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मीलों का सफर तय कर आपकी थाली तक कैसे पहुंची बिरयानी, जानें Biryani का दिलचस्प इतिहास

Biryani Origin: क्या आपको भी बिरयानी खाना पसंद है. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि बिरयानी क्यों है बिरयानी?

मीलों का सफर तय कर आपकी थाली तक कैसे पहुंची बिरयानी, जानें Biryani का दिलचस्प इतिहास
Biryani Origin: बिरयानी क्यों है बिरयानी?
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बिरयानी का नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है. जब भी कभी कुछ बेहतरीन और मसालेदार खाने का मन करता है, तो हममें से ज्यादातर लोग बिरयानी खाना पसंद करते हैं. भारत में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे बिरयानी का नाम सुनकर भूख न लगे. शादी की पार्टी हो, वीकेंड का डिनर हो या फिर दोस्तों के साथ पार्टी, बिरयानी हर मौके की शान होती है. लंबे चावल, मसालों की भीनी-भीनी खुशबू और उसमें लिपटा हुआ जूसी मीट या सब्जियां इसे खास बनाती है. 

​लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस लजीज खाने का नाम बिरयानी ही क्यों पड़ा? इसके नाम के पीछे क्या कोई खास कहानी है? आइए, आज आपको आसान भाषा में बताते हैं कि आपकी ये फेवरेट डिश कहां से आई और इसका नाम बिरयानी कैसे पड़ा.

बिरयानी का नाम बिरयानी कैसे पड़ा-

​अगर आप यह सोचते हैं कि बिरयानी पूरी तरह से एक भारतीय डिश है, तो थोड़ा सा इतिहास पलटना पड़ेगा. असल में, बिरयानी शब्द हिंदी या संस्कृत का नहीं, बल्कि फारसी (Persian) भाषा से आया ह। फारसी में एक शब्द होता है बिरियां (Birian), जिसका मतलब होता है पकाने से पहले चावल को भूनना.  पुराने समय में फारस (आज का ईरान) में चावल को पकाने से पहले घी या तेल में हल्का भूना जाता था, ताकि उसका स्वाद और खुशबू बढ़ जाए. इसके बाद उसमें मीट और मसाले मिलाए जाते थे. जब यह कुकिंग स्टाइल व्यापारियों और यात्रियों के जरिए भारत पहुंचा, तो यहां के शेफ ने इसमें अपने देश के देशी मसालों का ऐसा जादू चलाया कि इसने पूरी तरह से नया रूप ले लिया. यही 'बिरियां' आगे चलकर भारत में बिरयानी बन गया.

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​पहली बिरयानी किसने बनाई थी?

​बहुत से लोगों को लगता है कि बिरयानी भारत में सिर्फ मुगल अपने साथ लेकर आए थे. हालांकि मुगलों ने इसे मशहूर करने में बहुत बड़ा रोल निभाया, लेकिन इतिहास के पन्नों को देखें तो कहानी थोड़ी अलग है. ​कुछ इतिहासकार मानते हैं कि मुगलों से बहुत पहले ही भारत में ऐसी मिलती-जुलती चीजें बननी शुरू हो गई थीं. दक्षिण भारत में चावल और मांस को मिलाकर बनने वाली कई डिशेज का जिक्र पुराने साहित्यों में मिलता है. मुगलों ने इसे अपनी शाही किचन में जगह दी और इसमें केसर, ड्राई फ्रूट्स और तरह-तरह के खड़े मसालों का इस्तेमाल करके इसे और भी ज्यादा रॉयल बना दिया.

कैसे ​भारत आते-आते बदल गए बिरयानी के रंग-

​जब बिरयानी देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंची, तो वहां के लोगों ने इसे अपने हिसाब से ढाल लिया. आज भारत में आपको बिरयानी के दर्जनों अलग-अलग रूप देखने को मिल जाएंगे-

  • हैदराबादी बिरयानी- इसमें कच्चे मांस और चावल को एक साथ दम पर पकाया जाता है, जिसकी खुशबू खास होती है. 
  • ​लखनवी- अवधी बिरयानी- यह नवाबों के शहर की देन है, जो खाने में बहुत हल्की होती है और इसके मसाले मुंह में जाते ही घुल जाते हैं.
  • ​कोलकाता बिरयानी- इसमें आपको चावल और गोश्त के साथ एक उबला हुआ आलू और अंडा जरूर मिलेगा, जो इसका खास स्वाद है.
  • मालाबार बिरयानी- साउथ इंडिया के केरल की यह बिरयानी बिल्कुल अलग चावल और नारियल के तेल के साथ बनाई जाती है.

बिरयानी की रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें-

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