले-भठूरे

मोमोज़ और थुकपा चाय बारिश का मौसम आते ही दिल्ली के कई इलाकों में इन स्ट्रीट फूड्स की मांग बढ़ जाती है.

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जब बारिश लोगों को पुराने ठिकानों तक खींच लाती है

सफ़र की शुरुआत हुई पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक गलियों से. जहां चांदनी चौक और परांठे वाली गली की भीड़ के बीच हमारी नजर एक छोटी सी कचौड़ी की दुकान पर ठहर गई. आसपास के लोगों के अनुसार, यह दुकान पिछले करीब 70 सालों से अपनी पारंपरिक स्वादिष्ट कचौड़ियों के लिए लोगों की पहली पसंद बनी हुई है.

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यहां हमारी मुलाकात हुई ग्रेटर कैलाश की रहने वाली मीना से जो पिछले लगभग 40 सालों से इस दुकान की कचौड़ी खाने आती रही हैं. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मैं खरीदारी करने नहीं आई हूं. बारिश ने घर से बाहर निकलने का बहाना दे दिया. बस वही पुरानी कचौड़ी खाने का मन था.”

उनकी यह बात शायद हर उस दिल्लीवासी की कहानी है, जो बारिश के साथ अपने पुराने स्वादों की ओर लौट पड़ता है.

बारिश और पकौड़े: दिल्ली की कभी न बदलने वाली परंपरा

अगर बारिश का नाम आते ही किसी एक चीज़ की सबसे पहले याद आती है, तो वह है गरमा गरम पकौड़े. इसी स्वाद की तलाश हमें करोल बाग़ ले गई. मेट्रो स्टेशन से कुछ ही दूरी पर दुकानों से उठती ताज़े पकौड़ों की खुशबू राहगीरों को अपनी ओर खींच रही थी. यहां आलू, प्याज़ और हरी मिर्च के पकौड़ों के साथ साथ करेला पकौड़ा भी लोगों के बीच खासा लोकप्रिय नजर आया.

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इसी दौरान हमारी मुलाकात एकता आहूजा से हुई. उन्होंने बताया कि पिछले करीब 30 सालों से हर मानसून में वह इसी दुकान से पकौड़े खरीदकर घर ले जाती हैं. “बारिश शुरू होते ही घर में पकौड़े ले जाने की परंपरा बन गई है. अब तो बच्चों को भी इसी का इंतज़ार रहता है,” उन्होंने कहा.

पकौड़े के दुकानदार प्रेम बजाज बताते हैं कि जैसे ही मौसम बदलता है, दुकान की रौनक भी बदल जाती है “गर्मी में लोग हल्का खाना पसंद करते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही ग्राहकों की संख्या अचानक बढ़ जाती है. हमारे लिए मानसून सबसे अच्छे सीज़न में से एक होता है.”

भुट्टा: बारिश और स्वाद का अटूट रिश्ता

मानसून और भुट्टे का रिश्ता ऐसा है जो समय के साथ कभी फीका नहीं पड़ता. इसी स्वाद की तलाश हमें कमला नगर ले गई, जहां पप्पू अंगारों पर भुट्टे सेंकते नजर आए. हर भुट्टे को नींबू, नमक और अपने खास मसाले के साथ तैयार कर ग्राहकों को परोसा जा रहा था.

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राम लड्डू: लाजपत नगर की पहचान

बारिश के बाद भीगी भीगी सड़कों और ठंडी फिज़ा के बीच हमारा सफ़र पहुंचा लाजपत नगर. यहां की व्यस्त गलियों में खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ के बीच एक और चीज़ लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी—गरमा गरम राम लड्डू. मूंग दाल से तैयार किए गए इन राम लड्डुओं को कद्दूकस की हुई मूली, हरी चटनी और प्याज़ के साथ परोसा जा रहा था.

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बारिश के सुहाने मौसम में इस साधारण से दिखने वाले स्ट्रीट फूड का स्वाद लोगों को बार बार अपनी ओर खींच रहा था.  इसी बीच दोस्तों के साथ पहुंचे शिवम ने मुस्कुराते हुए कहा, “लाजपत नगर आकर अगर राम लड्डू न खाए जाएं, तो लगता है जैसे यहां का सफ़र अधूरा रह गया.”

दिल्ली में सबसे अच्छे चोले भटूरे कहां मिलते हैं?

यह सवाल दिल्ली में छेड़ दीजिए और जवाबों की एक लंबी फेहरिस्त सामने आ जाएगी. कोई करोल बाग़ के चोले भटूरे की कसम खाएगा, तो कोई चांदनी चौक की पुरानी दुकान का ज़िक्र करेगा. कुछ लोग सरोजिनी नगर को पसंद करेंगे, जबकि कई अपने मोहल्ले की छोटी सी दुकान को ही सबसे बेहतरीन बताएंगे.

