
फिल्म 'रुस्तम' के दृश्य में अक्षय कुमार
मुंबई:
बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार का कहना है कि उनकी आगामी फिल्म 'रुस्तम' लोगों को देश की न्याय प्रणाली के बारे में सोचने, चर्चा करने पर मजबूर कर देगी. 'रुस्तम' के ट्रेलर को मिली शानदार प्रतिक्रिया पर अक्षय ने कहा, 'मुझे फिल्म और इसकी अवधारणा पसंद आई थी, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि जो मुझे रोचक और मजेदार लग रहा है, उस पर दुनिया कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करेगी.
फिल्म का किरदार बेहद रोमांचक था
अक्षय ने 'रुस्तम' में एक ऐसे पति का किरदार निभाया है, जो अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता है और अपनी पत्नी के प्रेमी का कत्ल कर देता है. उनके लिए ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाना कितना मुश्किल था जो अपने देश और अपनी पत्नी से प्यार करता है, लेकिन उस पर हत्या का आरोप लग जाता है, इस सवाल पर अक्षय ने कहा, 'मेरे लिए ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाना बेहद रोमांचक था, जिसके दिल में और कुछ नहीं केवल प्यार और देशभक्ति है. लेकिन अपराध तो अपराध होता है.'
लोग थियेटर से बाहर आते हुए चर्चा करेंगे
उन्होंने कहा, 'यह फिल्म आपको देश की न्याय प्रणाली, इंसानों के कारनामों और सही समय पर सही चीज करने की योग्यता के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगी.' अभिनेता ने कहा, 'यह एक ऐसी फिल्म है जिसके बारे में लोग थियेटर से बाहर आते हुए चर्चा करेंगे और एक-दूसरे से सवाल करेंगे कि उन परिस्थितियों में वे क्या करते और अगर वे उस न्यायपीठ में शामिल होते तो वे क्या करते?'
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
फिल्म का किरदार बेहद रोमांचक था
अक्षय ने 'रुस्तम' में एक ऐसे पति का किरदार निभाया है, जो अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता है और अपनी पत्नी के प्रेमी का कत्ल कर देता है. उनके लिए ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाना कितना मुश्किल था जो अपने देश और अपनी पत्नी से प्यार करता है, लेकिन उस पर हत्या का आरोप लग जाता है, इस सवाल पर अक्षय ने कहा, 'मेरे लिए ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाना बेहद रोमांचक था, जिसके दिल में और कुछ नहीं केवल प्यार और देशभक्ति है. लेकिन अपराध तो अपराध होता है.'
लोग थियेटर से बाहर आते हुए चर्चा करेंगे
उन्होंने कहा, 'यह फिल्म आपको देश की न्याय प्रणाली, इंसानों के कारनामों और सही समय पर सही चीज करने की योग्यता के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगी.' अभिनेता ने कहा, 'यह एक ऐसी फिल्म है जिसके बारे में लोग थियेटर से बाहर आते हुए चर्चा करेंगे और एक-दूसरे से सवाल करेंगे कि उन परिस्थितियों में वे क्या करते और अगर वे उस न्यायपीठ में शामिल होते तो वे क्या करते?'
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