हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को रथ यात्रा होती है. इस दिन पुरी की ग्रैंड रोड पर लाखों भक्त इकट्ठा होते हैं. 2026 में, यह भव्य रथ यात्रा गुरुवार, 16 जुलाई यानी आज है. पुरी के अलावा देश भर में जगन्नाथ भगवान की सवारी निकलती है, रथ पर बैठ श्री जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर जाते हैं. इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को चढ़ाया जाने वाला भोग बहुत मशहूर है. इस भोग का स्वाद आपको अलौकिक अनुभव देता है. लेकिन अगर आप पुरी नहीं जा पा रहे तो घर पर ही भोग बना कर भगवान को चढ़ा सकते हैं.
क्यों खास है जगन्नाथ महाप्रसाद?
जगन्नाथ महाप्रसाद मंदिर का कोई आम खाना नहीं है; यह 'रोसाघर' से आता है. माना जाता है कि यह दुनिया के सबसे बड़े रसोईघरों में से एक है. 'सुआर' कहलाने वाले 500 से ज़्यादा पारंपरिक रसोइए रोज़ाना लकड़ी से जलने वाले लगभग 752 चूल्हों पर मिट्टी के बर्तनों में इसे बनाते हैं.
कहते हैं कि इस रसोई में सबसे ऊपर रखे बर्तन का खाना नीचे रखे बर्तनों से पहले पक जाता है.

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रथ यात्रा के इस भोग से जुड़े कुछ नियम हैं. जैसे इसमें कभी भी प्याज़, लहसुन, आलू, टमाटर या लौकी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. सब कुछ सिर्फ़ मिट्टी के बर्तनों (कुडुआ) में लकड़ी की आग पर पकाया जाता है. इस प्रसाद को पकाने में मौजूद दो कुंओं गंगा और यमुना कुओं के पानी इस्तेमाल होता है.
इलायची और लौंग तभी डाले जाते हैं जब भोग लगाने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है. इस तरह तैयार होगा है जगन्नाथ का मशहूर '56 भोग'.
आम दिनों में इस रसोईघर में 25,000 से 30,000 लोगों को खाना खिलाया जाता है, लेकिन रथ यात्रा के दौरान यह संख्या 2,00,000 से भी ज़्यादा हो जाती है.
रथ यात्रा भोग रेसिपी जो आप घर पर बना सकते हैं
दालमा :
दालमा तूर दाल है जिसे कच्चे केले, कद्दू, अरबी और पपीते जैसी सब्जियों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है.

कैसे बनाएं दालमा
- 1 कप तूर दाल को कटी हुई सब्जियों, हल्दी और नमक के साथ प्रेशर-कुक करें.
- घी में जीरा, सूखी लाल मिर्च, तेज पत्ता और एक चुटकी पंच फोरन डालकर तड़का लगाएं.
- कद्दूकस किया हुआ नारियल और थोड़ा भुना जीरा पाउडर डालें, फिर इसे दाल में मिलाएं.
- एक चम्मच घी डालकर इसे पूरा करें. यहां पढ़ें रेसिपी.
कनिका
यह खुशबूदार मीठा पुलाव भगवान जगन्नाथ का पसंदीदा माना जाता है.
कैसे बनाएं कनिका
- भीगे हुए बासमती चावल को तेजपत्ता, इलायची, लौंग और दालचीनी के साथ घी में भूनें.
- गर्म पानी, चीनी या गुड़, एक चुटकी नमक और कुछ केसर के रेशे डालें, फिर फूलने तक पकाएं.
- काजू, किशमिश और थोड़ा सा कसा हुआ जायफल डालकर मिलाएं.
- अब मीठा और सुगंध से भरा कनिका तैयार है.

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खीरी :
कैसे बनाएं खीरी
- फुल-फैट दूध को गाढ़ा होने तक उबालें.
- धुले हुए चावल डालें और धीमी आंच पर, बार-बार चलाते हुए, क्रीमी होने तक पकाएं.
- चीनी डालकर मीठा करें.
- फिर इलायची, केसर के कुछ रेशे और कटे हुए मेवे डालकर स्वाद बढ़ाएं.
- पुरी में इसे गर्म परोसा जाता है और इसका स्वाद सच में इसी तरह सबसे अच्छा लगता है. यहां पढ़ें.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. रथ यात्रा के दौरान चढ़ाया जाने वाला भोग क्या कहलाता है?
रथ यात्रा के मौके पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को जो पवित्र शाकाहारी भोजन चढ़ाया जाता है, उसे रथ यात्रा भोग कहा जाता है. भगवान को अर्पित होने के बाद यही भोग महाप्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है.
2. जगन्नाथ महाप्रसाद में क्या-क्या शामिल होता है?
जगन्नाथ महाप्रसाद में पारंपरिक छप्पन भोग में कई तरह के व्यंजन होते हैं. जिनमें इनमें चावल, दालमा, कनिका, खीर और खाजा शामिल होते हैं. इन सभी प्रसादों को सात्विक तरीके ेस मिट्टी के बर्तनों में लकड़ी की आंच पर पकाया जाता है.
3. पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भोग बनाते समय प्याज-लहसुन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता?
मंदिर के भोजन में सात्विक परंपराओं का पूरी तरह पालन किया जाता है. इसी कारण प्याज, लहसुन के साथ ही कुछ दूसरी चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि भोग की शुद्धता और धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखा जा सके.
4. 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा किस दिन निकलेगी?
साल 2026 में जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा 16 जुलाई को आयोजित होगी. वहीं, भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा यानी बहुडा यात्रा 24 जुलाई 2026 को निकलेगी.
5. महाप्रसाद की सबसे लोकप्रिय मिठाई कौन-सी मानी जाती है?
खाजा को महाप्रसाद की सबसे प्रसिद्ध मिठाइयों में गिना जाता है. इसकी कुरकुरी परतें और मीठा स्वाद इसे भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते हैं, इसलिए कई लोग इसे प्रसाद के रूप में अपने घर भी ले जाते हैं.
6. क्या जगन्नाथ भोग घर पर तैयार किया जा सकता है?
बिल्कुल. दालमा, कनिका और खीर जैसे कई पारंपरिक व्यंजन घर पर भी बनाए जा सकते हैं. बस ध्यान रहे कि भोजन पूरी तरह सात्विक हो और उसमें प्याज तथा लहसुन का इस्तेमाल न किया जाए.
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