शायद यही वजह है कि इस सवाल का कोई एक सही जवाब नहीं हो सकता. इसी लिए जब हम पहाड़गंज में चोले भटूरे का स्वाद ले रहे थे तो यही एहसास हुआ कि दिल्ली के खाने की पहचान सिर्फ़ मसालों और रेसिपी से नहीं बनती, बल्कि उन यादों से बनती है जो वर्षों से लोगों के साथ जुड़ी रहती हैं.

हर प्लेट के साथ एक कहानी परोसी जाती है, अपने मोहल्ले की, अपने बचपन की और उस स्वाद की, जिसके लिए लोग बार बार लौट आते हैं.

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जब मानसून मिला तिब्बती जायकों से

शाम ढलने लगी थी और आसमान में काले बादलों ने एक बार फिर डेरा जमा लिया था. ऐसे में हमारा अगला पड़ाव बना मजनू का टीला, जहां दिल्ली के पारंपरिक स्ट्रीट फूड की जगह तिब्बती जायकों की दुनिया हमारा इंतजार कर रही थी. गलियों में भाप छोड़ते मोमोज़, तीखी चटनियों की खुशबू और गर्मागर्म थुकपा और लाफिंग का स्वाद लोगों को अपनी ओर खींच रहा था.

यहां आए कई लोगों ने बताया कि मानसून के दौरान तिब्बती खाने का स्वाद अलग ही सुकून देता है. वहीं कुछ लोगों ने दिल्ली हाट के उत्तर पूर्वी राज्यों के स्टॉल का भी ज़िक्र किया, जहां बारिश के मौसम में मोमोज़ और पारंपरिक व्यंजनों भी खासा लोगप्रिय हैं.

आख़िर में… एक कप चाय

शाम ढलते ढलते हम पहुंचे चित्तरंजन पार्क, जिसे लोग प्यार से ‘मिनी कोलकाता' भी कहते हैं. हल्की फुहारों और ठंडी हवाओं के बीच यहां लोग झालमूड़ी का स्वाद लेते हुए बारिश का आनंद उठा रहे थे. इसी दौरान NDTV की मुलाकात डॉक्टरों के एक ग्रुप से हुई, जो अस्पताल की व्यस्त दिनचर्या से कुछ पल निकालकर यहां पहुंचे थे. बातचीत के दौरान एक दिलचस्प बात सामने आई. उनके लिए इस मौसम में खाने से कहीं ज्यादा अहमियत चाय की थी.

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डॉ. अनुज जैन ने कहा, “चाय लोगों को साथ बैठने और बातचीत करने का एक बहाना है”, वहीं डॉ. पंकज के लिए बारिश में चाय का मतलब था—लंबे और थकाऊ कामकाजी दिन के बाद सुकून के कुछ पल.

जब उनसे पूछा गया कि क्या चाय स्वास्थ्य के लिए अच्छी है, तो दोनों मुस्कुरा दिए. उन्होंने कोई सलाह तो नहीं दी, बल्कि उस एहसास की बात की जो चाय के एक कप के साथ जुड़ा होता है.

शायद यही इस पूरे सफ़र की सबसे बड़ी सीख भी रही. दिल्ली का मानसून सिर्फ़ कचौड़ी, पकौड़ों, भुट्टे, राम लड्डू, चोले भटूरे या मोमोज़ के स्वाद तक सीमित नहीं है.

यह उन यादों का मौसम है, जो हर बरस लौट आती हैं. यह उन परंपराओं का हिस्सा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं. हर मोहल्ले का अपना स्वाद है, हर परिवार की अपनी बरसाती परंपरा और हर दिल्लीवासी की अपनी पसंद. लेकिन इस पूरे सफ़र में एक बात लगभग हर जगह सुनने को मिली— “चलिए, पहले एक कप चाय हो जाए.”

अक्‍सर पूछे जाने वाले सवाल 

दिल्ली में मानसून में कौन सा स्ट्रीट फूड सबसे लोकप्रिय है?

पकौड़े, भुट्टा, कचौड़ी, राम लड्डू और चाय मानसून के दौरान सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं.

बारिश के मौसम में दिल्ली में स्ट्रीट फूड कहां खाएं?

चांदनी चौक, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर और मजनू का टीला लोकप्रिय फूड डेस्टिनेशन हैं.

मानसून में भुट्टा इतना लोकप्रिय क्यों होता है?

बारिश और भुट्टे का रिश्ता लंबे समय से भारतीय फूड कल्चर का हिस्सा रहा है, इसलिए मानसून में इसकी मांग बढ़ जाती है.

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