'कुछ कुछ होता है' से पहले अबु सलेम ने करण जौहर को दी थी जान से मारने की धमकी

'कुछ कुछ होता है' से पहले अबु सलेम ने करण जौहर को दी थी जान से मारने की धमकी

निर्देशक के तौर पर करण जौहर की पहली फिल्म थी 'कुछ कुछ होता है'

खास बातें

  • फिल्म की प्रीमियर के दौरान करण जौहर को एक कमरे में बंद रखा गया था.
  • फिल्म की रिलीज से पहले करण अपने माता-पिता के साथ लंदन चले गए थे.
  • आदित्य चोपड़ा ने फोन पर दी थी फिल्म के सफल होने की खबर.
नई दिल्ली:

फिल्मकार करण जौहर की निर्देशक के तौर पर पहली फिल्म 'कुछ कुछ होता है' थी. इस फिल्म का निर्माण उनके पिता के प्रोडक्शन हाउस धर्मा प्रोडक्शन ने किया था. इससे पहले धर्मा की लगातार कई फिल्में फ्लॉप हो गई थीं. करण जौहर ने अपनी बायोग्राफी 'एन अनसूटेबल बॉय' में लिखा है कि 'कुछ कुछ होता है' में उनका सबकुछ दांव पर लगा था, फिल्म नहीं चलती तो शायद उसके बाद कोई और फिल्म नहीं बना पाते. ऐसे में फिल्म की रिलीज से कुछ दिनों पहले अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने फोन करके करण की मां हीरू जौहर को धमकी दी थी कि यदि फिल्म रिलीज हुई तो वह करण को गोली मार देंगे. (काजोल से टूटी 25 सालों की दोस्ती)

करण ने अपनी बायोग्राफी में लिखा, 'सबकुछ वैसा ही हो रहा था जैसा हमने प्लान किया था. 'बड़े मियां छोटे मियां' भी दिवाली के मौके पर उसी शुक्रवार को रिलीज हो रही थी.' करण ने लिखा, 'मेरे पिता फिल्म का प्रीमियर रखना चाहते थे. सोमवार को प्रीमियर के लिए इन्विटेशन कार्ड बांट रहे थे. मेरी मासी हमारी मदद के लिए आई थीं. मैं उन्हें छोड़ने नीचे गया, मां घर पर अकेली थी, घर के काम में हाथ बंटाने वाले लोग भी बाहर गए हुए थे. फोन बजा. मेरी मां ने फोन उठाया. अंडरवर्ल्ड से फोन आया था. एक आदमी ने कहा, 'तुम्हारे बेटे ने लाल टी-शर्ट पहन रखी है. मैं उसे देख सकता हूं. और यदि इस शुक्रवार को तुम लोगों ने फिल्म रिलीज की तो मैं उसे गोली मार दूंगा.' किन्हीं कारणों से वे नहीं चाहते थे कि फिल्म उस शुक्रवार को रिलीज हो; हमें नहीं पता क्यों. वह अबु सलेम का फोन था और मेरी मां डर से कांप रही थीं. उन्होंने फोन नीचे रखा और दरवाजे की तरफ भागीं. उन्होंने लिफ्ट का बटन दबाया, मैं ऊपर आ रहा था. वह मेरी मां के लिए बहुत मुश्किल समय था. जैसे ही मैं पहुंचा वह मुझे खींचकर कमरे में ले गईं और कहा, 'तुम्हे पुलिस को बुलाना होगा.' और उन्होंने कॉल के बारे में बताया.'

करण ने लिखा कि शाम को आदित्य चोपड़ा, शाहरुख खान और पुलिस उनके घर पहुंची. पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे करण की रक्षा करेंगे लेकिन उन्हें रिलीज रोकनी नहीं चाहिए. पुलिस ने उनसे कहा कि वे अपना डर दिखा नहीं सकते हैं.  करण की मां राजी नहीं हुईं लेकिन गुरुवार को फिल्म का प्रीमियर रखा गया. करण ने लिखा, 'उन्होंने मुझे एक छोटे कमरे में बंद कर दिया ताकि मैं सुरक्षित रह सकूं. इंडस्ट्री के सभी लोग पहुंचे. मेरे पिता के सभी से संबंध इतने अच्छे थे कि सभी चाहते थे कि 'कुछ कुछ होता है' हिट हो.' करण ने आगे लिखा, 'मेरा हमेशा से सपना था कि मैं शम्मी कपूर को उनकी कार से उतरकर अपनी फिल्म के प्रीमियर के लिए आते देखूं.'

उन्होंने आगे लिखा, 'लेकिन मुझे एक कमरे में बंद कर दिया गया था. मेरे माता-पिता बाहर थे. मेरी मां दुखी थीं, क्योंकि शम्मी कपूर आने वाले थे और मैं वह लम्हा देखने के लिए वहां नहीं था. वह बार-बार कह रही थीं, 'मेरे बेटे का सपना पूरा नहीं पाएगा'. तब शाहरुख खान मेरे पास आए, मुझे खींचकर बाहर लेकर आए और कहा, 'मैं यहां तुम्हारे आगे खड़ा हूं. देखते हैं कौन तुम्हे गोली मारता है. मैं यहीं हूं.' उन्होंने मेरी मां से कहा, 'कुछ नहीं होगा, मैं एक पठान हूं. मुझे कुछ नहीं हो सकता और आपके बेटे को कुछ नहीं होगा. वह मेरे भाई जैसा है. कुछ नहीं होगा.' तो मैं वहां खड़ा रहा, जैसा मैंने सोचा था शम्मी कपूर मर्सीडीज में आए. मुझे मेरा वह खास लम्हा मिल गया था. पर मेरी मां डरी हुई थीं. मैं वापस अंदर चला गया और फिर मेरे असिस्टेंट मुझे आकर बताते थे कि किस सीन पर लोग हंसे, किस सीन पर रोए.'

करण, उनकी मां और उनके पिता यश जौहर को पुलिस ने सुझाव दिया कि उन्हें मुंबई से बाहर चले जाना चाहिए, इसलिए वे तीनों उसी रात लंदन चले गए. करण ने लिखा, 'हम दूर थे, सबसे कटे हुए, लंदन में एक किराए के घर में. हम वहां के लोकल थिएटर में फिल्म देखने गए पर वह वैसा नहीं था. मेरी मां इतनी डरी हुई थीं कि वह प्रार्थना कर रही थीं कि फिल्म फ्लॉप हो जाए ताकि हम सुरक्षित रहें.' करण जौहर ने लिखा कि सोमवार को आदित्य चोपड़ा ने उन्हें फोन किया और बताया कि फिल्म ब्लॉकबस्टर है और लोग फिल्म के लिए पागल हो रहे हैं.

करण जौहर ने लिखा कि एक प्रोड्यूसर के तौर पर उनके पिता ने 18 साल बाद एक सफल फिल्म दी थी. 'कुछ कुछ होता है' से पहली उनकी आखिरी सफल फिल्म 1980 में आई 'दोस्ताना' थी. करण ने लिखा कि एक महीने बाद जब वे वापस मुंबई आए तो फिल्म को लेकर लोगों का पागलपन कुछ कम हो गया था. लड़कियां काजोल के जैसे हेयरबैंड में, लोग कूलचेन पहने दिख रहे थे, शाहरुख टी-शर्ट खरीद रहे थे. यह सब उनके लिए एक नया और अच्छा अनुभव था.


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